सुखासन योग (Sukhasana Yoga)

सुखासन (Sukhasana) योग विज्ञान के सबसे सरल आसनों में से एक है। सुखासन को हठ योग के सबसे साधारण और सरल आसनों में से एक माना जाता है।

सुखासन योग क्या है? (What is Sukhasana Yoga?)  :-

ध्यान के लिए सुखासन महत्वपूर्ण आसन है। पद्मासन के लिए यह आसन विकल्पहैं।सुखासन को किसी भी उम्र और लेवल के योगी कर सकते हैं। बैठकर किया जाने वाले सुखासन सरल होने के साथ ही उपयोगी भी है। इस आसन के अभ्यास से घुटनों और टखने में खिंचाव आता है। इसके अलावा ये पीठ को भी मजबूत करने में मदद करता है। सुखासन कई रोगों को दूर करने में भी मदद करता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी इसके नियमित अभ्यास से ठीक होती देखी गईं हैं। इसके नियमित अभ्यास से चक्र और कुंडलिनी जागरण में भी मदद मिलती है।

सुखासन योग की विधि (Method of sukhasana yoga)

  • सबसे पहले फर्श पर एक दरी बिछाएं और दोनों पैरों को मोड़ कर बैठ जाएँ।
  • पैर कुछ इस तरीके से मोड़ कर बैठे कि एक पैर का नीचला हिस्सा बाहर की और दिखे और दूसरा अगले पैर के जांघों के नीचे।
  • उसके बाद सीधे बैठें और अपने रीड की हड्डी को सीधा रखें।
  • अपने दोनों हांथों के हथेलियों को ऊपर करके अपने घुटनों पर रखें और ज्ञान मुद्रा धारण करें।
  • धीरे-धीरे लम्बी साँस लें और धीरे-धीरे फिर साँस छोड़ें।

सुखासन योग के फायदे (Benefits of sukhasana yoga)

  • रीड की हड्डी में खिचाव होता है जो रीड की हड्डी को लम्बा होने में मदद करता है।
  • छाती का चौड़ाई बढ़ता है।
  • मन को शांति मिलती है।
  • चिंता, तनाव और मानसिक थकान से जुड़े रोग दूर होता हैं।
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