भुजंगासन योग (Bhujangasana Yoga)

आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन (संस्कृत: भुजंगसन) कहा जाता है।

भुजंगासन योग क्या है? (What is Bhujangasana Yoga)?

“भुजंग” शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भुजंग का अर्थ सर्प होता है, इसलिए भुजंग-आसन को “सर्प आसन” भी कहा जाता है। … सम्पूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्यनमस्कार (Suryanamaskar) में भुजंगासन सातवे क्रम पर आता है।

भुजंगासन योग की विधि (Method of bhujangasana yoga)

  • सबसे पहले पेट नीचे की तरफ कर के लेट जाएँ।
  • उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने शरीर के उपरी भाग को जैसे सर, गर्दन, कन्धों और छाती को ऊपर की तरफ ले जाएँ जैसे चित्र में दिया गया है।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड तक रुकें।
  • उसके बाद दोबारा 4-5 बार इस आसन को दोहोराएँ।

भुजंगासन योग के फायदे (Benefits of bhujangasana yoga)

  • पेट में एसिडिटी और गैस की प्रॉब्लम दूर करता है।
  • मोटापा कम होता है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • अपच और कब्ज की शिकायत दूर करता है।
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