फंगल इन्फेक्शन की समस्या(Fungal infection problem)

फंगल इन्फेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे उंगलियों के बीच में, सिर पर, हाथों पर, बालों में या शरीर के अन्य भागों में। यह संक्रामक होता है और आसानी से संक्रमित वस्तु या व्यक्ति के जरिए फैल सकता है।

फंगल इन्फेक्शन क्या है?(What is fungal infection)?

फंगल इन्फेक्शन एक प्रकार का संक्रमण है, जो तब होता है जब शरीर के किसी भाग पर फंगस आक्रमण करता है। यह संक्रमण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर कर सकता है|
फंगल इन्फेक्शन एक छोटे-से दाद से लेकर जानलेवा संक्रमण जितना बड़ा हो सकता है|
यह आपके शरीर पर, बालों में, नाखून पर, गुप्तागों, मुंह या गले पर कहीं भी हो सकता है|

फंगल इन्फेक्शन के लक्षण(Symptoms of fungal infection)

फंगल इन्फेक्शन चार तरह के होते हैं, जिनके बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं। इन चार प्रकार के फंगल इन्फेक्शन के लक्षण भी अलग होते हैं।

1. नेल फंगल इन्फेक्शन (Nail fungal infection) :-

फंगल संक्रमण नाखूनों में देखने को मिलता है, जिसे ओनिकोमाइकोसिस (onychomycosis) के नाम से भी जाना जाता है। यह अक्सर, हाथ के नाखूनों की जगह पैर के नाखूनों में होता है। साथ ही, यह दो उंगलियों के बीच में भी हो सकता है, जिसे एथलीट फुट भी कहा जाता है |इनकी पहचान करना आसान है। जिनकी मदद से आप जान सकते हैं कि आपको नेल फंगल इंफेक्शन है।

नाखून फंगल संक्रमण के लक्षण(Symptoms of nail fungal infection)

  • नाखून का रंग बदलना (पीला, भूरा या सफेद)
  • मोटे नाखून
  • टूटे या फटे हुए नाखून

2. फंगल स्किन इन्फेक्शन ( Fungal Skin Infection) :-

फंगल स्किन इन्फेक्शन, जिन्हें दाद भी कहा जाता है, अक्सर गोलाकार में होते हैं। यही वजह है कि इन्हें रिंगवर्म भी कहा जाता है। इस फंगल संक्रमण के होने पर त्वचा पर लाल और खुजलीदार चकत्ते पड़ जाते हैं। यह फंगल स्किन इन्फेक्शन आपके हाथों-पैरों, गुप्तांग या स्कैल्प में हो सकता है।

फंगल स्किन इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of fungal skin infection):-

  • त्वचा में खुजली
  • लाल और गोल चकत्ते
  • लाल, पपड़ीदार और फटी त्वचा
  • बाल झड़ना

3. यीस्ट फंगल इन्फेक्शन (Yeast fungal infection) :-

यह एक प्रकार के फंगस की वजह से होता है, जिसे कैंडिडा कहा जाता है। कैंडिडा हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों जैसे मुंह, गला, आंत और योनि में बिना कोई नुकसान किए रहता है। कभी-कभी योनि के अंदर कैंडिडा की संख्या बढ़ने लगती है और यह संक्रमण का कारण बन सकता है इस अवस्था में पीड़ित महिला को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यीस्ट फंगल इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of yeast fungal infection)

  • गुप्तांग में खुजली या दर्द
  • संभोग के दौरान दर्द
  • पेशाब करते समय दर्द या तकलीफ
  • गुप्तांग से असामान्य स्राव

4. मुंह, गले या अन्न प्रणाली में कैंडिडा संक्रमण (Candida infection in the mouth, throat or food system) :-

यह संक्रमण भी कैंडिडा फंगस की वजह से होता है। जब मुंह, गले या अन्नप्रणाली में कैंडिडा की संख्या बढ़ जाती है, तो यह संक्रमण में बदल सकता है। मुंह और गले के कैंडिडा संक्रमण को थ्रश या ऑरोफरीन्जियल कैंडिडिआसिस (oropharyngeal candidiasis) भी कहा जाता है। एड्स या एचआईवी से संक्रमित लोगों में यह समस्या आम देखी जाती है (8)। इसमें मरीज को कष्टदायक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

कैंडिडा संक्रमण के लक्षण(Symptoms of Candida infection)

  • मुंह में लालपन या खटास
  • मुंह में सूजन (रुई जैसा अहसास)
  • किसी भी चीज के स्वाद का पता न चलाना
  • भोजन करते समय या उसे निगलते समय दर्द होना
  • मुंह के कोनों पर रेश और लालपन
  • आंतरिक गाल, जीभ, मुंह की छत और गले पर सफेद चक्क्त्ते

लिरिल नींबू और टी ट्री ऑयल बॉडी वॉश (Liril Lemon and Tea Tree Oil Body Wash)

शीत ने शुद्ध और प्राकृतिक तेलों को दबाया |शक्तिशाली विरोधी कवक है।

बाल प्रकार :- बाल विकास को बढ़ावा देता है।

उपयोग :- इसे सीधे चेहरे पर लगाएं या आप इसे नाभि में भी लगा सकते हैं। नीम के तेल में उच्च फैटी-एसिड सामग्री को मुँहासे से निशान को रोकने और इलाज करने के लिए कहा जाता है और यह गैर-कॉमेडोजेनिक है। इसे सीधे बालों या त्वचा पर लगाया जा सकता है।

फंगल इंफेक्शन बचाव के 5 तरीके(5 ways to prevent fungal infection)

गर्मि‍यों के मौसम में फंगल इंफेक्शन अधिक होने की आशंका बनी रहती है, वैसे तो ये इंफेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन अधिकतर उन हिस्सों में होता है जहां बहुत पसीना आता है त्वचा की ऊपरी सतह पर पपड़ि‍यां जमना, पैरों में खुजली होना, पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और उनके चारों ओर खुजली होना, पसीने वाले हिस्सों में ज्यादा खुजली होना, यह सभी फंगल इंफेक्शन के लक्षण हैं जो एक संक्रामक रोग है।

  • अपने पैरों को दिन में दो बार अच्छी तरह धोएं।
  • पहनने के पहले पैरों की अंगुलियों के बीच का पानी पोंछ लें।
  • हमेशा साफ मोजे पहनें और पैरों में पसीना आने से रोकने के लिए कोई अच्छा मेडिकेटेड पावडर इस्तेमाल करें।
  • प्रतिदिन नहाएं, लेकिन गर्मियों में अधिक पसीना आने पर दिन में 2 बार भी नहाने में कोई हर्ज नहीं है। नहाते हुए उन हिस्सों की ज्यादा सफाई करें, जहां पसीना ज्यादा आता है।
  • पसीने आने पर उसे जल्द सुखाने की कोशिश करें और इस मौसम में कपड़े भी ऐसे पहनें जो पसीने को जल्दी सोखने वाले हो|

फंगल इंफेक्शन बचाव के घरेलू उपाय (Home remedies for fungal infection prevention)

1. लहसुन (Garlic)

सामग्री :- दो से तीन लहसुन की कलियां , दो से तीन चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल

विधि :-

  • लहसुन की कलियों को कद्दूकस कर लें।
  • कद्दूकस किए हुए लसहुन को नारियल तेल में मिला लें।
  • फिर इस तेल को चार से पांच मिनट के लिए गैस पर रख कर गर्म करें।
  • इसके बाद गैस से उतार कर ठंडा कर लें और तेल को छान लें।
  • अब संक्रमित क्षेत्र पर तेल अच्छी तरह लगाकर छोड़ दें।
  • जल्द राहत पाने के लिए इस प्रक्रिया को रोज दोहराएं।

2. टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil)

सामग्री :- टी-ट्री ऑयल की दो से तीन बूंदें , एक बड़ा चम्मच नारियल तेल

विधि :-

  • सबसे पहले किसी साफ सूती कपड़े या रुई से प्रभावित त्वचा को सूखा लें।
  • फिर एक बड़े चम्मच नारियल तेल में टी ट्री ऑयल की दो से तीन बूंदें मिला लें।
  • अब इस मिश्रण को संक्रमित त्वचा पर लगाकर छोड़ दें।
  • इस उपाय को रोजाना एक से दो बार दोहराया जा सकता है।

3. नारियल का तेल (coconut oil)

सामग्री :- एक से दो चम्मच आर्गेनिक नारियल तेल , कॉटल बॉल
विधि :-

  • सबसे पहले प्रभावित त्वचा को कॉटल बॉल की मदद से सूखा लें।
  • अब एक दूसरी कॉटल बॉल की मदद से तेल को फंगल से संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • जल्द परिणाम पाने के लिए तेल को रोजाना दो से तीन बार लगाएं।

4. दही (curd)

सामग्री :- दही के दो बड़ा चम्मच , एक बड़ा चम्मच शहद

विधि:

  • एक बाउल में दही और शहद मिला लें।
  • अब इस लेप को संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।
  • इसके अलावा, रोजाना एक बाउल दही का सेवन करें।

5.सेब का सिरका (Apple vinegar)

सामग्री :- एक चम्मच सेब का सिरका , आधा कप पानी , रुई
विधि :-

  • आधे कप पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिला लें।
  • रुई की मदद से इस घोल को संक्रमित जगह पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।

6. एलोवेरा (Aloe vera)

सामग्री :- ताजा एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार)
विधि :-

  • ताजे एलोवेरा जेल को संक्रमित क्षेत्र पर लगाएं।
  • 20 से 30 मिनट रखने के बाद इसे साफ पानी से धोकर त्वचा को सूखा लें।

7. अदरक (Ginger)

सामग्री :- अदरक के दो-तीन टुकड़े , एक कप पानी , रुई
विधि :-

  • एक कप पानी में अदरक को कूटकर डालें और थोड़ी देर अच्छी तरह उबाल लें।
  • अब अदरक के इस पानी को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें।
  • अब रुई की मदद से अदरक के इस पानी को संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • पूरी तरह से आराम न आने तक इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराएं।
  • आप चाहें तो अदरक वाली चाय भी पी सकते हैं।

8.जैतून का तेल ( Olive oil)

सामग्री :- जैतून तेल की कुछ बूंदें , रुई
विधि :-

  • रुई की मदद से जैतून तेल को प्रभावित त्वचा पर अच्छी तरह लगाएं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि आपको तेल आराम से लगाना है।
  • जब तक पूरी तरह आराम न हो जाए, दिन में दो बार इस उपाय को करें।
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