कोरोना वायरस क्या हैं?(What are corona viruses)?

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। … लातीनी भाषा में “कोरोना” का अर्थ “मुकुट” होता है|

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं?(What can you do to prevent corona virus infection)?

  • कोरोना वायरस यानी ‘कोविड 19’ से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं|
  • जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं|
  • संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं|
  • अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं|
  • ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं|
  • चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फेस मास्क इससे प्रभावी सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं|

कोरोनो वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?(What are the symptoms of corono virus infection)?

  • इंसान के शरीर में पहुंचने के बाद कोरोना वायरस उसके फेफड़ों में संक्रमण करता है. इस कारण सबसे पहले बुख़ार, उसके बाद सूखी खांसी आती है. बाद में सांस लेने में समस्या हो सकती है|
  • वायरस के संक्रमण के लक्षण दिखना शुरू होने में औसतन पाँच दिन लगते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोगों में इसके लक्षण बहुत बाद में भी देखने को मिल सकते हैं|
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है. कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि ये समय 24 दिनों तक का भी हो सकता है|
  • कोरोना वायरस उन लोगों के शरीर से अधिक फैलता है जिनमें इसके संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं. लेकिन कई जानकार मानते हैं कि व्यक्ति को बीमार करने से पहले भी ये वायरस फैल सकता है|
  • बीमारी के शुरुआती लक्षण सर्दी और फ्लू जैसे ही होते हैं जिससे कोई आसानी से भ्रमित हो सकता है|

कोरोना की पहचान के लिए इन लक्षणों पर गौर करें(Consider these symptoms to identify the corona)

1. तेज बुखार आना (High fever) :- अगर किसी व्यक्ति को सुखी खांसी के साथ तेज बुखार है तो उसे एक बार जरूर जांच करानी चाहिए. यदि आपका तापमान 99.0 और 99.5 डिग्री फारेनहाइट है तो उसे बुखार नहीं मानेंगे. अगर तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुंचता है तभी यह चिंता का विषय है|

2.कफ और सूखी खांसी (Phlegm and dry cough) :-  कोरोना वायरस कफ होता है मगर संक्रमित व्यक्ति को सुखी खांसी आती है|

3. सांस लेने में समस्या (Trouble breathing) :– कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 5 दिनों के अंदर व्यक्ति को सांस लेने में समस्या हो सकती है. सांस लेने की समस्या दरअसल फेफड़ो में फैलते कफ के कारण होती है|

4. फ्लू-कोल़्ड जैसे लक्षण (Flu-like symptoms) :- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कभी-कभी बुखार, खांसी, सांस में दिक्कत के अलावा फ्लू और कोल्ड जैसे लक्षण भी हो सकते हैं|

5.डायरिया और उल्टी (Diarrhea and vomiting) :- कोरोना से संक्रमित लोगों में डायरिया और उल्टी के भी लक्षण देखे गए है. करीब 30 प्रतिशत लोगों में इस तरह के लक्षण पाये गए हैं|

6.सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी (Loss of smell and taste) :- बहुत से मामलों में पाया गया है कि कोरोना से संक्रमित लोगों को सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी आती है|

कोरोनावायरस से बचाव (Coronavirus protection)

  • यह वायरस, खांसी, छींक, श्वास और छूने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
  • इस वायरस से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करें।
  • लोगों से हाथ न मिलाएं और गले भी न मिलें। 5 फीट की दूरी से बात करें।
  • अपने आसपास और घर की सफाई रखें।
  • कपड़ों को अच्छी तरह से धोएं और कम से कम दो घंटे धूप में सुखाएं।
  • हर 15 मिनट में कम से कम एक घूंट गुनगुना पानी पीते रहें।
  • अपने हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक रगड़कर साबुन से धोएं।
  • गंदे हाथों से अपने नाक और मुंह को न छुएं और न ही गंदे हाथों से कुछ खाएं।
  • आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, बर्फ, बाजार की लस्सी, ठंडी छाछ और अन्य ठंडी वस्तुओं के सेवन से बचें।
  • बाजार में मिलने वाले दूध से बने उत्पाद जैसे चीज, बटर, मायोनीज का सेवन न करें।
  • नमक के गर्म/गुनगुने पानी से गरारे करें, इससे वायरस फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाएगा।
  • रोजाना तुलसी, लौंग, अदरक और हल्दी का गर्म दूध पिएं।
  • गर्म स्थान पर रहें क्योंकि यह वायरस 35-40 डिग्री तापमान पर मर जाता है।
  • कपूर, लौंग, इलाइची और जावित्री को पीसकर अपने साथ रखें और समय-समय पर उसे सूंघते रहें।
  • विटामिन-सी युक्त फलों जैसे संतरे, मौसमी और आंवला खाएं। नींबू का इस्तेमाल भी जरूर करें।
  • सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
  • प्रतिदिन प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करें। इससे श्ववसन तंत्र और फेफड़े मजबूत होंगे।
  • सर्दी, खांसी, कफ, बुखार होने वाले व्यक्ति को डॉक्टर के पास तुरंत जाने की सलाह दें।
  • शाकाहारी और हमेशा ताजा भोजन खाएं। मांसाहार के सेवन से बचें।
  • फ्रीज में रखी ठंडी वस्तुओं का सेवन बिल्कुल न करें।

कोरोनावायरस से बचाव के घरेलू उपाय (Home remedies to prevent coronavirus)

  • सरसों का तेल और कपूर का करें इस्तेमाल:- सरसों तेल में कपूर मिलाकर कुछ बूंदे नाक में डालें, जिससे श्वास लेने में कठिनाई नहीं होगी और प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहेगी। संक्रमण से बचने के लिए अदरख व मुलेठी का सेवन अधिक करें। अदरख को आयुर्वेद में विषनाशक कहा जाता है। चीनी की जगह गुड़ का सेवन करें। ज्यादा भीड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज करें। बाहर का भोजन न करें। साथ ही हल्दी डालकर दूध का सेवन रात में सोने से पहले करें।
  • खरास हो तो गर्म पानी से गरारा करें।
  • बाहर से आने के बाद हर बार साबुन से हाथ-मुंह धोना जरूरी है।
  • बाहर जाने के दौरान अल्कोहल सैनिटाइजर जेब में रखें, बीच-बीच में हाथ सैनिटाइज करें।

कोरोना का संक्रमण फैलने से कैसे रोकें?(How to prevent corona infection from spreading)?

  • अगर आप संक्रमित इलाक़े से आए हैं या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहे हैं तो आपको अकेले रहने की सलाह दी जा सकती है|
  • घर पर रहें|
  • ऑफ़िस, स्कूल या सार्वजनिक जगहों पर न जाएं |
  • सार्वजनिक वाहन जैसे बस, ट्रेन, ऑटो या टैक्सी से यात्रा न करें |
  • घर में मेहमान न बुलाएं|
  • घर का सामान किसी और से मंगाएं|
  • अगर आप और भी लोगों के साथ रह रहे हैं तो ज़्यादा सतर्कता बरतें|
  • अलग कमरे में रहें और साझा रसोई व बाथरूम को लगातार साफ़ करें. 14 दिनों तक ऐसा करते रहें ताकि संक्रमण का ख़तरा कम हो सके|

आयुर्वेद के 10 उपाय, जो वायरस के प्रकोप से करेंगे आपकी सुरक्षा(10 remedies of Ayurveda, which will protect you from virus outbreak)

  • COVID-19 वायरस के प्रभाव से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप नियमित तौर पर गुनगुना पीना पिएं।
  •  शरीर के इम्यून सिस्टम को दुरूस्त रखने के लिए आपको नियमित तौर पर उचित मात्रा में आंवला, एलोवेरा, गिलोय, नींबू आदि का जूस पीना चाहिए।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के आप पानी में तुलसी रस की कुछ बूंदें डालकर पी सकते हैं।
  •  गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
  • इम्यून सिस्टम की बेहतरी के लिए आप अष्टादसांग काढ़ा, गुडूच्यादि काढ़ा , अमृतउत्तरम काढ़ा या सिरिशादी काढ़ा का सेवन करना उत्तम रहेगा।
  • घर और आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए आप नियमित तौर पर नीम की पत्तियों, गुग्गल, राल, देवदारु और दो कपूर को साथ में जलाएं। उसके धुएं को घर और आस-पास में फैलने दें।
  • इसके अलावा आप चाहें तो गुग्गल, वचा, इलायची, तुलसी, लौंग, गाय का घी और खांड को किसी मिट्टी के पात्र में रखकर जलाएं और उसके धुएं को घर और आस-पास में फैलने दें।
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए आप नियमित तौर पर तुलसी की 5 पत्तियां, 4 काली मिर्च, 3 लौंग, एक चम्मच अदरक का रस शहद के साथ ले सकते हैं।
  •  चाय पीने के शौकीन हैं, तो आपको नियमित रूप से 10 या 15 तुलसी के पत्ते, 5 से 7 काली मिर्च, थोड़ी दालचीनी और उचित मात्रा में अदरक डालकर बनाई गई चाय पीनी चाहिए। यह आपको रोगों से बचने में मदद करेगी।
  •  इन सबके अलावा आपको कोरोना वायरस से बचने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
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बालों का झड़ना(Hairfall)

बालों का झड़ना, जिसे ऐलोपेशिया या गंजापन भी कहा जाता है कुछ लोगों में बाल गिरने का कारण मनोवैज्ञानिक संकट होता है. हर दिन बाल झड़ते है एक व्यक्ति के प्रति दिन 100 बाल झड़ते हैं. लेकिन अधिक बाल झड़ने से किसी व्यक्ति के सिर पर गंजे धब्बे दिखाई देते हैं| महिला के शीर्ष पर बाल पतले होते हैं|

हेयर फॉल क्या है?(What is hair fall)?

बाल झड़ना कोई जानलेवा स्थिति नहीं है. लेकिन यह गंभीर रूप से खतरे में पड़ सकता है कि जिस तर यह आत्मविश्वास को खतरे में डाल सकता है. पुरुष, महिला और यहां तक ​​कि बच्चे भी बालों के झड़ने का अनुभव कर सकते हैं. यह स्थिति आमतौर पर हार्मोनल परिवर्तन, आनुवंशिकता, चिकित्सा स्थितियों या कुछ दवाओं के साइड-इफेक्ट के परिणामस्वरूप होती है. वंशानुगत कारणों से बालों का झड़ना बालों के झड़ने का सबसे आम कारण होता है|

बालों के झड़ने के प्रकार क्या हैं?(What are the types of hair loss)?

बाल विकास दर लोगों की उम्र के रूप में धीमी हो जाती है और इसे ऐलोपेशिया कहा जाता है. बालों के झड़ने के कई प्रकार होते हैं|

1.अनौपचारिक ऐलोपेशिया :- यह उम्र के साथ बालों का प्राकृतिक रूप से पतला होना है बालों के रोम की संख्या में वृद्धि होती है और अन्य बाल कम और छोटे हो जाते है|

2. एंड्रोजेनिक ऐलोपेशिया (Androgenic alopecia):- इस अनुवांशिक स्थिति से महिला और पुरुष दोनों प्रभावित हो सकते हैं जिन पुरुषों की यह स्थिति होती है, उनके किशोरावस्था में भी बाल झड़ने लगते हैं यह ललाट खोपड़ी और स्कैल्प से क्रमिक बालों के झड़ने और हेयरलाइनिंग द्वारा चिह्नित किया जाता है इससे प्रभावित होने वाली महिलाओं के बालों में उनके फोरटीज के बाद बाल पतले होते हैं. इसे महिला गंजापन के रूप में जाना जाता है|

3.ऐलोपेशिया आरैटा (Alopecia areata):- यह आमतौर पर अचानक शुरू होता है और युवा वयस्कों और बच्चों में पैच में बालों के झड़ने की ओर जाता है यह पूरा बाल्डिंग (ऐलोपेशिया) हो सकता है इस स्थिति वाले 90% से अधिक लोगों में, बाल कुछ वर्षों में वापस उग जाते हैं|

4.ट्रिकोटिलोमेनिया (Trichotillomania) :- यह बच्चों में सबसे अधिक देखा जाता है इस मनोवैज्ञानिक विकार के कारण व्यक्ति अपने ही बालों को खराब कर देता है|

5.टेलोजेन इफ्लुवियम ( Telogen effluvium) :- बाल विकास चक्र परिवर्तन से खोपड़ी पर बालों का एक अस्थायी पतलापन होता है यह बहुत सारे बालों को आराम करने वाले चरण में प्रवेश करने के कारण होता है जो बाल को हल्का कर देता है और परिणामस्वरूप पतले हो जाता है|

6.स्कारिंग ऐलोपेशिया (Scarring alopecia):- त्वचा की इंफ्लामेटरी स्थितियां जैसे कि फॉलिकुलिटिस, मुँहासे और सेल्युलाइटिस, ऐसे परिणाम उत्पन्न करते हैं जो बालों की पुनर्जीवित करने की क्षमता को नष्ट कर देते हैं|

बाल गिरने के कारण क्या हैं?(What are the causes of hair fall)?

बालों का झड़ना उन लोगों में सबसे अधिक प्रचलित है, जिनमें बाल झड़ने का पारिवारिक इतिहास है, आनुवांशिकी इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. कुछ हार्मोन भी बालों के झड़ने को ट्रिगर करते हैं जो आमतौर पर यौवन के दौरान शुरू होते हैं. दर्दनाक घटनाओं, सर्जरी और प्रमुख बीमारियों जैसे अन्य कारक भी तीव्र बालों के झड़ने को ट्रिगर कर सकते हैं. ऐसे में कुछ समय बाद बाल अपने आप उगने लगते हैं. गर्भावस्था के दौरान रजोनिवृत्ति, अचानक गर्भनिरोधक गोलियां, प्रसव और हार्मोनल परिवर्तन के कारण अस्थायी बालों के झड़ने का कारण हो सकता है|

कुछ अन्य कारण हैं जिनके माध्यम से बालों का झड़ना होता है (There are some other reasons through which hair loss occurs)

  • हार्मोन (Hormones):- असामान्य एण्ड्रोजन स्तर के कारण बाल गिर सकते हैं|
  • जीन (Jean):- माता-पिता से जीन किसी व्यक्ति की महिला या पुरुष गंजापन होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं|
  • ड्रग्स (Drugs):- ब्लड थिनर, कैंसर उपचार दवाओं, जन्म नियंत्रण दवा और बीटा ब्लॉकर्स के कारण बालों का गिरना भी हो सकता है|
  • मेडिकल प्रिडिस्पोजिशन (Medical predisposition):- डायबिटीज, ल्यूपस, आयरन की कमी, थायरॉइड डिजीज, एनीमिया और ईटिंग डिसऑर्डर से बाल झड़ सकते हैं|
  • कॉस्मेटिक (Cosmetic) :- हेयर डाई, ब्लीचिंग और शैंपू के उपयोग जैसी प्रक्रियाएं सभी बालों को पतला कर सकती हैं जिससे यह कमजोर हो जाते हैं. बालों को कसकर बांधना, गर्म कर्लर या रोलर्स का उपयोग करने से भी बालों का टूटना और नुकसान होता है हालांकि, इनमें गंजापन नहीं होता है|

Tresemme हेयर फॉल डिफेंस शैम्पू(Tresemme Hair Fall Defense Shampoo)

  • बाल मजबूत बनाता है और टूटने के कारण बालों के झड़ने को रोकता है|
  • लंबे और मजबूत बाल पाएं|
  • दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त कोमल|
  • अतिरिक्त सुरक्षा के लिए बालों के झड़ने से बचाव कंडीशनर का पालन करें।
  • विशेष रूप से भारतीय बालों के लिए तैयार और तेल उपचार के साथ उपयोग के लिए उपयुक्त है|

प्याज हेयर ऑयल – बालों के झड़ने को नियंत्रित करता है(Onion Hair Oil – Regulates Hair Loss)

सामग्री (Content) :- लाल प्याज का अर्क, नारियल का तेल, सूरजमुखी का तेल, विटामिन ई, अरंडी का तेल, आर्गन का तेल, जोजोबा का तेल, आंवला का अर्क, हिबिस्कस का अर्क, नीम का तेल, भृंगराज का अर्क, आम का मक्खन, शीया का मक्खन, चंदन का तेल, गुलाब का तेल

पोषण (Nutrition) :- बीक्यूस प्याज बालों के रोम पोषण में बहुत अच्छे होते हैं|

खोपड़ी पर फंगल संक्रमण (Fungal infection on the scalp) :- प्याज में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और खोपड़ी के संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। यह बदले में बालों के झड़ने को कम करने में मदद करता है क्योंकि खोपड़ी के संक्रमण से बालों का भारी नुकसान हो सकता है।

फ्रेम फ्रिज़ (Frame fridge) :- वनस्पति तेलों के निर्माण के साथ रे नैचुरल प्याज हेयर ऑयल, नमी में बालों के लॉक की चमक को बढ़ाने में मदद करता है, बालों के उलझते हुए छोरों को बंद और ढीला करता है।प्याज का तेल सल्फर में समृद्ध है, जो टूटना और पतला होने को कम करने के लिए जाना जाता है।

किस विटामिन की कमी से बाल झड़ते हैं? (Which vitamin deficiency causes hair loss)?

विटामिन बालों की वृद्धि में आवश्यक भूमिका निभाते हैं विटामिन में कमी से बालों के झड़ने से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं नियासिन या विटामिन बी 3 और बायोटिन एक और बी विटामिन है जो बालों के झड़ने की ओर जाता है कि शरीर में विटामिन डी की कमी बालों के विकास को प्रभावित करती है बालों के झड़ने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में विटामिन डी का स्तर कम होता है|

बालों को झड़ने से रोकने के लिए कौन से विटामिन अच्छे हैं?(What vitamins are good for preventing hair fall?)

  • विटामिन ए (Vitamin A):- यह शरीर में मौजूद हर कोशिका के लिए मूलभूत इकाई है बाल सबसे तेजी से बढ़ते ऊतक हैं विटामिन ए इसकी वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| विटामिन ए पशु उत्पादों जैसे दूध, अंडे में पाया जाता है|
  • विटामिन बी (Vitamin B) :– ​​बालों के विकास में प्रमुख विटामिन में से एक विटामिन बी को बायोटिन्स भी कहा जाता है| यह आरबीसी के निर्माण में मदद करता है और खोपड़ी तक ऑक्सीजन, पोषक तत्व पहुंचाता है| विटामिन बी पूरे अनाज, बादाम, मांस, समुद्री भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है|
  • विटामिन सी (V itamin C) :- यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है जो मुक्त कणों के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है कोलेजन नामक एक प्रोटीन जो बालों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है यह विटामिन बालों के लिए आवश्यक खनिजों को अवशोषित करने में मदद करता है| खट्टे फल जैसे संतरे, स्ट्रॉबेरी, मिर्च आदि बालों के विकास के लिए अच्छे होते हैं|
  • विटामिन डी(Vitamin D):- यह बालों के विकास के लिए एक प्रमुख कारक होता है जो नए रोम बनाने में मदद करता है विटामिन डी बालों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| वसायुक्त मछली, कॉड लिवर ऑयल, कुछ मशरूम और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं|

बाल झड़ने से रोकने के लिए आसान घरेलू उपाय –(Hair Fall Tips and Treatment at Home)

आजकल बाल झड़ने की समस्या आम हो गई है। पुरुष हो या महिला हर कोई इससे परेशान है। इस समस्या के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। इस व्यस्त जीवन में समय बचाने के लिए हम प्राकृतिक संसाधनों की जगह सिर्फ केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग करते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे बालों पर पड़ता है। बाल झड़ने के कारण गंजेपन तक का सामना करना पड़ सकता है। बाल झड़ने के घरेलू उपायों के बारे में, जिनके प्रयोग से न सिर्फ बाल मजबूत होंगे, बल्कि उनकी प्राकृतिक चमक भी लौट आएगी।

बाल झड़ने के कारण (Causes of Hair Fall)

1. तनाव (Tension) :- जो शख्स तनाव की गिरफ्त में आया, उसे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अब तक हुईं विभिन्न रिसर्च में भी यह बात स्पष्ट हुई है कि तनाव के चलते बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

2. आनुवंशिक (Genetic) :- बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारण आनुवंशिक भी है, जिसे एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहा जाता है अमेरिका अकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (US Academy of Dermatology) का मानना है कि बाल झड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही होता है। अगर परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही है, तो परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी इसका सामना करना पड़ सकता है।

3. हार्मोन में बदलाव (Hormone changes) :- मेनपॉज के कारण, गर्भावस्था की स्थिति में या थायराइड होने पर शरीर में हार्मोन बदलने लगते हैं। इस कारण से भी बाल झड़ सकते हैं।

4. असंतुलित भोजन खाना (Eating unbalanced food) :- खानपान में सावधानी न बरतने से भी बाल कमजोर होकर गिरने लगते हैं। यह समस्या ज्यादातर उन लोगों के साथ होती है, जो जंक फूड खाना पसंद करते हैं। जंक फूड में ऐसा कोई पौषक तत्व नहीं होता, जो हमारी सेहत व बालों के लिए अच्छा हो। इसके अलावा, यह समस्या उन्हें भी होती है, जो खानपान में संतुलन नहीं बनाकर रखते यानी नियमानुसार भोजन नहीं करते।

5. प्रोटीन की कमी ( Protein deficiency) :- हमारे बाल प्रोटीन के कारण बनते, बढ़ते और मजबूत होते हैं। बालों के लिए इस प्रोटीन को केराटिन कहा जाता है। अगर भोजन में प्रोटीन की कमी होती है, तो बाल कमजोर होने लगते हैं। परिणामस्वरूप बाल रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं|

6. एनीमिया (Anemia) :- महिलाओं में खून की कमी होना आम बात है, जिस कारण महिलाओं को एनीमिया हो जाता है। यह भोजन में आयरन की कमी के कारण होता है। आयरन की कमी होने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पाती हैं। ये लाल रक्त कोशिकाएं ही हैं, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कर ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण बालों को विकसित होने के लिए जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और टूटकर गिरने लगते हैं।

बाल झड़ने से रोकने के घरेलू इलाज (Home Remedies for Hair Fall)

1.मेथी (Fenugreek) :- एक कप में मेथी के बीज को रात भर भिगोकर रख दें सुबह उसका पेस्ट बनाकर जड़ों से लेकर बालों तक लगाएं| 40 मिनट बाद ठंडे पानी से सिर को धो लें इसका प्रयोग महीने में एक से दो बार कर सकते हैं |

2.अंडा (Egg) :- अंडे के सफेद हिस्से को एक चम्मच जैतून के तेल में मिला लें इस मिश्रण को अपने बालों में लगाएं 15 से 20 मिनट बाद बालोंको ठंडे पानी से धो लें और शैंपू कर लें आप इसका प्रयोग हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं|

3.ग्रीन टी (Green tea) :- दो ग्रीन टी बैग्स को 2 / 3 कप गरम पानी में डाल ले | ग्रीन टी बैग्स को कब से बाहर निकाल कर उस पानी से बालों को धो लें बालों में शैंपू का प्रयोग करने के बाद इसे कंडीशनर की तरह प्रयोग करें|

4. आंवला(Gooseberry) :- 4/5 आंवले को एक कप नारियल के तेल में जब तक उबालें जब तक वह काला ना हो जाए| तेल को ठंडा होने पर बालों में लगाएं और 20 से 30 मिनट बाद शैंपू से सर को धोले |

5.दही(Curd) :- थोड़े से मेथी के दानों को मिक्सी में पीस लें उसे एक कटोरी दही में मिक्स कर लें इस मिश्रण को बालों में लगाएं और 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोकर शैंपू कर लें इसका इस्तेमाल आप हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं |

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तेलीय त्वचा की देखभाल(Oil Skin Care)

जिनके चेहरे की त्वचा तैलीय होती है, उन्हें कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे लोगों के चेहरे पर हल्का ऑयल हर समय बना रहता है और चेहरा चिपचिपा लगता है। तैलीय त्वचा के कारण कील-मुंहासे हो जाते हैं जो चेहरे की सुंदरता को बिगाड़ देते हैं। इसलिए, आज इस लेख में हम आपको तैलीय त्चचा के बारे में कुछ घरेलू उपाय बताए जाएंगे जिनके प्रयोग से आपके चेहरा सुंदर, आकर्षक व कोमल हो जाएगा।

तैलीय त्वचा होने के कारण(Causes of Oily Skin in Hindi)

1. तनाव (Tension) :- तनाव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारे शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। कोर्टिसोल भी एक तरह का हार्मोन है। हमारे तनावग्रस्त होने पर शरीर में इसका रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे त्वचा तैलीय होती है|

2. हार्मोन में बदलाव(Hormone changes) :- जीवन के विभिन्न स्तरों पर महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। फिर चाहे वह किशोरावस्था में हो या फिर गर्भावस्था के दौर से गुजर रही हो। यहां तक कि मेनपॉज से पहले और बाद में भी महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान शरीर में मौजूद तैलीय ग्रंथीया सक्रीय हो जाती हैं और त्वचा में मौजूद तेल चेहरे पर नरज आने लगता है, जिस कारण त्वचा तैलीय हो जाती है|

3. आनुवंशिक (Genetic):- अगर किसी के माता-पिता की त्वचा तैलीय है, तो संभव है कि उनके बच्चों की त्वचा भी तैलीय हो सकती है। इस स्थिति में बच्चों के चेहरे पर ऑयनी स्किन के छिद्र बड़े हो सकते हैं, जिस कारण तैलीय ग्रंथियोंं से तेल अधिक मात्रा में निकलता है।

4. स्किनकेयर उत्पादों का अधिक प्रयोग (Overuse of skincare products) :- हमारे चेहरे की त्वचा सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है। हम चेहरे को निखारने के लिए विभिन्न स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। हम ज़रूर से ज़्यादा चेहरे की स्क्रबिंग करते हैं। परिणामस्वरूप, हमारे चेहरे की रंगत उड़ने लगती है। ऐसा करने से भी स्किन तैलीय हो सकती है।

5. मौसम में बदलाव (Change in weather) :- मौसम मैं बदलाव के साथ उसका असर चेहरे पर दिखाई देता है। गर्मियों में नमी बढ़ने के कारण पसीना ज्यादा आता है और तैलीय ग्रंथीयों से तेल ज़्यादा बाहर निकलता है। इस कारण चेहरा ज़रूरत से ज़्यादा ऑयली नजर आता है। वहीं, सर्दियों में त्वचा रूखी हो जाती है, ऐसे में माश्चराइजर की कमी को पूरा करने के लिए स्किन ज़्यादा ऑयली हो जाती है।

6. अधिक दवाओं का सेवन (Prescription drugs) :- अत्याधिक दवाओं का सेवन करने से भी त्वचा तैलीय हो सकती है। अगर आप हार्मोनल गर्भनिरोधक दवा या फिर हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा का सेवन कर रही हैं, तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि इन दवाओं के लगातार सेवन से आपकी त्वचा भी तैलीय हो जाए और कील-मुंहासों का सामना करना पड़े।

7. गलत खानपान (Wrong Catering) :- तला, मिर्च-मसाले, चिकनाई युक्त व अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करने से त्वचा तैलीय हो जाती है|

बायोटीक बायो नारियल व्हाइटनिंग और ब्राइटनिंग क्रीम(Biotique Bio Coconut Whitening And Brightening Cream)

मात्रा (quantity):- 50 ग्राम; आइटम फॉर्म: क्रीम

त्वचा के प्रकार(Skin type) :- सभी प्रकार की त्वचा के लिए मेलेनिन के खिलाफ आंतरिक त्वचा की रक्षा करता है|

उपयोग (Use):- साफ चेहरे और गर्दन पर लागू करें धीरे से त्वचा में मालिश करें|

पैकेज सामग्री (Package Contents) :- 1 व्हाइटनिंग और ब्राइटनिंग क्रीम

लोटस हर्बल्स नीम एंड क्लोव प्यूरिफाइंग फेस वॉश (Lotus Herbals Neemwash Neem & Clove Purifying Face Wash)

ऑयली स्किन के लिए नीम एक वरदान की तरह है। इसकी एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज़ ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन पर मैजिक की तरह काम करती हैं। लौंग भी स्किन के एक्सेस ऑयल को हटाने में मदद करती है, इसलिए ये फेसवॉश ऑयली स्किन के लिए परफेक्ट होता है। ये ना सिर्फ स्किन ऑयल को कंट्रोल करता है, बल्कि एक्ने, ब्लेमिशेज़ और एक्ज़िमा-प्रोन स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

तैलीय त्वचा (ऑइली स्किन) के लिए घरेलू उपाय – (Home Remedies for Oily Skin in Hindi) :-

तैलीय त्वचा के घरेलू उपाय के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें बनाना आसान है, इनका कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं है।

1. गुलाब जल (rose water):-

गुलाब जल को प्राकृतिक और स्वास्थ्य के अच्छा माना गया है। यह त्वचा में ऑयल को नियंत्रित कर नमी प्रदान करता है। गुलाब जल में भरपूर मात्रा मे एंटीमाइक्रोबायल (Antimicrobial) ,एंटीऑक्सीडेंट(Antioxidant),मिनरल( Mineral)व विटामिन(Vitamin)होते हैं। ये सभी गुण तैलीय त्वचा की देखभाल करने के लिए पर्याप्तहैं|

सामग्री :- थोड़ा-सा गुलाब जल ,एक कॉटन बॉल

कॉटन बॉल या फिर रूई के छोटे से टुकड़े को गुलाब जल में भिगोकर इससे चेहरे को साफ करें। ऐसा करने से ना सिर्फ चेहरे की त्वचा खिल उठेगी, बल्कि आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे ।इस प्रक्रिया को आप दिन में दो बार सुबह व रात को सोने से पहले अपना सकते हैं।

2. मुल्तानी मिट्टी (Multani mitti):-

तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में खनिज पाया जाता है। मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक स्किन में से तेल को सोखकर, प्राकृतिक ख़ूबसूरती देता है। इसके अलावा, यह कील-मुंहासों को खत्म कर दाग-धब्बों को हल्का कर देता है।

सामग्री :- mदो चम्मच मुल्तानी मिट्टी , एक चम्मच ताज़ा दही , दो-तीन बूंद नींबू का रस

बनाने की विधि :- इन सभी सामग्रियों को एक कटोरी में डालकर तब तक मिक्स करें, जब तक कि पेस्ट ना बन जाए।अब चेहरे को पानी से अच्छे से धो लें और तौलिये से साफ कर लें।इसके बाद पेस्ट को अपने पूरे चेहरे पर लगाएं।जब फेस पैक पूरी तरह से सूख जाए, तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें।चेहरा धोने के बाद माश्चराइज़र क्रीम जरूर लगाएं|

नोट :- इस फेस पैक को आप हफ्ते में तीन बार लगा सकते हैं।

3. मसूर की दाल (Masur lentils):-

मसूर की दाल में भरपूर मात्रा में खनिज व विटामिन होते हैं। यह खाने में भी फायदेमंद है, यह त्वचा के लिए भी लाभकारी है। इसका फेस पैक तैलीय त्वचा पर असरकारक है।

सामग्री :- आधा कप मसूर की दाल , एक तिहाई कप कच्चा दूध

बनाने की विधि :- मसूर की दाल को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इसे अच्छी तरह पीस लें। अब इसमें दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस फेस पैक को अपने चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट तक सूखने दें।अब चेहरे को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें।

नोट :-इस फेस पैक से आप चेहरे की स्क्रबिंग भी कर सकते हैं।

4. नीम (Azadirachta indica):-

आयुर्वेदिक औषधी में नीम का अत्याधिक महत्व है। नीम के पत्तों व उसके रस से बनीं आयुर्वेदिक औषधियां स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं। साथ ही शरीर की सुंदरता को बढ़ाने में भी नीम का प्रयोग किया जाता है। नीम से तैयार किया गया फेस पैक तैलीय त्वचा के लिए बहुत लाभदायक है|

सामग्री :- नीम की 9-10 पत्तियां , 3-4 चुटकी हल्दी पाउडर|

बनाने की विधि :- नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह से पीस लें।
अब इसमें हल्दी पाउडर डाल दें।अगर पेस्ट गाढ़ा हो गया हो, तो उसे पतला करने के लिए पानी की कुछ बूंदें डाल सकते हैं।अब चेहरे को पानी से धोकर पेस्ट लगा लें।करीब 20 मिनट बाद जब पेस्ट सूख जाए, तो चेहरा पानी से धो लें।

नोट :- यह पैक चेहरे से तेल को सोख लेता है और कील-मुंहासों को भी साफ़ करता है।

5. संतरे का छिलका (Orange peel):-

संतरा विटामिन-सी का सबसे अच्छा स्रोत है, संतरा त्वचा में एंटीऑक्सीडेंट्स(Antioxidants) का संचार करने में मदद करता है संतरे के छिलके से बने फेस पैक न सिर्फ त्वचा से अतरिक्त तेल को निकाल बाहर करते हैं, बल्कि दाग-धब्बों को भी मिटाने का काम करते हैं।

सामग्री :- तीन चम्मचे संतरे के छिलके का पाउडर , चार चम्मच दूध , एक चम्मच नारियल का तेल , दो से चार चम्मच गुलाब जल

बनाने की विधि :- संतरे के छिलके को दो-तीन दिन धूप में सूखा लें और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लें। हालांकि, यह पाउडर बाजार में भी मिल जाता है, लेकिन घर में बनाया पाउडर बेहतर होता है।इन सभी सामग्रियों को एक कटोरी में मिक्स कर लें और चेहरे पर लगाएं।करीब 15-20 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें।

नोट:-आप इस फेस पैक को हफ्ते में 4-5 बार लगा सकते हैं।

6. खीरा (Cucumber):-

खीरा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है खीरा तैलीय त्वचा के लिए काफी फ़ायदेमंद है। खीरे में विटामिन-के, सी, पोटेशियम व फोलिक एसिड जैसे पौष्टिक गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसमें सिलिकॉन नामक खास तरह का तत्व मौजूद होता है, जो स्किन को निखारने में मदद करता है खीरे के रस को त्वचा के लिए बेहतरीन टॉनिक माना गया है, जिसे चेहरे पर लगाने से ताजगी का अहसास होता है।

सामग्री :- एक खीरा , नींबू के रस की 6-8 बूंदें , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- खीरे का छिलका उतार लें और उसके टुकड़े कर बिना पानी डाले पीस लें।अब इसमें नींबू का रस और शहद को मिक्स कर लें।चेहरे को अच्छी तरह साफ कर, रूई की मदद से इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं। हल्के-हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें और फिर 15-20 के लिए इसे सूखने दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

7. शहद (Honey) :-

ऑयली स्किन के लिए शहद बहुत लाभदायक है। इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबाइल व मिनरल जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो स्किन से ऑयल को बाहर निकालकर, उसे ख़ूबसूरत बनाते हैं।

सामग्री :- 10 बादाम , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- बादाम को रात भर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इन्हें अच्छे से पीस लें।
अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। इस पैक को चेहरे पर करीब 15 मिनट लगा रहने दें और सूखने के बाद धो लें।

8. एलोवेरा (Aloe vera):-

एलोवेरा सबसे प्राकृतिक उत्पाद है। इस औषधी का कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा का प्रयोग सुंदर व निखरी त्वचा के लिए किया जाता है। यह तैलीय, रूखी व मिश्रित हर तरह की त्वचा के लिए फ़ायदेमंद है।

सामग्री :- एक चम्मच एलोवेरा जैल , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- एलोवेरा के पत्तों को गर्म पानी में उबाल लें और इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें।
इन दोनों को एक कटोरी में डालकर मिक्स कर लें। अब साफ हाथों से इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं। करीब 15-20 मिनट बाद ताजे पाने से चेहरा धो लें।

9. नींबू (Lemon):-

नींबू में विटामिन-सी होता है। चेहरे के रोमछिद्रों को साफ कर, उन्हें सिकोड़ने में मदद करता है। इसे चेहरे पर लगाने से तैलीय त्वचा की समस्या काफ़ी हद तक कम हो सकती है।

सामग्री :- आधा कटा हुआ नींबू , गुलाब जल की 7-8 बूंदें

बनाने की विधि :- आधे कटे हुए नींबू को चेहरे पर रगड़ें। अगर आपको जलन होती है, तो इसमें नींबू के रस में गुलाब जल मिक्स कर लें।अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर, करीब 20 मिनट बाद पानी से धो लें।

तैलीय त्वचा (ऑइली स्किन) के लिए कुछ और टिप्स – Other Tips For Oily Skin Care in Hindi

इन घरेलू उपचारों के अलावा अन्य तरीके भी हैं, जिनकी मदद से हम अपनी ऑयली स्किन की केयर कर सकते हैं।

1.क्लींज़िंग (Cleansing) :- क्लींज़िंग करने से चेहरे के सभी पोर्स खुल जाते हैं और उनमें से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है, जिससे चेहरे पर जमा अतिरिक्त तेल साफ हो जाता है। क्लीजिंग कराते समय इस बात का ध्यान रखें कि चेहरे को गुनगुने पानी से ही धोएं।

2.टोनिंग (Toning):- क्लींज़िंग करने के बाद टोनिंग का उपयोग करना चाहिए इसे करने से पोर्स बंद हो जाते हैं और वापस गंदगी चेहरे पर जमा नहीं हो पाती।

3.स्क्रीबिंग (Scribing):- ऑयली स्किन के कारण नाक के आसपास ब्लैकहेड्स हो जाते हैं। इन्हें हटाने के लिए ब्लैकहेड रिमूवर स्क्रब का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ ब्लैकहेड्स साफ होंगे, बल्कि कील-मुंहासों से भी छुटकारा मिल जाएगा।

4. माश्चराइज़र(Moisturizer):- किसी भी अच्छी कंपनी की माश्चराइज़र क्रीम लगा सकते हैं। इससे त्वचा हाइड्रेट रहती है।

5.सनस्क्रीन (Sunscreen) :- सूरज के संपर्क में आते ही त्वचा ऑयली हो जाती है। इसलिए, ऐसी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, जो त्वचा को ऑयली होने से बचा सके।

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