अर्धमत्स्येन्द्रासन योग (Ardhamatsyandrasana Yoga)

अर्धमत्स्येंद्रासन का नाम महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। अर्धमत्स्येंद्रासन योग के बहुत सारे महत्वपूर्ण लाभ है डायबिटीज को रोकना। इसलिए इसको डायबिटीज के रोकथाम के लिए रामबाण कहा गया है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग क्या है? (What is Ardhamatsyandrasana Yoga?)

बाहों, कंधों, ऊपरी पीठ और गर्दन में तनाव को कम करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन स्लिप-डिस्क के लिए चिकित्सीय है| बायें बाजू को दायें घुटने के बाहर की ओर ले आयें और दायां टखना पकड़ लें। धड़ को यथा संभव दायीं ओर मोड़ें। दायां बाजू पीठ के ऊपर रखें और दायें कंधे के ऊपर से देखें। सामान्य श्वास के साथ कुछ मिनट तक इसी स्थिति में रहें और पूरे शरीर को आराम दें। (लेकिन यह आसन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर करें)

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग की विधि  ( Ardhamatsyandrasana Yoga method )

  • सबसे पहले नीचे सीधे बैठ जाएँ।
  • उसके बाद अपने बाएँ पैर को मोड़ें और अपने पीछे दाएं तरफ को छूने की कोशिश करें। समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद अपने दाएँ पैर को अपने बाएँ पैर के अगले तरफ ले जाकर रखें। दायाँ पैर अगली तरफ जमीन को छूना चाहिए।
  • उसके बाद अपने शरीर को पैर मोडे हुए तरफ के विपरीत दिशा में तानें या खींचे और अगली तरफ पैर को पीछे से छूने की कोशिश करें।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें।
  • उसके बाद अगली दिशा में भी इस योगासन को दोहराएँ।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग के फायदे (Benefits of ardhamatsyandrasana yoga)

  • मांशपेशियों को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रीड की हड्डी में मजबूती आती है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • कब्ज़ और अपचन से शरीर को बचाता है।
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त्रिकोणासन योग (Trigonasana yoga)

त्रिकोणासन खड़े होकर करने वाला एक महत्वपूर्ण आसन है। ‘त्रिकोण’ का अर्थ होता है त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है।

त्रिकोणासन योग क्या है? (What is Trigonasana yoga)?

त्रिकोणासन योग कमर दर्द को कम करने के लिए एक अतिउत्तम योगाभ्यास है।  शरीर की मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाने के लिए त्रिकोणासन बहुत फायदेमंद है। त्रिकोणासन योग मुद्रा में, पैरों को अलग-अलग फैलाया जाता है और एक पैर को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ते हैं।  त्रिकोणासन योग करते समय शरीर का आकार त्रिकोण (ट्रीअंगेल) के समान होने के कारण इसे त्रिकोणासन या ट्रीअंगेल पोज कहा जाता हैं। त्रिकोणासन का नियमित अभ्यास करने से आपके पेट, कमर, जांघ और नितंब पर जमी अतिरिक्त चर्बी को आसानी से घटाया जा सकता हैं।

त्रिकोणासन योग की विधि (Method of trigonasana yoga)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों और अपने दोनों पैरों के बिच थोडा गैप रखें।
  • उसके बाद अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें।
  • उसके बाद थोडा सा शरीर को भी दाएँ तरफ झुकाते हुए अपने दाएँ हाँथ से अपने दाएँ पैर के उँगलियों को छुएं और बाएं हांथ को ऊपर की और सिधाई में रखें जैसा फोटो में दिया गया है।
  • इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक रुकें।

त्रिकोणासन योग के फायदे (Benefits of Trigonasana yoga)

  • यह आसन करने से गर्दन, पीठ, कमर और पैर के स्नायु मजबूत होते हैं।
  • शरीर का संतुलन ठीक होता हैं।
  • पाचन प्रणाली ठीक होती हैं।
  • एसिडिटी से छुटकारा मिलता हैं।
  • चिंता, तनाव, कमर और पीठ का दर्द गायब हो जाता हैं।
  • पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी और मोटापा दूर करने में सहायक आसन माना जाता हैं।
  • पुरे शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रक्त परिसंचरण / सर्कुलेशन में सुधार होता है।
  • गुर्दा / किडनी स्वस्थ रहता है।
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सेतुबंधासन योग (Sethubandhasana Yoga)

इस आसन में शरीर सेतु (Bridge) के समान आकार में हो जाता है, इसलिए इसे सेतुबंधासन (Bridge Pose) कहा जाता है|

सेतुबंधासन योग क्या है? (What is Sethubandhasana Yoga?)

पाचन में सुधार लाता है| सेतुबंधासन पेट के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित करता है। टाँगों को फिर से जीवंत बनाता है। थायरॉएड की समस्या है, तो सेतुबंधासन प्रतिदिन 1 से 2 मिनट करें। यह मुश्किल आसन है, इसे करते वक्त सावधानी बरतें।

सेतुबंधासन योग की विधि ( Method of Sethubandhasana yoga)

  • इस योग मुद्रा में आपको अपने शरीर को एक पुल के जैसे बनाना पड़ता है।
  • सबसे पहले जमीन पर सीधे लेट जाएँ और अपने बाहं को दोनों तरफ रखें।
  • जिस प्रकार चित्र में दिया गया है देखकर अपने शरीर के नीचले हिस्से को उठायें।
  • उस मुद्रा में एक लम्बी सी साँस लें और लगभग 25-30 सेकंड तक रुकें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे अपने शरीर को नीचे ला कर प्रथम मुद्रा पर लायें।
  • इस योगासन को 4-5 बार दोहराएँ।

सेतुबंधासन योग के फायदे (Benefits of Sethubandhasan Yoga)

  • छाती को मजबूती देता है।
  • साथ ही पीछे और रीड की हड्डी भी तंदरुस्त होता है।
  • मन की चिंता दूर होती है।
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वृक्षासन योग (Vrksasana Yoga)

वृक्षासन को ट्री पोज (Tree Pose) भी कहा जाता है। वृक्षासन ऐसा योगासन है जो आपके शरीर में स्थिरता, संतुलन और सहनशक्ति लाने में मदद करता है।

वृक्षासन योग क्या है? (What is Vrksasana Yoga)?

वृक्षासन दो शब्द मिलकर बना है ‘वृक्ष’ का अर्थ पेड़ होता है और आसन योग मुद्रा की और दर्शाता है। इस आसन की अंतिम मुद्रा एकदम अटल होती है, जो वृक्ष की आकृति की लगती है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। वृक्षासन आसन से वृक्ष की शांत एवं स्थिर अवस्था को दर्शाता है|योग शरीर व मन का विकास करता है|योग के शारीरिक और मानसिक लाभ हैं परंतु इसका उपयोग किसी दवा आदि की जगह नही किया जा सकता|

वृक्षासन योग की विधि (Method of Vriksasana Yoga)

  • सबसे पहले अपने दोनों हांथों को बगल में रख कर सीधे खड़े हों।
  • उसके बाद ध्यान से अपने दाएने पैर को अपने बाएँ पैर के जांघ पर रखकर सीधे खड़े रहें। समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे डॉन हांथों को जोड़ कर ऊपर की ओर ले जाएँ और प्रार्थना मुद्रा धारण करें।
  • कम से कम 30-45 सेकंड तक इस मुद्रा में बैलेंस करने की कोशिश करें।

वृक्षासन योग के फायदे (Benefits of Vriksasana Yoga)

  • मानसिक एकागरता के लिए बहुत उपयोगी है।
  • शरीर मे लचक बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है।
  • पांवों की मांस-पेशियों को मजबूत करता है।
  • रीढ़ व पेट को स्वस्थ रखता है।

वृक्षासन के उद्देश्य (Objectives of tree plantation)

  •  एड़ियों के दर्द से परेशान व्यक्ति को इस योगाभ्यास का प्रैक्टिस करनी चाहिए।
  •  यह एड़ियों के दर्द को कम ही नहीं करता बल्कि एड़ियों की लचीलापन को भी बढ़ाता है।
  •  पैरों के मांसपेशियों को मजबूत बनाने में यह अहम भूमिका निभाता है और साथ ही साथ   पैरों को शक्तिशाली भी बनाता है।
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वीरभद्रासन योग (Veerabhadrasana Yoga)

वीरभद्रासन सबसे सुदृढ़ योग मुद्राओं में से एक है, यह योग के अभ्यास में सुदृढ़ता और सम्पूर्णता प्रदान करता है।

वीरभद्रासन योग क्या है? (What is Veerabhadrasana Yoga)

वीरभद्रासन जिसको वॉरईयर पोज़ (Warrior Pose) के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन का नाम भगवान शिव के अवतार, वीरभद्र, एक अभय योद्धा के नाम पर रखा गया। योद्धा वीरभद्र की कहानी, उपनिषद की अन्य कहानियों की तरह, जीवन में प्रेरणा प्रदान करती है। यह आसन हाथों, कंधो ,जांघो एवं कमर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।

वीरभद्रासन योग की विधि (Method of Veerabhadrasana yoga)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों।
  • दोनों पैरों के बिच 3-4 फीट की दूरी रखें।
  • लम्बी साँस लें और दोनों हांथों को जमीन के समान्तर में ऊपर उठायें और अपने सर को दाएँ तरफ मोड़ें।
  • उसके बाद साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें और हल्का सा दाएँ तरफ मोड़ें।
  • पैर को मोड़ने के तरीके को समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद इस पोजीशन में कुछ समय के लिए रुकें।
  • ऐसे 5-6 बार करें।

वीरभद्रासन योग की फायदे ( Benefits of Veerabhadrasana Yoga)

  • हाथ, पैर और कमर को मजबूती प्रदान करता है।
  • शरीर में संतुलन बढाता है, सहनशीलता बढती है।
  • बैठ कर कार्य करने वालों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
  • कंधो के जकड़न में अत्यंत प्रभावशाली है।
  • कंधो के तनाव में तुरंत मुक्त करता है। साहस, कृपा एवं शांति की वृद्धि करता है

वीरभद्रासन की सावधानियाँ | (Precautions of Virabhadrasana)

  • अगर आप रीढ की हड्डी के विकारों से पीड़ित है य किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं तो चिकित्सक से परामर्श ले कर ही ये आसन करें।
  • उच्च रक्तचाप वाले मरीज़ यह आसन न करें।
  • वीरभद्रासन गर्भवती महिलाओ के लिए दुसरे और तीसरे तिमाही में अत्यन्त लाभदायक है।
  • आप इस आसन को करते समय दीवार का सहारा लें। इस आसन को करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
  • अगर आप को घुटनों में दर्द है य गठिया की बीमारी है तो घुटनों के पास सहारे का उपयोग करें।
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शवासन योग (Shavasan yoga)

अपनी सजगता (ध्यान) को साँस की ओर लगाएँ और उसे अधिक से अधिक लयबद्ध करने का प्रयास करें। गहरी साँसें भरें और साँस छोड़ें |

शवासन योग क्या है? ( What is Shavasan yoga)?

शव एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है- मृत शरीर। इस आसन को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि इसमें एक मृत शरीर के समान आकार लिया जाता है। शवासन विश्राम करने के लिए है और अधिकांश पूरे योगासन क्रम के पश्चात किया जाता है।

शवासन योग की विधि (Method of shavasan yoga)

  • यह बहुत ही आसान योग मुद्रा है परन्तु इससे शरीर को बहुत महत्वपूर्ण लाभ होते हैं।
  • सबसे पहले एक समतल जगह पर एक दरी बीचा लें।
  • उसके बाद ऊपर की और मुहँ करके लेट जाएँ।
  • अपने दोनों पैरों को एक दूरे से अलग रखें।
  • उसके बाद कुछ मिनटों के लिए धीरे-धीरे साँस लें और छोड़ें।

शवासन योग के फायदे (Benefits of shavasan yoga)

  • इससे शरीर को आराम मिलता है।
  • ध्यान / एकाग्रता में सुधार लता है।
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सुखासन योग (Sukhasana Yoga)

सुखासन (Sukhasana) योग विज्ञान के सबसे सरल आसनों में से एक है। सुखासन को हठ योग के सबसे साधारण और सरल आसनों में से एक माना जाता है।

सुखासन योग क्या है? (What is Sukhasana Yoga?)  :-

ध्यान के लिए सुखासन महत्वपूर्ण आसन है। पद्मासन के लिए यह आसन विकल्पहैं।सुखासन को किसी भी उम्र और लेवल के योगी कर सकते हैं। बैठकर किया जाने वाले सुखासन सरल होने के साथ ही उपयोगी भी है। इस आसन के अभ्यास से घुटनों और टखने में खिंचाव आता है। इसके अलावा ये पीठ को भी मजबूत करने में मदद करता है। सुखासन कई रोगों को दूर करने में भी मदद करता है। कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी इसके नियमित अभ्यास से ठीक होती देखी गईं हैं। इसके नियमित अभ्यास से चक्र और कुंडलिनी जागरण में भी मदद मिलती है।

सुखासन योग की विधि (Method of sukhasana yoga)

  • सबसे पहले फर्श पर एक दरी बिछाएं और दोनों पैरों को मोड़ कर बैठ जाएँ।
  • पैर कुछ इस तरीके से मोड़ कर बैठे कि एक पैर का नीचला हिस्सा बाहर की और दिखे और दूसरा अगले पैर के जांघों के नीचे।
  • उसके बाद सीधे बैठें और अपने रीड की हड्डी को सीधा रखें।
  • अपने दोनों हांथों के हथेलियों को ऊपर करके अपने घुटनों पर रखें और ज्ञान मुद्रा धारण करें।
  • धीरे-धीरे लम्बी साँस लें और धीरे-धीरे फिर साँस छोड़ें।

सुखासन योग के फायदे (Benefits of sukhasana yoga)

  • रीड की हड्डी में खिचाव होता है जो रीड की हड्डी को लम्बा होने में मदद करता है।
  • छाती का चौड़ाई बढ़ता है।
  • मन को शांति मिलती है।
  • चिंता, तनाव और मानसिक थकान से जुड़े रोग दूर होता हैं।
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ताड़ासन योग ( Tadasana Yoga )

ताड़ासन शरीर की लम्बाई बढ़ाने और मांसपेशियों को लचीला बनाने के लिए इस आसन का प्रयोग किया जाता है |

ताड़ासन योग क्या है? (What is Tadasana Yoga):-

ताड़ासन शरीर के लिए नींव का काम करता है. संस्कृत में, ‘ताड़ा’ का अर्थ ‘पर्वत’ और ‘आसन’ का अर्थ ‘मुद्रा’ है. इसलिए इसे ‘माउंटेन पोज़’ भी कहा जाता हैं. यह कमजोर पीठ की मांसपेशियों और गोल पीठ वाले लोगों के लिए एक आदर्श मुद्रा है क्योंकि यह शरीर के प्राकृतिक संरेखण को बहाल करने में मदद कर सकता है. बच्चों को अक्सर इस आसन का अभ्यास करने का सुझाव दिया जाता है और यह ऊंचाई बढ़ाने में मदद कर सकता है. यह आसन अन्य आसन को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है. आइए इस आसन के अभ्यास के लाभों पर नजर डाले.

ताड़ासन योग की विधि (Method of Tadasana Yoga)

  • सबसे पहले अपने पैरों के मदद से सीधे खड़े हों।
  • अपने दोनों पैरों के बीच थोडा सा जगह बनायें।
  • उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने पैरों की उँगलियों की मदद से शरीर को थोडा ऊपर उठायें और अपने दोनों हांथों को धीरे-धीरे उपर उठायें। उसके बाद अपने एक हाँथ की उँगलियों से दूसरी हाँथ के उँगलियों को जोड़ें।
  • कम से कम 15-30 सेकंड इस मुद्रा में रहें और अपने शरीर को ऊपर की और खींचें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे अपने हांथों को सामान्य स्तिथि में ले आयें।

 ताड़ासन योग के फायदे (Benefits of Tadasana Yoga)

  • यह आसन उन लोगों के ज्यादा फायदेमंद साबित होता है जो अपना लम्बाई बढ़ाना चाहते हैं।
  • मुद्रा में सुधार होता है।
  • रीढ़ की समस्याओं से दूर रखता है।
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अधोमुखश्वानासन योग (Adhomukhvashanasana Yoga )

अधोमुखश्वानासन मुद्रा मध्यवर्ती स्तर की योग मुद्रा है। जिसमें शरीर को ऊपर की ओर उलटे अँग्रेजी शब्द “V” आकार की स्थिति में ले जाया जाता है।  

अधोमुखश्वानासन योग क्या है?

अधोमुखश्वानासन का मतलब है सिर नीचे किए हुए श्वान यानि डॉग की पोजिशन बनाना। यह आसन पूरी बॉडी की स्ट्रेचिंग के साथ ही बैक बोन, पैरों और हाथों की मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाने में हेल्पफुल होता है।

अधोमुखश्वानासन मुद्रा मध्यवर्ती स्तर की योग मुद्रा है। जिसमें शरीर को ऊपर की ओर उलटे अँग्रेजी शब्द “V” आकार की स्थिति में ले जाया जाता है।यह संस्कृत के शब्द “अध” से लिया गया जिसका अर्थ है “नीचे”, “मुख” का अर्थ है “चेहरा” और श्वान का अर्थ है “कुत्ता”, और आसन का अर्थ है “मुद्रा”। यह आसन एक कुत्ते के समान दिखता है जब वह आगे की और झुकता है। इस आसन के कई अद्भुत लाभ हैं जो आपको हर दिन इसका अभ्यास करने के लिए बेहद आवश्यक बनाते हैं। यह पूरे शरीर को गर्म करता है, जिसे शरीर में ऊर्जा पैदा होती है। अधोमुखश्वानासन मुद्रा रक्त को सिर और मस्तिष्क की ओर प्रवाहित करने में मदद करता है ।

अधोमुखश्वानासन योग की विधि(method of Adhomukhvashanasana Yoga)

  1.  सबसे पहले सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बिच छोड़ा दूरी रखें।

      2.  उसके बाद धीरे से नीचे की ओर मुड़ें जिससे की V जैसे Shape बनेगा।

      3.  जैसे की ऊपर दिए हुए फोटो में आप देख रहे हैं दोनों हाथों और पैरों के बीच में थोडा सा                    दूसरी बनायें।

      4. साँस लेते समय अपने पैरों की उँगलियों की मदद से अपने कमर को पीछे की ओर खींचें।                अपने पैरों और हांथों को ना मोड़ें।

      5. ऐसा करने से आपके शरीर के पीछे, हांथों और पैरों को अच्छा खिंचाव मिलेगे।

      6. एक लम्बी से साँस लें और कुछ देरी के लिए इस योग पोज़ में रुकें।

अधोमुखश्वानासन योग के फायदे (Benefits of Adhomukhvashanasana Yoga)

  1. मांसपेशियों में मजबूती आती है।
  2. साइनस की समस्या दूर होती है।
  3. शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
  4. रक्त परिसंचरण में सुधार आता है।

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योग(Yoga)

योग भारत  में प्रचलित एक आध्यात्मिक प्रकिया को कहते हैं जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है।

योग क्या है?( what is yoga)?

संस्कृत धातु ‘युज’ से निकला है, जिसका मतलब है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन। योग, भारतीय ज्ञान की पांच हजार वर्ष पुरानी शैली है। हालांकि कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं, जहाँ लोग शरीर को मोडते, मरोड़ते, खींचते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। यह वास्तव में केवल मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता का खुलासा करने वाले इस गहन विज्ञान के सबसे सतही पहलू हैं, योग का अर्थ इन सब से कहीं विशाल है । योग विज्ञान में जीवन शैली का पूर्ण सार आत्मसात किया गया है।

  •  गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर कहते हैं, “योग सिर्फ व्यायाम और आसन नहीं है। यह भावनात्मक एकीकरण और रहस्यवादी तत्व का स्पर्श लिए हुए एक आध्यात्मिक ऊंचाई है, जो आपको सभी कल्पनाओं से परे की कुछ एक झलक देता है।
  • योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। योग का अर्थ एकता या बांधना है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द युज, जिसका मतलब है जुड़ना।
  •  योग का अर्थ है जोड़ना. जीवात्मा का परमात्मा से मिल जाना, पूरी तरह से एक हो जाना ही योग है। योगाचार्य महर्षि पतंजली ने सम्पूर्ण योग के रहस्य को 5.
  • अपने योगदर्शन में सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया है.उनके अनुसार, “चित्त को एक जगह स्थापित करना योग है।

शुरुवात के लिए 12 आसान योगासन(12 Easy yoga poses for beginners)

1. अधोमुखश्वानासन योग (Adhomukhvashanasana Yoga):-

अधोमुखश्वानासन मुद्रा मध्यवर्ती स्तर की योग मुद्रा है। जिसमें शरीर को ऊपर की ओर उलटे अँग्रेजी शब्द “V” आकार की स्थिति में ले जाया जाता है।यह संस्कृत के शब्द “अध” से लिया गया जिसका अर्थ है “नीचे”, “मुख” का अर्थ है “चेहरा” और श्वान का अर्थ है “कुत्ता”, और आसन का अर्थ है “मुद्रा”। यह आसन एक कुत्ते के समान दिखता है जब वह आगे की और झुकता है। इस आसन के कई अद्भुत लाभ हैं जो आपको हर दिन इसका अभ्यास करने के लिए बेहद आवश्यक बनाते हैं। यह पूरे शरीर को गर्म करता है, जिसे शरीर में ऊर्जा पैदा होती है। अधोमुखश्वानासन मुद्रा रक्त को सिर और मस्तिष्क की ओर प्रवाहित करने में मदद करता है ।

अधोमुखश्वानासन योग की विधि(Adhomukhvashanasana Yoga method)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बिच छोड़ा दूरी रखें।
  • उसके बाद धीरे से नीचे की ओर मुड़ें जिससे की V जैसे Shape बनेगा।
  • जैसे की ऊपर दिए हुए फोटो में आप देख रहे हैं दोनों हाथों और पैरों के बीच में थोडा सा दूसरी बनायें।
  • साँस लेते समय अपने पैरों की उँगलियों की मदद से अपने कमर को पीछे की ओर खींचें। अपने पैरों और हांथों को ना मोड़ें।
  • ऐसा करने से आपके शरीर के पीछे, हांथों और पैरों को अच्छा खिंचाव मिलेगे।
  • एक लम्बी से साँस लें और कुछ देरी के लिए इस योग पोज़ में रुकें।

अधोमुखश्वानासन योग के फायदे (Benefits of Adhomukhvashanasana Yoga)

  • मांसपेशियों में मजबूती आती है।
  • साइनस की समस्या दूर होती है।
  • शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रक्त परिसंचरण में सुधार आता है।

2. ताड़ासन योग (Tadasana Yoga)  :-

ताड़ासन शरीर के लिए नींव का काम करता है. संस्कृत में, ‘ताड़ा’ का अर्थ ‘पर्वत’ और ‘आसन’ का अर्थ ‘मुद्रा’ है. इसलिए इसे ‘माउंटेन पोज़’ भी कहा जाता हैं. यह कमजोर पीठ की मांसपेशियों और गोल पीठ वाले लोगों के लिए एक आदर्श मुद्रा है क्योंकि यह शरीर के प्राकृतिक संरेखण को बहाल करने में मदद कर सकता है. बच्चों को अक्सर इस आसन का अभ्यास करने का सुझाव दिया जाता है और यह ऊंचाई बढ़ाने में मदद कर सकता है. यह आसन अन्य आसन को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है. आइए इस आसन के अभ्यास के लाभों पर नजर डाले.

ताड़ासन योग की विधि (Method of Tadasana Yoga)

  • सबसे पहले अपने पैरों के मदद से सीधे खड़े हों।
  • अपने दोनों पैरों के बीच थोडा सा जगह बनायें।
  • उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने पैरों की उँगलियों की मदद से शरीर को थोडा ऊपर उठायें और अपने दोनों हांथों को धीरे-धीरे उपर उठायें। उसके बाद अपने एक हाँथ की उँगलियों से दूसरी हाँथ के उँगलियों को जोड़ें।
  • 4कम से कम 15-30 सेकंड इस मुद्रा में रहें और अपने शरीर को ऊपर की और खींचें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे अपने हांथों को सामान्य स्तिथि में ले आयें।

ताड़ासन योग के फायदे (Benefits of Tadasana Yoga)

यह आसन उन लोगों के ज्यादा फायदेमंद साबित होता है जो अपना लम्बाई बढ़ाना चाहते हैं।
मुद्रा में सुधार होता है।
रीढ़ की समस्याओं से दूर रखता है।

3. सुखासन योग (Sukhasana Yoga):-

ध्यान के लिए सुखासन महत्वपूर्ण आसन है। पद्मासन के लिए यह आसन विकल्पहैं।

सुखासन योग की विधि (Method of sukhasana yoga)

  • सबसे पहले फर्श पर एक दरी बिछाएं और दोनों पैरों को मोड़ कर बैठ जाएँ।
  • पैर कुछ इस तरीके से मोड़ कर बैठे कि एक पैर का नीचला हिस्सा बाहर की और दिखे और दूसरा अगले पैर के जांघों के नीचे।
  • उसके बाद सीधे बैठें और अपने रीड की हड्डी को सीधा रखें।
  • अपने दोनों हांथों के हथेलियों को ऊपर करके अपने घुटनों पर रखें और ज्ञान मुद्रा धारण करें।
  • धीरे-धीरे लम्बी साँस लें और धीरे-धीरे फिर साँस छोड़ें।

सुखासन योग के फायदे (Benefits of sukhasana yoga)

  • रीड की हड्डी में खिचाव होता है जो रीड की हड्डी को लम्बा होने में मदद करता है।
    छाती का चौड़ाई बढ़ता है।
  • मन को शांति मिलती है।
  • चिंता, तनाव और मानसिक थकान से जुड़े रोग दूर होता हैं।

4. शवासन योग (Shavasan yoga) :-

शव एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है- मृत शरीर। इस आसन को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि इसमें एक मृत शरीर के समान आकार लिया जाता है। शवासन विश्राम करने के लिए है और अधिकांश पूरे योगासन क्रम के पश्चात किया जाता है।

शवासन योग की विधि (Method of shavasan yoga)

  • यह बहुत ही आसान योग मुद्रा है परन्तु इससे शरीर को बहुत महत्वपूर्ण लाभ होते हैं।
  • सबसे पहले एक समतल जगह पर एक दरी बीचा लें।
  • उसके बाद ऊपर की और मुहँ करके लेट जाएँ।
  • अपने दोनों पैरों को एक दूरे से अलग रखें।
  • उसके बाद कुछ मिनटों के लिए धीरे-धीरे साँस लें और छोड़ें।

शवासन योग के फायदे (Benefits of shavasan yoga)

  • इससे शरीर को आराम मिलता है।
  • ध्यान / एकाग्रता में सुधार लता है।

5. वीरभद्रासन योग (Virabhadrasana Yoga):-

वीरभद्रासन जिसको वॉरईयर पोज़ (Warrior Pose) के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन का नाम भगवान शिव के अवतार, वीरभद्र, एक अभय योद्धा के नाम पर रखा गया। योद्धा वीरभद्र की कहानी, उपनिषद की अन्य कहानियों की तरह, जीवन में प्रेरणा प्रदान करती है। यह आसन हाथों, कंधो ,जांघो एवं कमर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।

वीरभद्रासन योग की विधि (Method of Veerabhadrasana yoga)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों।
  • दोनों पैरों के बिच 3-4 फीट की दूरी रखें।
  • लम्बी साँस लें और दोनों हांथों को जमीन के समान्तर में ऊपर उठायें और अपने सर को दाएँ तरफ मोड़ें।
  • उसके बाद साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें और हल्का सा दाएँ तरफ मोड़ें।
  • पैर को मोड़ने के तरीके को समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद इस पोजीशन में कुछ समय के लिए रुकें।
  • ऐसे 5-6 बार करें।

वीरभद्रासन योग की फायदे (Benefits of Veerabhadrasana Yoga)

  • इस योग मुद्रा से पैरों और भुजाओं को शक्ति मिलती है।
  • नीचले भाग के शरीर को भी स्वस्थ रखता है।

6. वृक्षासन योग (Vriksasana Yoga) :-

वृक्षासन आसन से वृक्ष की शांत एवं स्थिर अवस्था को दर्शाता हैI

वृक्षासन योग की विधि (Method of Vriksasana Yoga)

  • सबसे पहले अपने दोनों हांथों को बगल में रख कर सीधे खड़े हों।
  • उसके बाद ध्यान से अपने दाएने पैर को अपने बाएँ पैर के जांघ पर रखकर सीधे खड़े रहें। समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे डॉन हांथों को जोड़ कर ऊपर की ओर ले जाएँ और प्रार्थना मुद्रा धारण करें।
  • कम से कम 30-45 सेकंड तक इस मुद्रा में बैलेंस करने की कोशिश करें।

वृक्षासन योग के फायदे (Benefits of Vriksasana Yoga)

  • संतुलन में सुधार आना।
  • जांघों, पैर और रीड की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए।

7. सेतुबंधासन योग (Sethubandhasana Yoga) :-

पाचन में सुधार लाता है| सेतुबंधासन पेट के अंगों, फेफड़ों और थायराइड को उत्तेजित करता है। टाँगों को फिर से जीवंत बनाता है।

सेतुबंधासन योग की विधि (Method of Sethubandhasana yoga)

  • इस योग मुद्रा में आपको अपने शरीर को एक पुल के जैसे बनाना पड़ता है।
  • सबसे पहले जमीन पर सीधे लेट जाएँ और अपने बाहं को दोनों तरफ रखें।
  • जिस प्रकार चित्र में दिया गया है देखकर अपने शरीर के नीचले हिस्से को उठायें।
  • उस मुद्रा में एक लम्बी सी साँस लें और लगभग 25-30 सेकंड तक रुकें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे अपने शरीर को नीचे ला कर प्रथम मुद्रा पर लायें।
  • इस योगासन को 4-5 बार दोहराएँ।

सेतुबंधासन योग के फायदे (Benefits of Sethubandhasan Yoga)

  • छाती को मजबूती देता है।
  • साथ ही पीछे और रीड की हड्डी भी तंदरुस्त होता है।
  • मन की चिंता दूर होती है।

8. त्रिकोणासन योग (Trigonasana yoga) :-

त्रिकोणासन खड़े होकर करने वाला एक महत्वपूर्ण आसन है। ‘त्रिकोण’ का अर्थ होता है त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है। … त्रिकोणासन योग कमर दर्द को कम करने के लिए एक अतिउत्तम योगाभ्यास है।

 त्रिकोणासन योग की विधि (Method of trigonasana yoga)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों और अपने दोनों पैरों के बिच थोडा गैप रखें।
  • उसके बाद अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें।
  • उसके बाद थोडा सा शरीर को भी दाएँ तरफ झुकाते हुए अपने दाएँ हाँथ से अपने दाएँ पैर के उँगलियों को छुएं और बाएं हांथ को ऊपर की और सिधाई में रखें जैसा फोटो में दिया गया है।
  • इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक रुकें।

त्रिकोणासन योग के फायदे (Benefits of trigonasana yoga)

  • पुरे शरीर को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रक्त परिसंचरण / सर्कुलेशन में सुधार होता है।
  • गुर्दा / किडनी स्वस्थ रहता है।

9. अर्धमत्स्येन्द्रासन योग (Ardhamatsyandrasana yoga):-

बाहों, कंधों, ऊपरी पीठ और गर्दन में तनाव को कम करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन स्लिप-डिस्क के लिए चिकित्सीय है (लेकिन यह आसन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर करें)

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग की विधि (Ardhamatsyandrasana Yoga method)

  • सबसे पहले नीचे सीधे बैठ जाएँ।
  • उसके बाद अपने बाएँ पैर को मोड़ें और अपने पीछे दाएं तरफ को छूने की कोशिश करें। समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद अपने दाएँ पैर को अपने बाएँ पैर के अगले तरफ ले जाकर रखें। दायाँ पैर अगली तरफ जमीन को छूना चाहिए।
  • उसके बाद अपने शरीर को पैर मोडे हुए तरफ के विपरीत दिशा में तानें या खींचे और अगली तरफ पैर को पीछे से छूने की कोशिश करें।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें। उसके बाद अगली दिशा में भी इस योगासन को दोहराएँ।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग के फायदे (Benefits of ardhamatsyandrasana yoga)

  • मांशपेशियों को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रीड की हड्डी में मजबूती आती है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • कब्ज़ और अपचन से शरीर को बचाता है।

10. भुजंगासन योग (Bhujangasana Yoga):-

“भुजंग” शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भुजंग का अर्थ सर्प होता है, इसलिए भुजंग-आसन को “सर्प आसन” भी कहा जाता है। … सम्पूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्यनमस्कार (Suryanamaskar) में भुजंगासन सातवे क्रम पर आता है।

भुजंगासन योग की विधि (Method of bhujangasana yoga)

  • सबसे पहले पेट नीचे की तरफ कर के लेट जाएँ।
  • उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने शरीर के उपरी भाग को जैसे सर, गर्दन, कन्धों और छाती को ऊपर की तरफ ले जाएँ जैसे चित्र में दिया गया है।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड तक रुकें।
  • उसके बाद दोबारा 4-5 बार इस आसन को दोहोराएँ।

भुजंगासन योग के फायदे (Benefits of bhujangasana yoga)

  • पेट में एसिडिटी और गैस की प्रॉब्लम दूर करता है।
  • मोटापा कम होता है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • अपच और कब्ज की शिकायत दूर करता है।

11. बद्ध कोणासन योग (Bound konasana yoga):-

इसके अलावा इस आसन को ‘तितली आसन’ या Butterfly Pose भी कहा जाता है। इस मुद्रा में दोनों टांगें मुड़कर हिप्स के पास आ जाती हैं और दोनों टांगों से होने वाला मूवमेंट तितली के पंखों की मुद्रा बनाता है। बद्ध कोणासन को करना बहुत आसान है |

बद्ध कोणासन योग की विधि(Method of bound konasana yoga)

  • सबसे पहले नीचे जमीं पर एक दरी बिछाएं और सीधे बैठ जाएँ।
  • उसके बाद अपने दोनों पैरों के नीचे हिस्से हो सामने पास ला कर जोड़ें।
  • उसके बाद दोनों पैरों के जुड़े हुए स्थान के नीचे पकड़ने की कोशिश करें जैसे चित्र में है।
  • उसके बाद अपने पैरों को तितली की पंख के तरह हिलाएं।
  • आप तेज़ी से भी इस आसन को कर सकते हैं।

बद्ध कोणासन योग के फायदे(Benefits of Buddha Konasana Yoga)

  • पेट के अंगों को तंदरुस्त रखता है।
  • साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखता है।

12. बालासन योग (Balasana yoga):-

बालासन का नाम बाल शब्द पर रखा गया है, जिसका मतलब होता है बच्चा। बालासन एक आराम करने की मुद्रा है जिसे कभी भी किया जा सकता है, ख़ास तौर से शीर्षासन के बाद तो ज़रूर करना चाहिए।

बालासन योग की विधि (Method of balasana yoga)

  • सबसे पहले अपने पैरों को पीछे की और कर के मोड़ लें जैसे चित्र में किया गया है और अपने
  • दोनों हांथों को अपने जांघों में रख कर सीधे बैठें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए अपने छाती को घुटनों से जोड़ें।
  • उसके बाद अपने हांथों को आगे की तरफ सीधे भी आप रख सकते हैं और पीछे भी रख सकते हैं।
  • उसके बाद ध्यान से धीरे-धीरे साँस लें और और उस मुद्रा में 2-3 मिनट तक रुकें।
  • इस योग को 5-10 बार दोहोराये।

बालासन योग के फायदे (Benefits of balasan yoga)

  • मानसिक चिंतन दूर होता है।
  • कमर का दर्द दूर होता है।
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