त्वचा की चमक के टिप्स (skin glow Tips)

त्वचा में प्राक्रतिक निखार लाने के लिए योग सबसे अच्छा उपाय होता है। … और माथे की त्वचा में कसावट आती है और बढ़ती उम्र का प्रभाव चेहरे पर नहीं पड़ता है|

चेहरे पर चमक कैसे आती है?(How does face glow)?

हफ्ते में दो बार चेहरे पर बादाम के तेल और नारियल के तेल से मालिश करें। आयुर्वेद के अनुसार कहा जाता है कि इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है और आपकी चेहरे पर चमक और निखार दोनों आते हैं। रोजाना 3 से 4 खजूर रोज खाएं इससे आपकी चेहरे की त्वचा में यकीनन चमक आएगी। खीरे की स्लाइस रोज खानी चाहिए।

बेजान त्वचा के मुख्य कारण(Main causes of lifeless skin)

  • तनाव
  • पूरी नींद ना लेना
  • दवाओं का ज़्यादा सेवन
  • प्रदूषण
  • सूरज की हानिकारक किरणें
  • मौसम में होने वाले बदलाव
  • ब्यूटी प्रोडक्ट का ज़्यादा इस्तेमाल
  • ज़्यादा गर्म पानी का उपयोग

चमकदार त्वचा पाने के लिए क्या खाएं (What to eat to get glowing skin)

त्वचा में चमक बरकरार रखने के लिए और त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ क्रीम और घरेलु नुस्ख़े ही नहीं बल्कि अच्छा और स्वस्थ आहार ज़रूरी होता है। हमेशा याद रखें कि आप जो खाते हैं उस का असर आपके शरीर और चेहरे पर नज़र आता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप उन खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिसमें विटामिन, मिनरल, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मौजूद हों।
फल :- पपीता , केला , संतरा , आम , अमरुद
सब्ज़ी :- टमाटर , हरी पत्तेदार सब्ज़ियां (जैसे – पालक, पत्तागोभी आदि।)खीरा , गाजर , शिमला मिर्च

चमकदार त्वचा पाने के लिए क्या ना खाएं(What not to eat to get glowing skin)

ज़्यादा तेल वाली चीज़ें, जैसे –

  • फ़्राइज़, चिप्स, पिज़्ज़ा, बर्गर आदि ना खाएं।
  • शराब का सेवन ना करें।
  • सिगरेट ना पीएं।
  • ज़्यादा नमक या ज़रूरत से ज़्यादा मीठा ना खाएं।
  • ज़्यादा चाय या कॉफ़ी का सेवन ना करें।

लोटस व्हाइटग्लो डीप मॉइस्चराइजिंग क्रीम(Lotus Whiteglow Deep Moisturising Creme)

व्हाइटग्लो स्किन व्हाइटनिंग मसाज क्रीम में व्हाइटनिंग एक्टिविटीज होती हैं जो त्वचा को तरोताज़ा, ऊर्जावान और मॉइस्चराइज़ करते हुए त्वचा को हल्का, गोरा और चमकदार बनाती हैं। नैचुरल ग्लो के लिए व्हिटेंस और ब्राइटेंस आपकी त्वचा को लोटस हर्बल्स स्किन व्हाइटनिंग क्रीम से मसाज करके उसे निखारता है। इसे अपने चेहरे, गर्दन और हाथों पर अच्छी तरह से लगाएं, क्योंकि यह लोटस हर्बल्स व्हाइटग्लो स्किन मसाज क्रेम स्वाभाविक रूप से आपके रंग को बढ़ाता है। यह आपकी त्वचा को हर बार मॉइस्चराइज़, पोषण और ऊर्जान्वित करता है, जिससे आप तरोताजा और एक दम चमकने लगते हैं। सभी बुनाई में उपयोग के लिए आदर्श, यह लोटस हर्बल्स व्हाइटग्लो स्किन मसाज क्रेम सभी प्रकार की त्वचा के लिए अच्छा काम करता है। और आपकी त्वचा को फिर से जीवंत करता है, जिससे यह तरोताज़ा और चमकदार हो जाता है।

चमकदार त्वचा पाने के लिए कुछ और उपाय(Some other remedies to get glowing skin)

  • समय पर भोजन करने की आदत डालें।
  • सोने का समय सुनिश्चित करें।
  • रोज़ाना योग या व्यायाम करें।
  • चेहरे को रोज़ाना कम से कम दो बार ज़रूर धोएं।
  • नैचुरल मॉइस्चराइज़र का ही इस्तेमाल करें।
  • ज़्यादा मेकअप करने से बचें।
  • दिन में बाहर निकलते वक़्त सनस्क्रीन लगाना ना भूलें।
  • धूल-मिट्टी या प्रदूषण वाली जगहों पर चेहरे को स्कार्फ़ या दुपट्टे से ढाक कर रखें।
  • तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।
  • रोज़ाना खूब पानी पीएं ताकि आपकी त्वचा हाइड्रेट रहे और उसकी चमक बरकरार रहे।

चेहरे की चमक को बढ़ाने के लिए 5 योगासन(5 Yogasanas to enhance facial glow)

1.हलासन :- इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है। इससे इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हमारी रीढ़ सदा जवान बनी रहती है।

2.सर्वांगासन :- सर्वांगासन योग पूरे शरीर यानि पैर की उंगलियों से लेकर मस्तिष्क तक फायदा पहुंचता है। साथ ही साथ यह कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है। शरीर के कई रोगों में लाभकारी. हम अक्सर यह सुनते आ रहे है की योग आसनों के अभ्यास से हमें लाभ मिलता है| योग के कुछ आसन लम्बाई बढाने में मददगार होते है तो कुछ आसन शरीर की चर्बी घटाने में सहायक है।

3.त्रिकोणासान :- त्रिकोणासन खड़े होकर करने वाला एक महत्वपूर्ण आसन है। ‘त्रिकोण’ का अर्थ होता है त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है। इसका मतलब यह हुआ कि इस आसन में शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है यह आसन मांसपेशियों को फैलाने और नियमित शारीरिक फंक्शन में सुधार करने के लिए जाना जाता है।

4.मत्स्यासन :- मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। प्लाविनी प्राणायाम के साथ इस आसन की स्थिति में लम्बे समय तक पानी में तैर सकते हैं।

5.भुजंगासन :- इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन (संस्कृत: भुजङ्गसन) कहा जाता है। भुजंगा, जिसे इंग्लिश में कोबरा कहते है और चूंकि यह दिखने में फन फैलाए एक सांप जैसा होता है।

चेहरे पर चमक बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय(Home remedies to increase radiance on face)

1. जैतून का तेल( Olive oil) :-

अपनी हथेली पर जैतून के तेल की कुछ बूंदें लेकर पूरे चेहरे पर धीरे-धीरे लगाएँ। इसके बाद तौलिए को गुनगुने पानी में गीला करके उससे अपना चेहरा पोंछ लें। इस नुस्खे को रात में सोने से पहले आज़माएं।

कैसे मदद करता है ?

जैतून का तेल हमारी त्वचा पर एक अच्छे मॉइस्चराइज़र की तरह काम करता है। इसमें मौजूद फ़्लैवोनोइड और पॉलीफ़ेनॉल जैसे तत्व त्वचा की मृत होती कोशिकाओं में फिर से जान डाल देते हैं।

2. एलोवेरा(Aloe vera) :-

एलोवेरा जेल, हल्दी, शहद और दूध को मिलकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाकर बीस मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। इस पैक को हफ़्ते में दो बार लगाया जा सकता है।

कैसे मदद करता है ?

त्वचा की समस्याओं से निपटने में एलोवेरा जैल को काफ़ी असरदार माना जाता है। ये त्वचा को ज़रूरी नमी देकर उसकी प्राकृतिक चमक को बरकरार रखने में मदद करता है।

3. ग्रीन टी(Green Tea) :-

ग्रीन टी को पानी में उबालकर छान लें और फिर उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने पर उबली हुई ग्रीन टी में भूरी चीनी और मलाई मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर स्क्रब की तरह लगाएं। दस मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इस मिश्रण को हफ़्ते में एक या दो बार लगाया जा सकता है।

कैसे मदद करता है ?

ग्रीन टी में प्रचूर मात्रा में फ़्लैवोनोइड मौजूद होते हैं, जो त्वचा में कोलेजन के उत्पादन को सुचारू बनाए रखते हैं। इससे त्वचा में चमक बरकरार रहती है और वो जवान नज़र आती है।

4. उबटन(body scrub) :-

मसूर दाल, चावल और बादाम को अलग-अलग या साथ में पीसकर पाउडर बना लें। इस पाउडर में दलिया और हल्दी मिलाएं। अंत में इस मिश्रण में पानी या गुलाब जल मिलाकर एक पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे और गले पर लगाएं। इसे हाथों पर भी लगाया जा सकता है। पेस्ट सूखने के बाद त्वचा को पानी से धो लें। इस पेस्ट को दस दिन में एक बार लगाया जा सकता है।

कैसे मदद करता है ?

त्वचा की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए उबटन का इस्तेमाल सदियों से होता चला आ रहा है। इस उबटन में मौजूद दाल, चावल और दलिया हमारी त्वचा से गंदगी को निकालने में मदद करते हैं। इसमें मिलाई गई हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी बीमारियों से हमारी रक्षा करते हैं। उबटन तैयार करने में इस्तेमाल किया गया बादाम हमारी त्वचा को ज़रूरी नमी देता है और उसकी रंगत को सुधारता है।

5. नारियल तेल(Coconut Oil) :-

थोड़ा-सा नारियल तेल लेकर पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। हर रोज़ रात को सोने से पहले यह नुस्खा आज़माएं।

कैसे मदद करता है ?

यह नुस्खा ड्राई स्किन यानी रूखी त्वचा के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है। दरअसल, नारियल तेल हमारी त्वचा में नमी के ज़रूरी स्तर को बरकरार रखने में मदद करता है। इस तेल में मौजूद फ़ेनोलिक यौगिक इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण को ज़्यादा असरदार बना देता है।

6. टमाटर(Tomatoes) :-

टमाटर के टुकड़े से बीज को निकाल कर अलग कर दें। बीज रहित टमाटर के टुकड़े में चंदन पाउडर और हल्दी को मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें और फिर पानी से चेहरा धो लें। एक या दो दिन छोड़कर इस पेस्ट को नियमित रूप से लगाया जा सकता है।

कैसे मदद करता है ?

टमाटर में विटामिन-सी की मात्रा अधिक होती है, जो चेहरे की चमक को बढ़ाने में मदद करती है।

7. बेकिंग सोडा (Baking Soda):-

एक कटोरी में बेकिंग सोडा, जैतून के तेल और शहद का मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के बाद चेहरे को पानी से धो लें। आप हफ़्ते में एक बार इस मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे मदद करता है ?

बेकिंग सोडा पीएच संतुलन को ठीक रखकर त्वचा की चमक को बढ़ाने में मदद करता है।

खिंचाव के निशान (Streck Marks)

स्ट्रेच मार्क्स त्वचा पर हानिरहित दागों का एक रूप हैं। ये निशान हल्के रंग के होते हैं और त्वचा के आकार बदलने के कारण होते हैं।

स्ट्रेच मार्क्स क्या है?(What is stretch marks)?

वजन में बदलाव, शरीर सौष्ठव या हार्मोनल बदलावों के कारण त्वचा तेजी से फैलती है जिससे त्वचा में मार्क्स बन जाते हैं। जहां त्वचा खिंच रही हैस वहां लाल और बैगनी निशान बनने लगते हैं। स्‍ट्रेच मार्क्‍स शरीर में दिखने वाले एक भद्दे से निशानों का एक प्रकार है। ये निशान शरीर में धारदार लाइन और हल्के रंग के नजर आते है जो त्वचा के आकार बदलने के कारण होते हैं। स्‍ट्रेच मार्क्‍स आमतौर पर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पेट पर और शरीर के सामान्‍य हिस्‍सों जैसे स्‍तन, बांहो, नितम्‍बों और जांघों पर हो जाते है।
वजन बढ़ने, बॉडी बिल्डिंग और हार्मोनल बदलावों के कारण त्‍वचा में फैलाव की वजह से त्‍वचा में मार्क्‍स बन जाते हैं। जहां जहां से शरीर की त्‍वचा स्‍ट्रेच यानी फैलनी शुरु होती हैं, वहां ये स्‍ट्रेच मार्क्‍स उभरने लगते हैं।

स्ट्रेच मार्क्स या खिंचाव के निशान हटाने के घरेलू उपाय (Home remedies to remove stretch marks or stretch marks)

कई बार शरीर की त्वचा पर त्वचा के रंग से भिन्न लकीर या धारियों के निशान पड़ने लगते हैं, इन्हे ही स्ट्रेच मार्क्स कहते हैं। सामन्यतः ये पेट पर1 अधिक होते हैं, परन्तु ये शरीर के किसी भी अंग की त्वचा जैसे हाथ , कोहनी के पास, पैरों की पिंडलियाँ, जांघ आदि पर भी हो सकते हैं। महिलाएं मुख्यतः इससे बहुत ही परेशान रहती है। पुरुष वर्ग भी इन निशान की समस्या से अनछुआ नहीं है। बहुत अधिक कसरत या सही कसरत ना करने पर भी शरीर पर कुछ निशान बनने लगते हैं। कई बार स्ट्रेच मार्क्स शरीर के बड़े हिस्से में भी होने लगते हैं। अगर इन पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह समस्या बढ़ने लगती है।

1.पानी (Water) :-

जल ही जीवन है। पृथ्वी पर रहने के लिए पानी सबसे आवश्यक है। शरीर की आधी बीमारियां पानी पीने से नष्ट हो जाती हैं। हमारे शरीर में 72% पानी की मात्रा है। डॉक्टर्स भी रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। पानी शारीर में होने वाले हार्मोन्स के बदलाव को बराबर रखने में सहायक होता है। भरपूर पानी की मात्रा शरीर में रक्त में उपस्थित ऑक्सीजन को संयोजित रखता है, जिससे रक्तसंचार सही होता है। इसके कारण प्रत्येक तन्तु एवं कोशिकाएं सुचारू रूप से अपना कार्य करती हैं और इनमे होने वाले खिंचाव को रोकता है, जिससे किसी भी प्रकार के स्ट्रेच मार्क्स या निशान नहीं होते हैं।

2.अरण्डी का तेल (Castor oil) :-

स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के लिए अरण्डी के तेल का उपयोग भी किया जाता है। इसे 5-10 मिनट के लिए निशान पर ऊँगली से गोल घुमाकर मालिश करते हुए लगाइए और फिर उतनी जगह को किसी कपड़े से बाँध (जैसा किसी पर पट्टी बांधते हैं) कर आधे घंटे तक गुनगुने पानी की भाप दीजिये। एक महीने तक ऐस करने से निशान गायब होने लगेंगे।

3.एलोवेरा (Aloevera):-

एलोवेरा मुहासे हटाने का बहुत अच्छा इलाज है. एलोवेरा त्वचा सम्बन्धी सभी परेशानी को हटाने का रामबाण इलाज है। चाहे चेहरे पर कील, मुहांसे हो, या उनके दाग, काले घेरे या किसी भी प्रकार के निशान, अलोवेरा हर मर्ज की दवा है। इसे किसी भी रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसे लगाना बहुत ही आसान है। एलोवेरा के गुदे को निकाल कर इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे की झाइयाँ, कालेघेरे, दाग धब्बे एवं निशान कम होने लगते हैं और चेहरा और त्वचा चमकने लगते हैं। इसे शरीर के किसी भी अंग के निशान मिटाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है|

4.अंडे की सफेदी (Egg Whiteness) :-

अंडा प्रोटीन का सबसे अच्छा स्त्रोत है। अंडे की सफेदी में एमिनो एसिड और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। जिस भी जगह पर किसी प्रकार के निशान हो, उस पर अंडे की सफेदी को 15-20 मिनट तक (जब तक सुख ना जाये) लगा कर रखिये। फिर उसे ठन्डे पानी से धो लीजिए। इसके बाद उस पर नमी के लिए जैतून का या कोई और तेल लगाइए। ऐसा रोजाना कुछ दिनों तक करने पर स्ट्रेच मार्क्स हल्के होने लगेंगे।

5.हल्दी (Turmeric) :-

हल्दी एक आयुर्वेदिक औषधि है| हडली में पानी या तेल डालकर पेस्ट बनायें, इसे स्ट्रेच मार्क्स पर दिन में दो बार लगायें, ये जल्दी ही कम होने लगेंगें|

स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए बेस्ट तेल (Best oil to remove stretch marks)

बायो ऑयल क्या होता है (What is bio oil)

बायो ऑयल का उपयोग स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए किया जाता है बायो ऑयल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें लैवेंडर (Lavender) , रोजमेरी (Rosemary) और कैमोमाइल (Cammomile) जैसे ऑयल भी शामिल होते हैं।

बायो ऑयल के फायदे (Benefits of bio oil)

बायो ऑयल के फायदे जानने से पहले पाठक इस बात को भी ध्यान में रखें कि बायो ऑयल लेख में शामिल किसी भी समस्या का मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है। यह सिर्फ उन समस्या के प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में सहायक भूमिका निभा सकता है।

1. झुर्रियों को कम करने के लिए
2. मुंहासों और दाग-धब्बों से आराम दिलाए
3. स्ट्रेच मार्क्स कम करने के लिए
4. रंगत निखारने के लिए
5. ऑयली त्वचा के लिए लाभदायक
6. बालों के लिए लाभदायक

लाल और सफेद स्‍ट्रेच मार्क्‍स में फर्क क्‍या है?(What is the difference between red and white stretch marks)?

  • लाल स्ट्रेच मार्क्स(Red stretch marks) :- लाल रंग के स्ट्रेच मार्क्स अगर आपकी त्‍वचा पर है तो ये निशान ताजे है, जो नए नए आपके शरीर पर हुए है। यह केवल स्‍ट्रेच मार्क्‍स का शुरुआती स्‍तर है। इस तरह के निशान ब्‍लड वेसल्स को दिखाते हैं, इसलिए इनका रंग लाल होता है। इस स्तर पर, विभिन्न टॉपिकल क्रीम के माध्यम से कोलेजन को पुनर्स्थापित करके निशान तेजी से ठीक हो सकते हैं। यहां तक कि ‘पल्स डाय’ जैसे लेजर उपचार इन निशानों पर प्रभावी ढंग से काम करते हैं जो नई कोशिकाओं को बनाते हैं। फिर भी हम आपको कुछ नीचे लाल स्‍ट्रेच मार्क्‍स हटाने के घरेलू उपाय बताएंगे, जिनसे आपको कुछ राहत मिलेगी।
  • सफेद स्ट्रेच मार्क्स(White stretch marks) :- इन स्‍ट्रेच मार्क्‍स को शरीर में बने हुए कभी लम्‍बा समय हो जाता है तो ये सफेद रंग के हो जाते है, ‘माइक्रोडर्माब्रेसन’ जैसे उपचार, इन निशान के बनावट को सुधारने और पॉलिश करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यह उपचार कोलेजन को पुनर्स्थापित करने में सक्षम नहीं होगा। सफेद स्ट्रेच मार्क्स के लिए एक अन्य उपचार ‘एक्सीमर लेजर’ है, जो स्‍ट्रेच मार्क्‍स के रंग को पुनर्स्थापित करने में मदद करता है। दूसरे तरह के लेजर आधारित ट्रीटमेंट जैसे आईपीएल और फ्रैक्सेल इन स्‍ट्रेच मार्क्‍स की बनावट को सुधारने और रंग को फीका करने में मदद करते हैं। लेकिन इन सभी ट्रीटमेंट का रिजल्‍ट व्‍यक्ति की त्‍वचा पर और स्‍ट्रेच मार्क्‍स के बनावट पर निर्भर करता है|
  • क्रीम और मॉश्चराइजर (Cream and moisturizer):- ऐसी क्रीम और मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करें, जो त्वचा में खिंचाव या कसाव लाने में मदद करें। नए स्ट्रेच मार्क्‍स के लिए लोशन और क्रीम सर्वश्रेष्ठ हैं, लेकिन वे पुराने स्ट्रेच मार्क्‍स दूर करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, वे उतने असरदार नहीं हैं। रेटीनोइक अमल वाली क्रीम नए स्ट्रेच मार्क्‍स के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है।
  • नींबू का रस(Lemon juice):- नींबू का रस एक प्राकृतिक अमल है, जो स्ट्रेच मार्क्‍स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच मार्क्‍स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें।

स्ट्रेच मार्क्स हटाने के 4 बेस्ट क्रीम(4best creams to remove stretch marks)

आजकल बाजार में कई तरह के स्ट्रेच मार्क हटाने वाली क्रीम मिलती हैं। लेकिन उनमें से कुछ प्रभावी नहीं होते और पूरी तरह से स्ट्रेच मार्क को हटाने में मदद नहीं करते लेकिन कुछ उत्पाद ऐसे हैं जो नियमित रूप से उपयोग करने पर समय के साथ निशान को कम करते हैं। और शरीर से उन स्ट्रेच मार्क से छुटकारा पाने में मदद करते हैं।

1. मेडर्मा स्ट्रेच मार्क्स थेरेपी(Mederma Stretch Marks Therapy):-


स्ट्रेच मार्क्स के लिए क्रीम के रूप में कुछ ऐसा चुनना चाहते हैं, जो पूरी तरह सिर्फ खिंचाव के निशान ठीक करने का काम करती है| मेडर्मा स्ट्रेच मार्क्स थेरेपी मुख्य रूप से स्ट्रेच मार्क्स को ठीक करने का काम करती है। यह त्वचा को हाइड्रेट करने के साथ ही खिंचाव के निशान को हल्का करने में मदद कर सकती है।

2. पामर कोकोआ बटर फॉर्मूला मसाज क्रीम फॉर स्ट्रेच मार्क्स(Palmer Cocoa Butter Formula Massage Cream for Stretch Marks):-


पामर कोकोआ बटर फॉर्मूला मसाज क्रीम स्किन पर मौजूद स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने के साथ ही चेहरे की रंगत को निखारने का भी काम कर सकती है। साथ ही इसे डलनेस को दूर करने और त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए भी जाना जाता है।

3.ब्लू नेक्टर स्ट्रेच मार्क्स एंड स्कार बॉडी लोशन क्रीम विथ कोको बटर, शिया बटर एंड अपलिफ्टिंग रोज(Blue Nectar Stretch Marks and Scar Body Lotion Cream with Cocoa Butter, Shia Butter and Uplifting Rose):-


स्ट्रेच मार्क्स हटाने के लिए क्रीम के रूप में ब्लू नेक्टर को भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस स्ट्रेच मार्क्स क्रीम को बनाते समय हानिकारक रसायन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें कोको और शिया बटर के साथ ही अन्य 12 जड़ी-बूटी को शामिल किया गया है। शायद इसी वजह से स्ट्रेच मार्क्स हटाने की क्रीम के रूप में इसे प्रभावी माना जाता है।

4. नाम्या नेचुरल साइंस बॉडी टोनिंग / स्कल्पटिंग वंडर ऑयल (Namya Natural Science Body Toning / Sculpting Wonder Oil):-


यह एक मल्टीपर्पस ऑयल है। इस ऑयल की मदद से स्ट्रेच मार्क्स को कम करने के साथ ही बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे फाइन लाइन्स और झुर्रियों को भी कम किया जा सकता है। इस तेल का नॉन-ग्रीसी फॉर्मूला त्वचा को नरम और मुलायम बनाने का काम करता है। साथ ही डैमेज स्किन को भी रिपयेर कर सकता है। इस तेल को शरीर के किसी भी हिस्से में उपयोग किया जा सकता है।

Tagged : / /

वजन बढ़ाने के टिप्स (Weight gain tips)

तनाव आवश्यकता से अधिक बढ़ जाए तो इससे कोर्टिसोल का स्तर भी बढ़ जाता है। एक स्टडी के मुताबिक, कोर्टिसोल का उच्च स्तर व फैट मास का आपस में गहरा नाता है। कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन कई तरह की समस्याएं पैदा करने के साथ−साथ वजन भी बढ़ाने का काम करता है।

वजन कैसे बढ़ता है?(How does weight gain)?

कमजोर व दुबला पतला शरीर होने से ना सिर्फ पर्सनालिटी पर इसका खराब असर पड़ता है बल्कि कमजोर शरीर होने से बीमारियों से बचाव भी मुश्किल होता है | किसी दुर्घटना या बीमारी की वजह से यदि शरीर में रक्त की कमी हो जाये तो कमजोर व्यक्ति के लिए मुसीबत सामान्य व्यक्ति की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ जाती है इसलिए कमजोर व्यक्ति को अपना वजन बढ़ाने के लिए उपाय जरुर करने चाहिए | लेकिन वजन बढ़ाना और संतुलित तरीके से वजन बढ़ाना, दोनों बिलकुल अ‍लग-अलग बाते हैं। अगर आपका वजन कम है और आप उसे ठीक तरह से बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको बिना किसी सप्लीमेंट के धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीके से अपने वजन में वृद्धि करनी चाहिए | इसके लिए सबसे जरुरी बातें है- पोष्टिक आहार खाना, मजबूत पाचन शक्ति, कब्ज जैसी पेट की बीमारियाँ ना होना, थोडा बहुत व्यायाम और भरपूर नींद इसके अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट की अधिकता वाला भोजन अधिक करें क्योंकि अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट शरीर में जमा होने लगता है जिससे वजन बढ़ाने में सहायता मिलती है |

वजन बढ़ाने के घरेलू उपाय(Home remedy for weight gain)

  • वजन बढ़ाने के लिए प्रोटीन का सेवन जरूरी है इसलिए अपने आहार में चिकन, मछली, अंडा, दूध, बादाम व मूंगफली आदि को शामिल करें। इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट भी वजन बढ़ाने में मददगार होता है इसके लिए आप इन सब चीजो का सेवन करें पास्ता, आलू, ब्राउन राइस, ओटमील आदि।
  • वजन बढ़ाने के लिए सुबह-सुबह ‌सूखे मेवे को दूध में पीसकर उबाल लें और इसे पिएं। खासतौर पर बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गर्म दूध पीने से भी वजन तेजी से बढ़ता है। किशमिश खाने से वजन तेजी से बढ़ता है।
  • वजन बढ़ाने के लिए हरे आवलों को कद्दूकस करके अथवा कुचलकर कपड़े से छानकर आवलों का रस निकाल लें। इसे 15 ग्राम (तीन चाय वाले चम्मच भर) में समान भाग में शहद मिलाकर प्रात: समय व्यायाम के बाद पी लें। इस प्रयोग के 2 घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं-पिएं। यह प्रयोग निरंतर 2 माह कर लेने से कायाकल्प होकर दुबले-पतले और रोगी व्यक्ति मोटे-ताजे तथा स्वस्थ हो जाते हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए सुबह-शाम भैंस के दूध में छुआरा मिलाकर पीने से भी कमजोर व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ता है।
  • 200 ग्राम पका केला खाकर ऊपर से 200 ग्राम दूध पीने से शरीर धीरे-धीरे वजन बढ़ाने में सहायता मिलती है तथा व्यक्ति मोटा होने लगता है।
  • वजन बढ़ाने के लिए के लिए दूध हमेशा फुल क्रीम वाला ही पियें |
  • घी और शक्कर मिलाकर खाने से मोटापा बढ़ता है तथा दुबलापन दूर होता है।
  • वजन बढ़ाने के लिए रोजाना दूध में शहद मिला कर पिएं।
  • सुबह के भोजन में चावल व मक्का की चपातियां खाने से भी शरीर मोटा होता है।
  • नारियल की गिरी को मिश्री के साथ चबाने से दुबलापन दूर होता है।
  • अनार, चुकंदर, टमाटर का रस रक्त में आयरन का स्तर बढ़ाता है इसलिए इन सब जूस का सेवन जरुर करें |
  • वजन बढ़ाने के लिए छुआरा भी बहुत काम की चीज है यह शरीर का नव रक्त का निर्माण करता है, ताकत प्रदान करता है। तथा शरीर का दुबलापन भी दूर करता है।
  • सुबह के भोजन में छिलके सहित काले उड़द की दाल खाने से वजन बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • मौसम के मुताबिक फलों के सेवन करें ।
  • प्रतिदिन सुबह खुली हवा में टहलने से शरीर मजबूत होता है।
  • किसी भी तरह के तनाव को भूलकर भी न पालें, क्योंकि तनाव दुबले शरीर को मोटा होने में बाधा पहुंचाता है।
  • सर्दियों में मक्के की चपातियां खाने से पतला शरीर धीरे-धीरे मोटा होने लगता है।
  • मोटा होने के लिए आप पीनट बटर, चीस, पनीर, घी, ब्रेड, रेड मीट, केक, मिठाइयाँ, चोकलेट,
  • गोंद के लड्डू दूध के साथ आदि का सेवन करें लेकिन यदि आपकी उम्र 20-25 साल से अधिक है तो इनका कम मात्रा में ही सेवन करें नहीं तो कई दूसरी बीमारियाँ आपको घेर सकती है |
  • रोजाना दो सेब चबा-चबाकर खाने से भूख खुलकर लगती है तथा खाना खाने की क्षमता बढ़ती है। इससे भी शरीर का दुबलापन दूर होने लगता है।

हर्बालाइफ व्यक्तिगत प्रोटीन पाउडर (Herbalife Personalized Protein Powder)

इस प्रतिस्पर्धा के दौर में कई तरह के वजन बढ़ाने के लिए बेस्ट प्रोटीन पाउडर बाजार में उपलब्ध हैं|जो वजन बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। ओएन सीरियस मास गेनर पाउडर मांसपेशियों को लाभ पहुंचाता है और वजन बढ़ाने में मदद करता है। यह प्रोटीन पाउडर बाजार में केला, वेनिला, चॉकलेट और चॉकलेट पीनट बटर जैसे विभिन्न फ्लेवर में आता है। यह मास गेनर एक नॉन-शाकाहारी उच्च कैलोरी वजन बढ़ाने वाला पाउडर है, जिसमें कार्ब प्रोटीन का अनुपात 5:1 है। जब इसको पानी के साथ मिलाया जाता है तो यह प्रति सर्विंग में 1250 कैलोरी प्रदान करता है और यदि इसे कम वसा वाले दूध के साथ एक शेक के तौर पर बनाया जाता है तो इसमें कैलोरी की मात्रा 1640 हो जाती है। यह 50 ग्राम मिक्स्ड प्रोटीन और 250 ग्राम बिना चीनी का कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है। इसमें कई आवश्यक खनिज और विटामिन के साथ ग्लूटामिक एसिड, ग्लूटामाइन और क्रिएटिन पाया जाता हैं। यह प्रोटीन पाउडर एक शाकाहारी उत्पाद है, जो प्लांट बेस्ड सोया, गेहूं और पीले मटर से तैयार होता है और आपके शरीर का वजन बढ़ाने में मदद करता है ।

  • बस अपने पसंदीदा फॉर्मूला 1 शेक के साथ व्यक्तिगत प्रोटीन पाउडर के 2 से 3 स्कूप्स को मिलाएं|
  • कैल्शियम के मामले में, चीनी प्रोटीन विटामिन और खनिज पोषण बच्चों के पेय मिश्रण है|

हिमालया वेलनेस अयुरस्लीम कैप्सूल वेट मैनेजमेंट (Himalaya Wellness AyurSlim Capsules Weight Management)

गार्सिनोनिया को शरीर की वसा को स्टोर करने की क्षमता को धीमा करने के लिए जाना जाता है, संभावित रूप से खाद्य पदार्थों से अधिक वसा को संग्रहीत किए बिना शरीर से गुजरने में सक्षम बनाता है। यह आपका एक चौथाई पेट भरता है और कम भूख लगने का अहसास कराता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी है।

  • हिमालय ड्रग कंपनी है|
  • मोटापा, हाइपरलिपिडिमिया और शुगर के लिए तरसना|
  • भोजन के बाद या अपने चिकित्सक द्वारा निर्देशित दो गोली प्रतिदिन दो बार|

वजन बढ़ाने के लिए भूख लगना भी है जरुरी(Hunger is also necessary to gain weight)

  • वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले भूख का लगना और खाया हुआ भोजन पचना सबसे जरुर बात है इसलिए भोजन के एक घंटा पहले पंचसकार चूर्ण को एक चम्मच गरम पानी के साथ लेने से भूख खुलकर लगती है ।
  • भोजन में पतले एवं हलके व्यंजनों का प्रयोग करने से खाया हुआ जल्दी पच जाता है, जिससे जल्दी ही भूख लग जाती है।
  • खाना खाने के बाद अजवायन का चूर्ण थोड़े से गुड़ के साथ खाकर गुनगुना पानी पीने से खाया हुआ पचेगा, भूख लगेगी और खाने में रुचि पैदा होगी।
  • भोजन के बाद सुबह-शाम दो-दो चम्मच पंचासव (Panchasav) सीरप लें, इससे खाया-पिया जल्दी पच जाएगा और खाने के प्रति रुचि बढ़ेगी ।
  • पानी अधिक मात्रा में पियें और थोड़ी बहुत एक्सरसाइज जरुर करें |
  • इन उपायों से आप एक महीने म एक से दो किलो तक वजन बढ़ा सकते है |

वजन बढ़ाने के लिए योग कैसे मदद करता है?(How does yoga help to gain weight)?

योग को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कुंजी माना गया है। योग शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है और आंतरिक रूप से शरीर को शुद्ध करता है। शरीर से जुड़ी किसी भी तकलीफ का इलाज योग द्वारा संभव है, लेकिन इसके लिए आपको नियमित योगाभ्यास करना होगा और खानपान पर नियंत्रण करना होगा।

योग से न सिर्फ मोटापा कम किया जा सकता है, बल्कि वजन को बढ़ाया भी जा सकता है। अगर आप अंडरवेट का शिकार हैं, तो आप योगासन की मदद ले सकते हैं। योग की कई ऐसी क्रियाएं हैं, जो जल्द वजन बढ़ाने का काम करेंगी। ये यौगीक क्रियाएं आपकी भूख को बढ़ाएंगी, जिससे बॉडी मास भी बढ़ेगा। हम कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में बताएंगे, जो आपके कम वजन को ठीक करने का काम करेंगे |

वजन बढ़ाने के लिए योगासन (Yogasana for weight gain)

1.भुजंगासन (Bhujangasana) :-

अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए आप भुजंगासन कर सकते हैं। यह आसन सीधा पाचन तंत्र पर काम करता है, जिससे भूख में सुधार होता है। इसके अलावा, यह आसन करने से मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और सांस लेने में सुधार होता है।

2. वज्रासन (Vajrasana) :-

यह एकमात्र ऐसा आसन है, जिसका अभ्यास भोजन के तुरंत बाद किया जा सकता है। यह आसन सीधा पाचन तंत्र पर काम करता है और मेटाबॉलिजम को नियंत्रित करने का काम करता है। इसके अलावा, यह आसन मन भी शांत करता है। अंडरवेट की समस्या को ठीक करने के लिए आप वज्रासन का अभ्यास कर सकते हैं।

3. सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) :-

अंडरवेट की समस्या से निजात पाने के लिए आप सूर्य नमस्कार का अभ्यास कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार को आसनों का समूह कहा जाता है, जिसमें 12 मुद्राएं शामिल होती हैं और इन्हें आपको एक के बाद एक करना होता है। यह सभी आसन मिलकर पाचन तंत्र से लेकर हृदय स्वास्थ्य, तंत्रिका तंत्र व मांसपेशियों को स्वस्थ रखने का काम करते हैं। घटते वजन को संतुलित करने के लिए आप सूर्य नमस्कार का सहारा ले सकते हैं। यह आसन इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम भी करता है, जिससे आपकी भूख न लगने की आदत में सुधार होगा और आपका बीएमआई बढ़ेगा।

4.सर्वांगासन (Sarvangasan) :-

सर्वांगासन रक्त और ऑक्सीजन के संचालन में सुधार करने के लिए प्रभावी आसन है। रक्त का संचालन शरीर में पोषक तत्वों को बढ़ावा देता है, जिससे शरीर के सभी अंग पोषित होते हैं। शरीर में ऊर्जा और मजबूती के लिए आप इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से कर सकते हैं।

Tagged : /

नारियल पानी के लाभ (Benefits of coconut water )

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में नारियल पानी काफी मदद करता है. नारियल पानी में मौजूद विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रैशर को कंट्रोल रखता है. बढ़ती गर्मी की वजह से आपका एनर्जी लेवल काफी कम हो जाता है. इसमें इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है|

नारियल पानी क्या है?(what is coconut water)

नारियल पानी खून से शुगर लेवल को कम करता है.इंसुलिन की कमी की वजह से डायबिटीज की समस्या होती है. नारियल का पानी इंसुलिन को बढ़ाता है|नारियल में विटामिन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं|

नारियल पानी पीने का सही समय(The right time to drink coconut water)

नारियल पानी किसी भी समय पिया जा सकता है, लेकिन सुबह के वक्त खाली पेट नारियल पानी पीना सबसे उपयुक्त माना जाता है।सही समय पर पीना यकीनन इसके फायदों को दोगुना कर देता है|नारियल पानी पीने से शरीर को ऊर्जा मिलती है,लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या रहती है वे नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं. मिठास और तासीर ठंडी होने के कारण ये घबराहट को खत्म करता है|
गर्भावस्था की पहली तिमाही में नारियल पानी के सेवन से सुबह के समय जी मिचलाना, कब्ज और थकान दूर करने में तो मदद मिलती है, साथ ही यह प्रतिरोधक क्षमता सुधारने और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में भी मदद करता है. गर्भावस्था में ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेना भावी मां और बच्चे दोनों के लिए ही फायदेमंद होता है|

कब्ज और जी जलने की समस्या दूर करता है(Relieves constipation and burning problems)

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव जिसकी वजह से जी जलने, कब्ज और अपच की समस्या हो जाती है। इस दौरान नारियल पानी का सेवन फायदेमंद होता है। नारियल के पानी में डाइट्री फाइबर होते हैं जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, पीएच को नियमित करने में मदद करते हैं।

त्वचा से सम्बंधित समस्या को दूर करता है(Relieves skin related problems)

ओहरी के अनुसार त्वचा को साफ करने में नारियल पानी बेहद उपयोगी है। यह मुंहासों और झाइंयों को भी दूर करने में मददगार होता है। नारियल पानी नेचुरल मॉश्चराइजर भी है। – नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा की मात्रा नहीं है।
बालों से सम्बंधित समस्या को दूर करता है(Removes hair related problems)
बालों को मजबूती मिलती है जिससे उनका झड़ना कम होता है। इसके अलावा दोमुंहे बालों की प्रॉब्लम भी दूर होती है। नारियल के पानी में ऐंटि फंगल और ऐंटि बैक्टीरियल तत्व मौजूद होते हैं। इसे सिर की जड़ों में लगाने और वॉश करने से डैंड्रफ, खुजली जैसी कई समस्याएं दूर होती हैं।

नारियल पानी पीने के ये 7 फायदे (These 7 benefits of drinking coconut water)

1. नारियल पानी पीते रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती है. शरीर में पानी की कमी हो जाने पर या फिर शरीर की तरलता कम हो जाने पर, डायरिया हो जाने पर, उल्टी होने पर या दस्त होने पर नारियल का पानी पीना फायदेमंद रहता है. इससे पानी की कमी तो पूरी होती ही है साथ ही जरूरी लवणों की मात्रा भी संतुलित बनी रहती है|
2. हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी नारियल के पानी का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें मौजूद विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं. साथ ही ये हाइपरटेंशन को भी नियंत्रित करने में सहायक होता है|
3. कोलेस्ट्रॉल और फैट-फ्री होने की वजह से ये दिल के लिए बहुत अच्छा होता है. इसके साथ ही इसका एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी सर्कुलेशन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है|
4. हैंगओवर से छुटकारा पाने के लिए भी नारियल का पानी एक अच्छा उपाय है|
5. अगर आप वजन घटाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं तो एकबार नारियल पानी का भी इस्तेमाल करके देखिए|
6. सिर दर्द से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं डिहाइड्रेशन की वजह से ही होती हैं. ऐसे में नारियल पानी पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स पहुंचाने का का काम करता है, जिससे हाइड्रेशन का स्तर सुधर जाता है|
7. बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए भी नारियल पानी का प्रयोग किया जाता है. इसमें मौजूद cytokinins कोशिकाओं और ऊतकों पर सकारात्मक प्रभाव डालकर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद करता है|

गर्मी में नारियल पानी पीने के फायदे (Benefits of drinking coconut water in summer)

गर्मी के मौसम आते ही कई तरह की बीमारियां भी आती हैं। इसके अलावा दिन बहुत बोझिल लगते हैं और थकान भी बहुत महसूस होती है। ऐसे में नारियल पानी हमारे सेहत के लिए रामबाण साबित होता है। ढेर सारे मिनरल्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर नारियल पानी पीकर गर्मी के मौसम में ताजगी का एहसास कराता है। इसके साथ ही नारियल पानी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स और पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखते हैं। नारियल पानी में विटामिन सी, मैग्नीशियम, मैग्नीज, पोटैशियम, सोडियम और कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में होता है। नारियल पानी में कैलोरी की मात्रा कम होने से वजन घटाने में मदद करता है।

रोगों से सम्बंधित समस्या को दूर करता है (Removes problems related to diseases)

1. किडनी की पथरी में फायदेमंद :- जिसको किडनी में पथरी हो जाती है। उसको नारियल पानी बहुत फायदा करता है। कैल्शियम, ऑक्सलेट और अन्य कई तत्वों का मिलकर क्रिस्टल बनने के कारण किडनी में पथरी बन जाती है। नारियल पानी इन क्रिस्टल्स को गलाता है और पथरी को जल्दी बाहर निकालने में मदद करता है।
2.डायबीटीज में मददगार :- नारियल पानी ब्लड में शुगर का लेवल कम करता है। डायबीटीज की मुख्य वजह शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी है। नारियल पानी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर में इंसुलिन के सर्कुलेशन में मदद करते हैं। डायबीटीज के मरीज को नारियल पानी जरूर पीना चाहिए। वहीं, इसमें मौजूद मैग्नीशियम तत्व टाइप-2 डायबीटीज और प्री-डायबीटीज में फायदेमंद होता है।
3.एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर :- शरीर में जब ज्यादा फ्री रेडिकल्स होने से ये सेल्स को डैमेज करने लगते हैं। इससे दिल और किडनी से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नारियल पानी पीने से इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
4.बुखार में आराम :- गर्मी में बुखार आ जाए तो नारियल पानी पीना चाहिए। इससे बुखार कम होता ही है, इसके साथ शरीर में आई कमजोरी और पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करता है। नारियल पानी हल्का होने के चलते शरीर इसे जल्दी अवशोषित कर लेता है।
5.उल्टी दस्‍त में फायदा :- गर्मी के मौसम में दस्त, उल्टी होना आम बात होती है, क्योंकि इस मौसम में पाचन संबंधी समस्या अधिक होती है। इससे शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है। उल्दी, दस्त होने के पीछे शरीर में पानी की कमी होना सबसे बड़ा कारण होता है। ऐसे में नारियल पानी सबसे बेहतर विकल्प है। वहीं, नारियल पानी पीने से पथरी भी टूटकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
6. मुंहासों से छुटकारा :- गर्मी में चेहरे पर मुंहासे की समस्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही टैनिंग और सनबर्न की समस्या भी होने लगती है। ऐसे में नारियल पानी बहुत फायदा करता है। रोजना दो बार चेहरे पर नारियल पानी लगाने से स्किन साफ हो जाती है।

Tagged : /

मुंहासे की समस्या (Acne problem)

मुंहासे निकलने की समस्या बेहद आम हो गई है। खासकर जिनकी त्वचा ऑयली यानी तैलीय है, उन्हें पिंपल ज्यादा परेशान करते हैं। पिंपल न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती को कम करता है, बल्कि कई बार असहनीय दर्द भी देते हैं।

मुँहासे क्या है?(What is acne)?

चिकित्सा शर्तों में एक्ने वाल्गारिस है जो मुख्य रूप से तेल ग्रंथियों से संबंधित होता है, यह बालों के रोम के आधार पर पाए जाते हैं। किशोरावस्था में यह सबसे आम होते है जब ये ग्रंथियां काम करना शुरू कर देती हैं। दोनों लिंगों के एड्रेनल ग्रंथियों द्वारा गुप्त पुरुष हार्मोन से प्राप्त उत्तेजना के कारण ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं।

मुँहासे आमतौर पर चेहरे, गर्दन, कंधे, पीठ और मनुष्यों में छाती पर पाए जाते हैं। एक त्वचा बनाने के लिए त्वचा कोशिकाओं, तेल सेबम और बाल एक साथ चिपकते हैं। समय में प्लग बैक्टीरिया की उपस्थिति के कारण संक्रमित हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप सूजन हो जाती है। प्लग टूटना शुरू होता है और एक मुँहासे विकसित होता है।

मुँहासे का कारण क्या है?(What Causes Acne)?

मुँहासे के बारे में ध्यान देने योग्य एक दिलचस्प बात यह है कि यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि इसका कारण क्या है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हार्मोन एंड्रोजन है जो युवावस्था के दौरान बढ़ता है जो बदले में त्वचा ग्रंथियों के विकास की ओर जाता है जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक होता है। यह छिद्रों की सेलुलर दीवार को तोड़ देता है जो जीवाणु विकास को सक्षम बनाता है।
कुछ अध्ययनों के मुताबिक आनुवंशिक प्रवृत्ति का एक तत्व भी है। लिथियम और एंड्रोजन के साथ दवा भी स्थिति का कारण बन सकती है। चीकनाहट भी एक और कारण हैं। प्रेगनेंसी से संबंधित हार्मोनल परिवर्तन से भी मुँहासे हो सकते है।

मुँहासे के विभिन्न प्रकार क्या हैं?(What are the different types of acne)?

  • व्हाइटहेड्स :- ये बहुत छोटे होते हैं और आमतौर पर त्वचा के नीचे मौजूद होते हैं।
  • ब्लैकहेड :- ब्लैकहेड स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वे रंग में काले और त्वचा की सतह पर अपनी उपस्थिति बनाते हैं। यह एक गलतफहमी है कि ब्लैकहेड गंदगी के कारण होते हैं और आपके चेहरे को गंदा करने के साथ स्क्रब करते हैं।
  • पैप्युल्स :- पैप्युल्स त्वचा की सतह पर आमतौर पर गुलाबी रंग में छोटे बाधा हैं।
  • पस्ट्यूल :- आसानी से त्वचा की सतह पर पस्ट्यूल की पहचान की जा सकती है। उनके पास पस से भरा शीर्ष वाला लाल आधार है।
  • नोबल्स :- त्वचा की सतह पर नोबुल भी खड़े हो जाते हैं। वे ठोस, बड़े मुँहासे होते हैं। वे अक्सर दर्द के साथ होते हैं और त्वचा की गहराई में एम्बेडेड होते हैं।
  • सीस्ट :- ये त्वचा की सतह पर दिखाई दे रहे हैं। वे आमतौर पर दर्दनाक होते हैं और पस भर जाते हैं। वे निशान पैदा करने के लिए प्रवण हैं।

मुंहासे होने के कारण (Due to acne)

  • अनुवांशिकता :– पिंपल की समस्या अनुवांशिक हो सकती है। अगर परिवार में किसी को बार-बार पिंपल होते हैं, तो अन्य व्यक्तियों को भी मुंहासे होने की आशंका बढ़ जाती है|
  • हार्मोनल बदलाव :– बढ़ती उम्र के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से भी पिंपल होते हैं। खासकर महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण पिंपल हो सकते हैं|
  • दवाओं के कारण :– कभी-कभी तनाव, मिर्गी या मानसिक बीमारी से जुड़ी कुछ दवाओं के सेवन से भी पिंपल निकल सकते हैं|
  • कॉस्मेटिक का ज्यादा इस्तेमाल :– कॉस्मेटिक यानी सौंदर्य प्रसाधनों का अधिक इस्तेमाल करने से भी पिंपल निकल आते हैं। कई बार महिलाएं पूरे दिन मेकअप में रहती हैं और रात को ठीक से मेकअप नहीं उतारती, इस वजह से भी पिंपल हो सकते हैं।
  • खानपान से जुड़ी आदतें :– जर्नल ऑफ द एकेडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की ओर से प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भोजन में ट्रांस फैट, दूध और मछली पिंपल बढ़ने की वजह बन सकते हैं|
  • तनाव :– तनाव में रहने से भी पिंपल्स हो सकते हैं। तनाव की वजह से शरीर में अंदरूनी बदलाव होते हैं, जिस कारण पिंपल हो सकता है। साथ ही स्ट्रेस पिंपल को गंभीर भी काम कर सकता है|

निर्मित में ब्रश के साथ वाह कार्बनिक एप्पल साइडर सिरका फोमिंग फेस वॉश(WOW Organic Apple Cider Vinegar Foaming Face Wash with Built-In Brush)

वाह कार्बनिक सेब साइडर सिरका फोमिंग फेस वॉश इन-बिल्ट फेस ब्रश से अनजाने, शुद्ध और शुद्ध करने में मदद करता है। अपने चेहरे को हर दिन साफ, स्पष्ट और चमकता हुआ छोड़ दें|
यह फोमिंग फेस वॉश बॉटल सिलिकॉन फेस ब्रश से लैस है जो पोर्स की गहरी सफाई में मदद करता है।

  •  चकत्ते या पॉपिंग से बचने के लिए मुँहासे प्रवण त्वचा पर धीरे से ब्रश का उपयोग करें|
  • यह कार्बनिक एप्पल साइडर सिरका, मुसब्बर वेरा निकालने और विटामिन बी 5 और ई के साथ समृद्ध है जो आपकी त्वचा को अशुद्धियों को फैलाने में मदद करता है और आपकी त्वचा को स्वस्थ और युवा बनाता है।आपकी त्वचा को नुकसान के खिलाफ मदद करता है|और चिकनी, मुलायम और कोमल त्वचा के परिणामस्वरूप होता है
  • फेस वाश को शुद्ध कार्बनिक प्रमाणित हिमालयन एसीवी के साथ तैयार किया जाता है।
  • सूत्रीकरण बायोएक्टिव में समृद्ध है और पैराबेन, सिलिकोन, सुपहेट्स और रंग से मुक्त है|

मुंहासे से बचाव के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं(What to eat and what not to eat to prevent acne)

गलत खान-पान की वजह से भी मुंहासे होते हैं। इसी वजह से पिम्पल हटाने के उपाय के साथ ही खान-पान की आदतों में सुधार भी मुंहासों से बचाव के लिए जरूरी है।

  • क्या खाएं:- मुंहासों से बचे रहने के लिए इन खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में जगह दी जा सकती है | जैसे –  फल , सब्जियां , साबूत अनाज , कम रिफाइंड चीजें
  • क्या न खाएं :- उच्च ग्लाइसेमिक भोजन जैसे – हाई शुगर युक्त ड्रिंक्स , चॉकलेट
    रिफाइन्सड चीजें , प्रोसेसड प्रोडक्ट|

मुंहासे से बचाव (Acne prevention)

1.चेहरे को नियमित धोएं :– अपने चेहरे को हर रोज दो बार धोएं। इससे चेहरे पर जमने वाली धूल-मिट्टी साफ होगी और चेहरे पर तेल नहीं जमेगा।
2.समय–समय पर चेहरा एक्सफोलिएट करें :– त्वचा को एक्सफोलिएट करने से गहराई से चेहरे की सफाई होती है। साथ ही छिद्र भी अच्छे से साफ होते हैं।
3.मेकअप ब्रश को रोज धोएं :– अपने मेकअप ब्रश का इस्तेमाल करने के बाद उसे अच्छी तरह से धोएं। इससे ब्रश पर बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।
4.खूब पानी पिएं :– हर रोज कम-से-कम आठ गिलास पानी जरूर पिएं। इससे शरीर की अशुद्धियां बाहर निकल जाएंगी।
5.स्ट्रेस न लें :– तनाव की वजह से मुंहासे होते हैं। इसी वजह से स्ट्रेस व तनाव न लें।
6.चेहरे को न छुएं :– बार-बार चेहरे को छूने की आदत छोड़ दें। हाथों पर मौजूद बैक्टीरिया चेहरे पर पिंपल की वजह बन सकता है।
7.मेकअप को ध्यान से चुनें :– कुछ मेकअप चेहरे के रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देते हैं। इसी वजह से जरूरी है कि नॉन-कॉमेडोजेनिक और नॉन-एक्नेजेनिक मेकअप का ही इस्तेमाल करें, यह चेहरे के रोम छिद्रों को ब्लॉक नहीं करते।
8.खानपान की सही आदत डालें :– बुरी खानपान की आदत की वजह से भी मुंहासे हो सकते हैं। इसलिए, पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें|

मुंहासे हटाने के घरेलू उपाय (Home remedies for acne)

1. एलोवेरा (Aloe vera)

पिंपल हटाने का घरेलू उपाय एलोवेरा जेल हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लामेट्री गुण बैक्टीरिया की वजह से होने वाले पिंपल को पनपने से रोकने के साथ ही इससे संबंधित सूजन को कम कर सकते हैं। साथ ही एलोवेरा में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण भी बैक्टीरिया को त्वचा पर पनपने से रोक सकता है। एलोवेरा को लेकर एनसीबीआई में मौजूद एक शोध में यह भी कहा गया है कि इसमें एंटी-एक्ने गुण भी होते हैं, जो मुंहासों से बचाव कर सकते हैं ।

इस्तेमाल कैसे करें:- एलोवेरा के पत्ते से ताजा जेल निकालें और सीधे पिम्पल प्रभावित हिस्से पर लगा लें। करीब 10-20 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें।

2.ग्रीन टी (Green tea)

बार-बार मन में उठने वाले सवाल पिम्पल कैसे हटाएं का जवाब ग्रीन टी हो सकता है। जी हां, इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स मुंहासे के घरेलू उपचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह पॉलीफेनोल्स सीबम (त्वचा ग्रंथियों से निकलने वाला तैलीय पदार्थ) के स्राव को कम कर सकता है। इससे मुंहासे ठीक हो सकते हैं या इनसे कुछ हद तक राहत मिल सकती है (11)। इसके अलावा, ग्रीन टी में एंटी-माइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो मुंहासे से लड़ने में सहायता कर सकते हैं (12)। इसी वजह से ग्रीन टी को पिम्पल हटाने का तरीका माना जाता है।

इस्तेमाल कैसे करें:- ग्रीन टी का रोज सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा, ग्रीन टी बैग्स को उबालकर, ठंडा करने के बाद चेहरे पर भी लगा सकते हैं।

3.नारियल का तेल (coconut oil)

नारियल के तेल में जीवाणुरोधी यौगिक के साथ ही विटामिन-ई होता है। इसी वजह से नारियल के तेल का इस्तेमाल पिम्पल हटाने के उपाय और इसकी वजह से चेहरे में पड़ने वाले धब्बों के उपचार के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा, नारियल तेल त्वचा को मॉस्चराइज करके नरम रखने के साथ ही स्किन इंफेक्शन से बचाने में भी मदद कर सकता है।

इस्तेमाल कैसे करें :- पिंपल हटाने के घरेलू नुस्खे के रूप नारियल तेल का इस्तेमाल करने के लिए पहले इसकी कुछ बूंदों में थोड़ा सा शहद मिलाएं। फिर इसे अच्छे से फेंटकर चेहरे पर लगा लें। कुछ देर बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।

4. शहद और दालचीनी (Honey and Cinnamon)

शहद और दालचीनी के पाउडर भी पिंपल हटाने का घरेलू उपाय हो सकता है। कहा जाता है कि यह पिंपल को कम कर सकता है । दरअसल, दालचीनी और शहद एक्ने के बैक्टीरिया से लड़कर पिम्पल ट्रीटमेंट में मदद कर सकते हैं। दोनों शहद और दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। साथ ही दालचीनी में मौजूद सिनामलडिहाइड केमिकल कंपाउंड में एंटीइंफ्लामेटरी गुण भी होते हैं, जो पिंपल का उपचार करने में लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा, एंटीइंफ्लामेटरी गुण एक्ने की वजह से चेहरे में आने वाली रेडनेस को कम करने का काम कर सकता है।

इस्तेमाल कैसे करें :

  • तीन चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट तैयार करें।
  • अब इस पेस्ट को अच्छी तरह से मुंहासे प्रभावित हिस्सों पर लगाएं।
  • सोने से पहले पेस्ट लगाने के परिणाम प्रभावी हो सकते हैं।
  • रातभर इसे चेहरे में लगा रहने दें और सुबह गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।
  • दो हफ्तों तक इसे रोजाना दोहराया जा सकता है|

5. लहसुन (Garlic)

लहसुन को भी पिम्पल हटाने का तरीका माना जाता है। इसमें एलिसिन (Allicin) होता है, जो एंटीबैक्टीरियल की तरह काम करता है। यह त्वचा को बैक्टीरिया से मुक्त रखने के साथ ही इन्हें पनपने से रोकने का काम कर सकता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। ये गुण मिलकर मुंहासे को कम करने में लाभदायक हो सकते है। इसके हाइड्रोक्लोरिक अर्क से एंटी-एक्ने जेल भी बनाया जाता है।

इस्तेमाल कैसे करें:

  • आवश्यकतानुसार लहसुन का पेस्ट बनाकर तैयार करें।
  • अब इसमें थोड़ा सा शहद और पानी की कुछ बूंदें डालकर चेहरे पर लगा लें।
  • मिश्रण लगाने के बाद जब सूख जाए तो त्वचा को धो लें।

6. हल्दी (Turmeric)

हल्दी का उपयोग भी पिम्पल हटाने का तरीका हो सकता है। इसके एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल और हीलिंग गुण की वजह से इसे पिंपल के लक्षण कम करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है (28)। साथ ही हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ ही एंटीमाइक्रोबियल गुण प्रदर्शित करता है। ये गुण मिलकर पिंपल व मुंहासों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं।

इस्तेमाल कैसे करें:

  • चुटकी भर हल्दी में शहद मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें।
  • अब इसे चेहरे पर 20 मिनट तक लगा रहने दें।
  • इसके बाद चेहरे को धो लें।

7. सेंधा नमक (Rock Salt)

पिंपल हटाने का आसान तरीका सेंधा नमक भी है। इसमें मौजूद मैग्निशियम हार्मोन्स को बैलेंस करके एक्ने के लक्षण को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह स्किन में मौजूद डेड सेल्स को साफ करके त्वचा को स्वस्थ और मुलायम बनाने में मदद कर सकता है।

इस्तेमाल कैसे करें:

  • पानी से भरे टब में सेंधा नमक डालकर एक्ने प्रभावित हिस्से को पानी में भिगोएं।
  • एक रूई को सेंधा नमक के पानी में डूबोकर मुंहासों के ऊपर रख दें।
  • करीब 20 से 30 मिनट बाद तौलिए से त्वचा को पोंछ कर ऐसे ही छोड़ दें।

8.नींबू (lemon)

पिम्पल ट्रीटमेंट के लिए कई अन्य घरेलू पदार्थों की तरह ही नींबू का उपयोग भी किया जा सकता है। दरअसल, इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड जीवाणुरोधी गतिविधि को प्रदर्शित करते हैं। यही वजह है कि ये त्वचा में बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते, जिससे एक्ने में राहत मिल सकती है। इसके अलावा, नींबू में मौजूद सिट्रस एसिड भी प्रोपिओनी बैक्टीरियम एक्न(Propionibacteriumacnes) को बढ़ने नहीं देता । इसी वजह से नींबू को पिंपल के घरेलू उपाय के रूप में जाना जाता है।

इस्तेमाल कैसे करें:

  • आधे नींबू का रस निचोड़कर एक कटोरी में निकाल लें।
  • कुछ बूंदें पानी की डालकर इसे अच्छे से मिक्स करें।
  • अब पानी और नींबू के रस के मिश्रण को रूई की मदद से मुंहासों पर लगाएं।
  • करीब 30 मिनट बाद चेहरे को धो लें।

9. नीम (Azadirachta indica)

पिंपल हटाने के घरेलू नुस्खे के तौर पर नीम का इस्तेमाल काफी प्रचलित है। नीम की पत्तियों में एंटीइंफ्लामेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं (34)। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध में बताया है कि नीम के इथेनॉल अर्क से एंटी-एक्ने पैक तैयार किया जा सकता है। यह पैक बनाते समय नीम के साथ तुलसी, ग्रीन टी और कई अन्य सामग्रियों का भी इस्तेमाल किया गया।

इस्तेमाल कैसे करें:

  • नीम की कुछ पत्तियों को पीसकर एक्ने पर लगा सकते हैं।
  • इसके अलावा, नीम को पानी में उबालकर उसके ठंडे काढे से चेहरा धो सकते हैं।
  • नीम के साथ ही तुलसी और ग्रीन टी को एक साथ पिसकर भी इस लेप को चेहरे पर लगाया जा सकता है।
Tagged : / /

फंगल इन्फेक्शन की समस्या(Fungal infection problem)

फंगल इन्फेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जैसे उंगलियों के बीच में, सिर पर, हाथों पर, बालों में या शरीर के अन्य भागों में। यह संक्रामक होता है और आसानी से संक्रमित वस्तु या व्यक्ति के जरिए फैल सकता है।

फंगल इन्फेक्शन क्या है?(What is fungal infection)?

फंगल इन्फेक्शन एक प्रकार का संक्रमण है, जो तब होता है जब शरीर के किसी भाग पर फंगस आक्रमण करता है। यह संक्रमण आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर कर सकता है|
फंगल इन्फेक्शन एक छोटे-से दाद से लेकर जानलेवा संक्रमण जितना बड़ा हो सकता है|
यह आपके शरीर पर, बालों में, नाखून पर, गुप्तागों, मुंह या गले पर कहीं भी हो सकता है|

फंगल इन्फेक्शन के लक्षण(Symptoms of fungal infection)

फंगल इन्फेक्शन चार तरह के होते हैं, जिनके बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं। इन चार प्रकार के फंगल इन्फेक्शन के लक्षण भी अलग होते हैं।

1. नेल फंगल इन्फेक्शन (Nail fungal infection) :-

फंगल संक्रमण नाखूनों में देखने को मिलता है, जिसे ओनिकोमाइकोसिस (onychomycosis) के नाम से भी जाना जाता है। यह अक्सर, हाथ के नाखूनों की जगह पैर के नाखूनों में होता है। साथ ही, यह दो उंगलियों के बीच में भी हो सकता है, जिसे एथलीट फुट भी कहा जाता है |इनकी पहचान करना आसान है। जिनकी मदद से आप जान सकते हैं कि आपको नेल फंगल इंफेक्शन है।

नाखून फंगल संक्रमण के लक्षण(Symptoms of nail fungal infection)

  • नाखून का रंग बदलना (पीला, भूरा या सफेद)
  • मोटे नाखून
  • टूटे या फटे हुए नाखून

2. फंगल स्किन इन्फेक्शन ( Fungal Skin Infection) :-

फंगल स्किन इन्फेक्शन, जिन्हें दाद भी कहा जाता है, अक्सर गोलाकार में होते हैं। यही वजह है कि इन्हें रिंगवर्म भी कहा जाता है। इस फंगल संक्रमण के होने पर त्वचा पर लाल और खुजलीदार चकत्ते पड़ जाते हैं। यह फंगल स्किन इन्फेक्शन आपके हाथों-पैरों, गुप्तांग या स्कैल्प में हो सकता है।

फंगल स्किन इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of fungal skin infection):-

  • त्वचा में खुजली
  • लाल और गोल चकत्ते
  • लाल, पपड़ीदार और फटी त्वचा
  • बाल झड़ना

3. यीस्ट फंगल इन्फेक्शन (Yeast fungal infection) :-

यह एक प्रकार के फंगस की वजह से होता है, जिसे कैंडिडा कहा जाता है। कैंडिडा हमारे शरीर के अलग-अलग अंगों जैसे मुंह, गला, आंत और योनि में बिना कोई नुकसान किए रहता है। कभी-कभी योनि के अंदर कैंडिडा की संख्या बढ़ने लगती है और यह संक्रमण का कारण बन सकता है इस अवस्था में पीड़ित महिला को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यीस्ट फंगल इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of yeast fungal infection)

  • गुप्तांग में खुजली या दर्द
  • संभोग के दौरान दर्द
  • पेशाब करते समय दर्द या तकलीफ
  • गुप्तांग से असामान्य स्राव

4. मुंह, गले या अन्न प्रणाली में कैंडिडा संक्रमण (Candida infection in the mouth, throat or food system) :-

यह संक्रमण भी कैंडिडा फंगस की वजह से होता है। जब मुंह, गले या अन्नप्रणाली में कैंडिडा की संख्या बढ़ जाती है, तो यह संक्रमण में बदल सकता है। मुंह और गले के कैंडिडा संक्रमण को थ्रश या ऑरोफरीन्जियल कैंडिडिआसिस (oropharyngeal candidiasis) भी कहा जाता है। एड्स या एचआईवी से संक्रमित लोगों में यह समस्या आम देखी जाती है (8)। इसमें मरीज को कष्टदायक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

कैंडिडा संक्रमण के लक्षण(Symptoms of Candida infection)

  • मुंह में लालपन या खटास
  • मुंह में सूजन (रुई जैसा अहसास)
  • किसी भी चीज के स्वाद का पता न चलाना
  • भोजन करते समय या उसे निगलते समय दर्द होना
  • मुंह के कोनों पर रेश और लालपन
  • आंतरिक गाल, जीभ, मुंह की छत और गले पर सफेद चक्क्त्ते

लिरिल नींबू और टी ट्री ऑयल बॉडी वॉश (Liril Lemon and Tea Tree Oil Body Wash)

शीत ने शुद्ध और प्राकृतिक तेलों को दबाया |शक्तिशाली विरोधी कवक है।

बाल प्रकार :- बाल विकास को बढ़ावा देता है।

उपयोग :- इसे सीधे चेहरे पर लगाएं या आप इसे नाभि में भी लगा सकते हैं। नीम के तेल में उच्च फैटी-एसिड सामग्री को मुँहासे से निशान को रोकने और इलाज करने के लिए कहा जाता है और यह गैर-कॉमेडोजेनिक है। इसे सीधे बालों या त्वचा पर लगाया जा सकता है।

फंगल इंफेक्शन बचाव के 5 तरीके(5 ways to prevent fungal infection)

गर्मि‍यों के मौसम में फंगल इंफेक्शन अधिक होने की आशंका बनी रहती है, वैसे तो ये इंफेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन अधिकतर उन हिस्सों में होता है जहां बहुत पसीना आता है त्वचा की ऊपरी सतह पर पपड़ि‍यां जमना, पैरों में खुजली होना, पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और उनके चारों ओर खुजली होना, पसीने वाले हिस्सों में ज्यादा खुजली होना, यह सभी फंगल इंफेक्शन के लक्षण हैं जो एक संक्रामक रोग है।

  • अपने पैरों को दिन में दो बार अच्छी तरह धोएं।
  • पहनने के पहले पैरों की अंगुलियों के बीच का पानी पोंछ लें।
  • हमेशा साफ मोजे पहनें और पैरों में पसीना आने से रोकने के लिए कोई अच्छा मेडिकेटेड पावडर इस्तेमाल करें।
  • प्रतिदिन नहाएं, लेकिन गर्मियों में अधिक पसीना आने पर दिन में 2 बार भी नहाने में कोई हर्ज नहीं है। नहाते हुए उन हिस्सों की ज्यादा सफाई करें, जहां पसीना ज्यादा आता है।
  • पसीने आने पर उसे जल्द सुखाने की कोशिश करें और इस मौसम में कपड़े भी ऐसे पहनें जो पसीने को जल्दी सोखने वाले हो|

फंगल इंफेक्शन बचाव के घरेलू उपाय (Home remedies for fungal infection prevention)

1. लहसुन (Garlic)

सामग्री :- दो से तीन लहसुन की कलियां , दो से तीन चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल

विधि :-

  • लहसुन की कलियों को कद्दूकस कर लें।
  • कद्दूकस किए हुए लसहुन को नारियल तेल में मिला लें।
  • फिर इस तेल को चार से पांच मिनट के लिए गैस पर रख कर गर्म करें।
  • इसके बाद गैस से उतार कर ठंडा कर लें और तेल को छान लें।
  • अब संक्रमित क्षेत्र पर तेल अच्छी तरह लगाकर छोड़ दें।
  • जल्द राहत पाने के लिए इस प्रक्रिया को रोज दोहराएं।

2. टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil)

सामग्री :- टी-ट्री ऑयल की दो से तीन बूंदें , एक बड़ा चम्मच नारियल तेल

विधि :-

  • सबसे पहले किसी साफ सूती कपड़े या रुई से प्रभावित त्वचा को सूखा लें।
  • फिर एक बड़े चम्मच नारियल तेल में टी ट्री ऑयल की दो से तीन बूंदें मिला लें।
  • अब इस मिश्रण को संक्रमित त्वचा पर लगाकर छोड़ दें।
  • इस उपाय को रोजाना एक से दो बार दोहराया जा सकता है।

3. नारियल का तेल (coconut oil)

सामग्री :- एक से दो चम्मच आर्गेनिक नारियल तेल , कॉटल बॉल
विधि :-

  • सबसे पहले प्रभावित त्वचा को कॉटल बॉल की मदद से सूखा लें।
  • अब एक दूसरी कॉटल बॉल की मदद से तेल को फंगल से संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • जल्द परिणाम पाने के लिए तेल को रोजाना दो से तीन बार लगाएं।

4. दही (curd)

सामग्री :- दही के दो बड़ा चम्मच , एक बड़ा चम्मच शहद

विधि:

  • एक बाउल में दही और शहद मिला लें।
  • अब इस लेप को संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।
  • इसके अलावा, रोजाना एक बाउल दही का सेवन करें।

5.सेब का सिरका (Apple vinegar)

सामग्री :- एक चम्मच सेब का सिरका , आधा कप पानी , रुई
विधि :-

  • आधे कप पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिला लें।
  • रुई की मदद से इस घोल को संक्रमित जगह पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।

6. एलोवेरा (Aloe vera)

सामग्री :- ताजा एलोवेरा जेल (आवश्यकतानुसार)
विधि :-

  • ताजे एलोवेरा जेल को संक्रमित क्षेत्र पर लगाएं।
  • 20 से 30 मिनट रखने के बाद इसे साफ पानी से धोकर त्वचा को सूखा लें।

7. अदरक (Ginger)

सामग्री :- अदरक के दो-तीन टुकड़े , एक कप पानी , रुई
विधि :-

  • एक कप पानी में अदरक को कूटकर डालें और थोड़ी देर अच्छी तरह उबाल लें।
  • अब अदरक के इस पानी को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें।
  • अब रुई की मदद से अदरक के इस पानी को संक्रमित त्वचा पर लगाएं।
  • पूरी तरह से आराम न आने तक इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराएं।
  • आप चाहें तो अदरक वाली चाय भी पी सकते हैं।

8.जैतून का तेल ( Olive oil)

सामग्री :- जैतून तेल की कुछ बूंदें , रुई
विधि :-

  • रुई की मदद से जैतून तेल को प्रभावित त्वचा पर अच्छी तरह लगाएं।
  • इस बात का ध्यान रखें कि आपको तेल आराम से लगाना है।
  • जब तक पूरी तरह आराम न हो जाए, दिन में दो बार इस उपाय को करें।
Tagged : / /

महिलाओं में पीरियड्स की समस्या (Periods problem in females)

मासिक धर्म को माहवारी, रजोधर्म, मेंस्ट्रुअल, एमसी और पीरियड्स के नाम से भी जाना जाता है। कुछ विकसित देशों में लड़कियों को 12 या 13 साल की उम्र में पहला मासिक-धर्म होता है। वैसे सामान्य तौर पर 11 से 13 वर्ष की उम्र में लड़कियों का मासिक धर्म शुरू हो जाता है।

मासिक धर्म (पीरियड्स) क्या है?(what is Menstrual)?

10 से 15 साल की आयु की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब (अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाहिका नली (फैलोपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस डिम्ब का पुरूष के शुक्राणु से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है।[1] इसी स्राव को मासिक धर्म, पीरियड्स या रजोधर्म या माहवारी (Menstural Cycle or MC) कहते हैं।

पीरियड्सके दौरान महिलाओं को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए(What are the things women should take care of during periods)?

पीरियड्स के दौरान सभी महिलाओं को किसी न किसी तरह के दर्द और तकलीफ का सामना करना पड़ता है। किसी को शरीर के किसी हिस्से में दर्द रहता है तो किसी को किसी अन्य हिस्से में, लेकिन अधिकतर महिलाएं इस दौरान बेचैन रहती हैं। इस दौरान महिलाओं को कमजोरी महसूस होती है|

  • पीरियड्स के दिनों में आप गर्भवती नहीं हो सकती तो असुरक्षित संबंध बना सकती है। इस दौरान भी गभर्वती होने की संभावना होती है, साथ ही आपको संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
  • पीरियड्स के दौरान आपको पौष्टिक आहार की अधिक जरूरत होती है।
  • इन दिनों ज्यादा शारीरिक श्रम से बचें। ऐसा करने से आपको किसी हिस्से में अकड़ आ सकती है व आपके शरीर का दर्द बढ़ सकता है।
  • पीरियड्स के दौरान कुछ घंटे में सैनेटरी नैपकिन बदलती रहें। इससे आप संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी और दुर्गंध की समस्या भी नहीं होगी।

पीरियड आने के क्या लक्षण है?(What are the symptoms of periods)?

महिलाओं की एक बहुत आम समस्या है माहवारी से कुछ दिन पहले तनाव की स्थिति। यह दो तीन दिनों पहले महसूस होता और रक्तस्राव आरंभ होने पर समाप्त हो जाता है। इसके लक्षण हैं |

  • चिड़चिड़ापन
  • थकान
  • बार-बार पेशाब की इच्छा
  • सिर व पेडू में दर्द, कब्ज
  • स्तनों में तनाव
  • कभी –कभी पैरों में सुजन।

स्टेफ्री सिक्योर एक्स्ट्रा लार्ज अल्ट्रा थिन सैनिटरी नैपकिन (Stayfree Secure XL Ultra Thin Sanitary napkins)

  • इस कॉम्बो में 10 अल्ट्रा-पतली xl पैड्स के 4 सुविधाजनक आसान-से-पैक पैक हैं | (कुल 40 पैड)
  • 100 प्रतिशत तरल लॉक के साथ एक नियमित नैपकिन के रूप में आधा पतला नियमित से भारी अवधि के लिए बनाया गया है |
  • ड्राई कवर आपको एक बेहतर ड्राई फील देता है |
  • जेल लॉक तकनीक जो भारी प्रवाह को जेल में परिवर्तित करती है और उसे लॉक कर देती है|

महिलाओं के लिए 5DAYSCUP Comfy सिलिकॉन मासिक धर्म कप (5DAYSCUP Comfy Silicone Menstrual Cup for Women)

  • एक बेहतर दौर। एक पुन: प्रयोज्य मासिक धर्म कप है जो आपके मासिक रक्त प्रवाह को इकट्ठा करता है।
  • आपको आपकी अवधि के दौरान सक्रिय रखता है:12 घंटे तक रिसाव-कम सुरक्षा के लिए आरामदायक मासिक धर्म कप, आसान उपयोग करने वाला है और आपको अपने मासिक धर्म के दौरान सक्रिय रखता है। व्यायाम, दौड़, सैर, नृत्य करें|
  • लैंडफिल के रूप में समाप्त होने के लिए कोई और अधिक महंगा टैम्पोन और सैनिटरी नैपकिन नहीं। एक मासिक धर्म कप प्रति चक्र बनाम 22 टैम्पोन या सैनिटरी नैपकिन प्रति अवधि|
  • देखभाल के साथ मासिक धर्म कप 10 साल तक सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है। इसका मतलब है कि आपको हर महीने स्टोर पर जाने की ज़रूरत नहीं है|
  • दो आकारों में आता है छोटा और बड़ा। 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए या जिन्हें योनि से या सीजेरियन सी-सेक्शन द्वारा प्रसव कराया जाता है |

पीरियड नहीं आने के क्या लक्षण है?(What are the symptoms of not having a period)?

कई बार इसके लिए दूसरे कारक भी जिम्मेदार होते हैं। तनाव, बुखार, गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल, मोटापा आदि कुछ ऐसी ही वजहें हैं। इनके अलावा भी कई ऐसी वजहें हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते लेकिन ये पीरियड मिस्ड होने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

पीरियड्स में ध्यान रखने के 10 घरेलू उपाय(10home remedies to take care of in periods)

  • पेट में दर्द होने की समस्या में गर्म पानी से सिंकाई करने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। इसके लिए सिंकाई वाले बैग या किसी बॉटल में गर्म पानी लेकर पेट पर रखकर सिकाई करें।
  • पेटदर्द शुरू होते ही कोई गर्म पेय पी लें। इसमें गर्म पानी, चाय या कॉफी का प्रयोग आप कर सकती हैं। इसे पीने के तुरंत बाद आप राहत महसूस करेंगे।
  • पीरियड्स ठीक से नहीं आने पर हींग का सेवन आपके लिए लाभदायक होगा। हींग खाने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • इस समय सहिजन, सफेद कद्दू, करेला, तिल का सेवन फायदेमंद होता है। इसके अलाव पालक, अंडा व सोयाबीन का नियमित प्रयोग करने के साथ ही प्रतिदिन दूध जरूर पिएं।
  • माहवारी के समय, खासतौर से अंतिम समय में कब्ज‍ियम की समस्या सामने आती है। इसके लिए ऐसी चीजों का सेवन न करें, जो कब्ज बढ़ाए।
  • माहवारी के दौरान खट्टी चीजों से हमेशा परहेज करें। ये शरीर के अंगों में सूजन पैदा करते हैं। इसके अलावा बैंगन, मीट, पीला कद्दू ,आलू का सेवन पहले से ही बंद कर दें।
  • माहवारी शुरू होने के पहले ही सौंफ या तिल का सेवन करने से फायदा होता है। इससे माहवारी समय पर आती है। इसके अलावा तिल के बीजों को जीरा पाउडर और गुड़ के साथ मिलाकर खाने से भी फायदा होता है।
  • पपीता खाना भी बेहद लाभदायक होता है। इसके अलावा इससे पेट की अन्य समस्याएं भी ठीक होती हैं।
  • पिसा हुआ धनिया, शक्कर के बूरे के साथ घी में सेंक कर खाने से भी मासिक धर्म की समसयाआं से निजात मिलती है। इसे दिन में तीन बार लगभग 2-2 चम्मच मात्रा में खाएं।
  • अनार के छिलकों को सुखाकर, उसका पाउडर बना लें। अब इस पाउडर को प्रतिदिन एक चम्मच ठंडे पानी के साथ लें। इससे माहवारी नियमित होगी और तकलीफों से भी आजाद मिलेगी।
Tagged : / /

कोरोना वायरस क्या हैं?(What are corona viruses)?

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। … लातीनी भाषा में “कोरोना” का अर्थ “मुकुट” होता है|

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं?(What can you do to prevent corona virus infection)?

  • कोरोना वायरस यानी ‘कोविड 19’ से बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं|
  • जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं. इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं|
  • संक्रमित व्यक्ति के नज़दीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं|
  • अगर आप किसी ऐसी जगह को छूते हैं, जहां ये कण गिरे हैं और फिर उसके बाद उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो ये कण आपके शरीर में पहुंचते हैं|
  • ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिश्यू का इस्तेमाल करना, बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं|
  • चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फेस मास्क इससे प्रभावी सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं|

कोरोनो वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?(What are the symptoms of corono virus infection)?

  • इंसान के शरीर में पहुंचने के बाद कोरोना वायरस उसके फेफड़ों में संक्रमण करता है. इस कारण सबसे पहले बुख़ार, उसके बाद सूखी खांसी आती है. बाद में सांस लेने में समस्या हो सकती है|
  • वायरस के संक्रमण के लक्षण दिखना शुरू होने में औसतन पाँच दिन लगते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोगों में इसके लक्षण बहुत बाद में भी देखने को मिल सकते हैं|
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार वायरस के शरीर में पहुंचने और लक्षण दिखने के बीच 14 दिनों तक का समय हो सकता है. कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि ये समय 24 दिनों तक का भी हो सकता है|
  • कोरोना वायरस उन लोगों के शरीर से अधिक फैलता है जिनमें इसके संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं. लेकिन कई जानकार मानते हैं कि व्यक्ति को बीमार करने से पहले भी ये वायरस फैल सकता है|
  • बीमारी के शुरुआती लक्षण सर्दी और फ्लू जैसे ही होते हैं जिससे कोई आसानी से भ्रमित हो सकता है|

कोरोना की पहचान के लिए इन लक्षणों पर गौर करें(Consider these symptoms to identify the corona)

1. तेज बुखार आना (High fever) :- अगर किसी व्यक्ति को सुखी खांसी के साथ तेज बुखार है तो उसे एक बार जरूर जांच करानी चाहिए. यदि आपका तापमान 99.0 और 99.5 डिग्री फारेनहाइट है तो उसे बुखार नहीं मानेंगे. अगर तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुंचता है तभी यह चिंता का विषय है|

2.कफ और सूखी खांसी (Phlegm and dry cough) :-  कोरोना वायरस कफ होता है मगर संक्रमित व्यक्ति को सुखी खांसी आती है|

3. सांस लेने में समस्या (Trouble breathing) :– कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 5 दिनों के अंदर व्यक्ति को सांस लेने में समस्या हो सकती है. सांस लेने की समस्या दरअसल फेफड़ो में फैलते कफ के कारण होती है|

4. फ्लू-कोल़्ड जैसे लक्षण (Flu-like symptoms) :- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कभी-कभी बुखार, खांसी, सांस में दिक्कत के अलावा फ्लू और कोल्ड जैसे लक्षण भी हो सकते हैं|

5.डायरिया और उल्टी (Diarrhea and vomiting) :- कोरोना से संक्रमित लोगों में डायरिया और उल्टी के भी लक्षण देखे गए है. करीब 30 प्रतिशत लोगों में इस तरह के लक्षण पाये गए हैं|

6.सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी (Loss of smell and taste) :- बहुत से मामलों में पाया गया है कि कोरोना से संक्रमित लोगों को सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी आती है|

कोरोनावायरस से बचाव (Coronavirus protection)

  • यह वायरस, खांसी, छींक, श्वास और छूने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
  • इस वायरस से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करें।
  • लोगों से हाथ न मिलाएं और गले भी न मिलें। 5 फीट की दूरी से बात करें।
  • अपने आसपास और घर की सफाई रखें।
  • कपड़ों को अच्छी तरह से धोएं और कम से कम दो घंटे धूप में सुखाएं।
  • हर 15 मिनट में कम से कम एक घूंट गुनगुना पानी पीते रहें।
  • अपने हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक रगड़कर साबुन से धोएं।
  • गंदे हाथों से अपने नाक और मुंह को न छुएं और न ही गंदे हाथों से कुछ खाएं।
  • आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, बर्फ, बाजार की लस्सी, ठंडी छाछ और अन्य ठंडी वस्तुओं के सेवन से बचें।
  • बाजार में मिलने वाले दूध से बने उत्पाद जैसे चीज, बटर, मायोनीज का सेवन न करें।
  • नमक के गर्म/गुनगुने पानी से गरारे करें, इससे वायरस फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाएगा।
  • रोजाना तुलसी, लौंग, अदरक और हल्दी का गर्म दूध पिएं।
  • गर्म स्थान पर रहें क्योंकि यह वायरस 35-40 डिग्री तापमान पर मर जाता है।
  • कपूर, लौंग, इलाइची और जावित्री को पीसकर अपने साथ रखें और समय-समय पर उसे सूंघते रहें।
  • विटामिन-सी युक्त फलों जैसे संतरे, मौसमी और आंवला खाएं। नींबू का इस्तेमाल भी जरूर करें।
  • सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
  • प्रतिदिन प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करें। इससे श्ववसन तंत्र और फेफड़े मजबूत होंगे।
  • सर्दी, खांसी, कफ, बुखार होने वाले व्यक्ति को डॉक्टर के पास तुरंत जाने की सलाह दें।
  • शाकाहारी और हमेशा ताजा भोजन खाएं। मांसाहार के सेवन से बचें।
  • फ्रीज में रखी ठंडी वस्तुओं का सेवन बिल्कुल न करें।

कोरोनावायरस से बचाव के घरेलू उपाय (Home remedies to prevent coronavirus)

  • सरसों का तेल और कपूर का करें इस्तेमाल:- सरसों तेल में कपूर मिलाकर कुछ बूंदे नाक में डालें, जिससे श्वास लेने में कठिनाई नहीं होगी और प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहेगी। संक्रमण से बचने के लिए अदरख व मुलेठी का सेवन अधिक करें। अदरख को आयुर्वेद में विषनाशक कहा जाता है। चीनी की जगह गुड़ का सेवन करें। ज्यादा भीड़ वाले इलाकों में जाने से परहेज करें। बाहर का भोजन न करें। साथ ही हल्दी डालकर दूध का सेवन रात में सोने से पहले करें।
  • खरास हो तो गर्म पानी से गरारा करें।
  • बाहर से आने के बाद हर बार साबुन से हाथ-मुंह धोना जरूरी है।
  • बाहर जाने के दौरान अल्कोहल सैनिटाइजर जेब में रखें, बीच-बीच में हाथ सैनिटाइज करें।

कोरोना का संक्रमण फैलने से कैसे रोकें?(How to prevent corona infection from spreading)?

  • अगर आप संक्रमित इलाक़े से आए हैं या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहे हैं तो आपको अकेले रहने की सलाह दी जा सकती है|
  • घर पर रहें|
  • ऑफ़िस, स्कूल या सार्वजनिक जगहों पर न जाएं |
  • सार्वजनिक वाहन जैसे बस, ट्रेन, ऑटो या टैक्सी से यात्रा न करें |
  • घर में मेहमान न बुलाएं|
  • घर का सामान किसी और से मंगाएं|
  • अगर आप और भी लोगों के साथ रह रहे हैं तो ज़्यादा सतर्कता बरतें|
  • अलग कमरे में रहें और साझा रसोई व बाथरूम को लगातार साफ़ करें. 14 दिनों तक ऐसा करते रहें ताकि संक्रमण का ख़तरा कम हो सके|

आयुर्वेद के 10 उपाय, जो वायरस के प्रकोप से करेंगे आपकी सुरक्षा(10 remedies of Ayurveda, which will protect you from virus outbreak)

  • COVID-19 वायरस के प्रभाव से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप नियमित तौर पर गुनगुना पीना पिएं।
  •  शरीर के इम्यून सिस्टम को दुरूस्त रखने के लिए आपको नियमित तौर पर उचित मात्रा में आंवला, एलोवेरा, गिलोय, नींबू आदि का जूस पीना चाहिए।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के आप पानी में तुलसी रस की कुछ बूंदें डालकर पी सकते हैं।
  •  गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
  • इम्यून सिस्टम की बेहतरी के लिए आप अष्टादसांग काढ़ा, गुडूच्यादि काढ़ा , अमृतउत्तरम काढ़ा या सिरिशादी काढ़ा का सेवन करना उत्तम रहेगा।
  • घर और आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए आप नियमित तौर पर नीम की पत्तियों, गुग्गल, राल, देवदारु और दो कपूर को साथ में जलाएं। उसके धुएं को घर और आस-पास में फैलने दें।
  • इसके अलावा आप चाहें तो गुग्गल, वचा, इलायची, तुलसी, लौंग, गाय का घी और खांड को किसी मिट्टी के पात्र में रखकर जलाएं और उसके धुएं को घर और आस-पास में फैलने दें।
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए आप नियमित तौर पर तुलसी की 5 पत्तियां, 4 काली मिर्च, 3 लौंग, एक चम्मच अदरक का रस शहद के साथ ले सकते हैं।
  •  चाय पीने के शौकीन हैं, तो आपको नियमित रूप से 10 या 15 तुलसी के पत्ते, 5 से 7 काली मिर्च, थोड़ी दालचीनी और उचित मात्रा में अदरक डालकर बनाई गई चाय पीनी चाहिए। यह आपको रोगों से बचने में मदद करेगी।
  •  इन सबके अलावा आपको कोरोना वायरस से बचने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए।
Tagged : / /

बालों का झड़ना(Hairfall)

बालों का झड़ना, जिसे ऐलोपेशिया या गंजापन भी कहा जाता है कुछ लोगों में बाल गिरने का कारण मनोवैज्ञानिक संकट होता है. हर दिन बाल झड़ते है एक व्यक्ति के प्रति दिन 100 बाल झड़ते हैं. लेकिन अधिक बाल झड़ने से किसी व्यक्ति के सिर पर गंजे धब्बे दिखाई देते हैं| महिला के शीर्ष पर बाल पतले होते हैं|

हेयर फॉल क्या है?(What is hair fall)?

बाल झड़ना कोई जानलेवा स्थिति नहीं है. लेकिन यह गंभीर रूप से खतरे में पड़ सकता है कि जिस तर यह आत्मविश्वास को खतरे में डाल सकता है. पुरुष, महिला और यहां तक ​​कि बच्चे भी बालों के झड़ने का अनुभव कर सकते हैं. यह स्थिति आमतौर पर हार्मोनल परिवर्तन, आनुवंशिकता, चिकित्सा स्थितियों या कुछ दवाओं के साइड-इफेक्ट के परिणामस्वरूप होती है. वंशानुगत कारणों से बालों का झड़ना बालों के झड़ने का सबसे आम कारण होता है|

बालों के झड़ने के प्रकार क्या हैं?(What are the types of hair loss)?

बाल विकास दर लोगों की उम्र के रूप में धीमी हो जाती है और इसे ऐलोपेशिया कहा जाता है. बालों के झड़ने के कई प्रकार होते हैं|

1.अनौपचारिक ऐलोपेशिया :- यह उम्र के साथ बालों का प्राकृतिक रूप से पतला होना है बालों के रोम की संख्या में वृद्धि होती है और अन्य बाल कम और छोटे हो जाते है|

2. एंड्रोजेनिक ऐलोपेशिया (Androgenic alopecia):- इस अनुवांशिक स्थिति से महिला और पुरुष दोनों प्रभावित हो सकते हैं जिन पुरुषों की यह स्थिति होती है, उनके किशोरावस्था में भी बाल झड़ने लगते हैं यह ललाट खोपड़ी और स्कैल्प से क्रमिक बालों के झड़ने और हेयरलाइनिंग द्वारा चिह्नित किया जाता है इससे प्रभावित होने वाली महिलाओं के बालों में उनके फोरटीज के बाद बाल पतले होते हैं. इसे महिला गंजापन के रूप में जाना जाता है|

3.ऐलोपेशिया आरैटा (Alopecia areata):- यह आमतौर पर अचानक शुरू होता है और युवा वयस्कों और बच्चों में पैच में बालों के झड़ने की ओर जाता है यह पूरा बाल्डिंग (ऐलोपेशिया) हो सकता है इस स्थिति वाले 90% से अधिक लोगों में, बाल कुछ वर्षों में वापस उग जाते हैं|

4.ट्रिकोटिलोमेनिया (Trichotillomania) :- यह बच्चों में सबसे अधिक देखा जाता है इस मनोवैज्ञानिक विकार के कारण व्यक्ति अपने ही बालों को खराब कर देता है|

5.टेलोजेन इफ्लुवियम ( Telogen effluvium) :- बाल विकास चक्र परिवर्तन से खोपड़ी पर बालों का एक अस्थायी पतलापन होता है यह बहुत सारे बालों को आराम करने वाले चरण में प्रवेश करने के कारण होता है जो बाल को हल्का कर देता है और परिणामस्वरूप पतले हो जाता है|

6.स्कारिंग ऐलोपेशिया (Scarring alopecia):- त्वचा की इंफ्लामेटरी स्थितियां जैसे कि फॉलिकुलिटिस, मुँहासे और सेल्युलाइटिस, ऐसे परिणाम उत्पन्न करते हैं जो बालों की पुनर्जीवित करने की क्षमता को नष्ट कर देते हैं|

बाल गिरने के कारण क्या हैं?(What are the causes of hair fall)?

बालों का झड़ना उन लोगों में सबसे अधिक प्रचलित है, जिनमें बाल झड़ने का पारिवारिक इतिहास है, आनुवांशिकी इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. कुछ हार्मोन भी बालों के झड़ने को ट्रिगर करते हैं जो आमतौर पर यौवन के दौरान शुरू होते हैं. दर्दनाक घटनाओं, सर्जरी और प्रमुख बीमारियों जैसे अन्य कारक भी तीव्र बालों के झड़ने को ट्रिगर कर सकते हैं. ऐसे में कुछ समय बाद बाल अपने आप उगने लगते हैं. गर्भावस्था के दौरान रजोनिवृत्ति, अचानक गर्भनिरोधक गोलियां, प्रसव और हार्मोनल परिवर्तन के कारण अस्थायी बालों के झड़ने का कारण हो सकता है|

कुछ अन्य कारण हैं जिनके माध्यम से बालों का झड़ना होता है (There are some other reasons through which hair loss occurs)

  • हार्मोन (Hormones):- असामान्य एण्ड्रोजन स्तर के कारण बाल गिर सकते हैं|
  • जीन (Jean):- माता-पिता से जीन किसी व्यक्ति की महिला या पुरुष गंजापन होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं|
  • ड्रग्स (Drugs):- ब्लड थिनर, कैंसर उपचार दवाओं, जन्म नियंत्रण दवा और बीटा ब्लॉकर्स के कारण बालों का गिरना भी हो सकता है|
  • मेडिकल प्रिडिस्पोजिशन (Medical predisposition):- डायबिटीज, ल्यूपस, आयरन की कमी, थायरॉइड डिजीज, एनीमिया और ईटिंग डिसऑर्डर से बाल झड़ सकते हैं|
  • कॉस्मेटिक (Cosmetic) :- हेयर डाई, ब्लीचिंग और शैंपू के उपयोग जैसी प्रक्रियाएं सभी बालों को पतला कर सकती हैं जिससे यह कमजोर हो जाते हैं. बालों को कसकर बांधना, गर्म कर्लर या रोलर्स का उपयोग करने से भी बालों का टूटना और नुकसान होता है हालांकि, इनमें गंजापन नहीं होता है|

Tresemme हेयर फॉल डिफेंस शैम्पू(Tresemme Hair Fall Defense Shampoo)

  • बाल मजबूत बनाता है और टूटने के कारण बालों के झड़ने को रोकता है|
  • लंबे और मजबूत बाल पाएं|
  • दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त कोमल|
  • अतिरिक्त सुरक्षा के लिए बालों के झड़ने से बचाव कंडीशनर का पालन करें।
  • विशेष रूप से भारतीय बालों के लिए तैयार और तेल उपचार के साथ उपयोग के लिए उपयुक्त है|

प्याज हेयर ऑयल – बालों के झड़ने को नियंत्रित करता है(Onion Hair Oil – Regulates Hair Loss)

सामग्री (Content) :- लाल प्याज का अर्क, नारियल का तेल, सूरजमुखी का तेल, विटामिन ई, अरंडी का तेल, आर्गन का तेल, जोजोबा का तेल, आंवला का अर्क, हिबिस्कस का अर्क, नीम का तेल, भृंगराज का अर्क, आम का मक्खन, शीया का मक्खन, चंदन का तेल, गुलाब का तेल

पोषण (Nutrition) :- बीक्यूस प्याज बालों के रोम पोषण में बहुत अच्छे होते हैं|

खोपड़ी पर फंगल संक्रमण (Fungal infection on the scalp) :- प्याज में शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और खोपड़ी के संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। यह बदले में बालों के झड़ने को कम करने में मदद करता है क्योंकि खोपड़ी के संक्रमण से बालों का भारी नुकसान हो सकता है।

फ्रेम फ्रिज़ (Frame fridge) :- वनस्पति तेलों के निर्माण के साथ रे नैचुरल प्याज हेयर ऑयल, नमी में बालों के लॉक की चमक को बढ़ाने में मदद करता है, बालों के उलझते हुए छोरों को बंद और ढीला करता है।प्याज का तेल सल्फर में समृद्ध है, जो टूटना और पतला होने को कम करने के लिए जाना जाता है।

किस विटामिन की कमी से बाल झड़ते हैं? (Which vitamin deficiency causes hair loss)?

विटामिन बालों की वृद्धि में आवश्यक भूमिका निभाते हैं विटामिन में कमी से बालों के झड़ने से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं नियासिन या विटामिन बी 3 और बायोटिन एक और बी विटामिन है जो बालों के झड़ने की ओर जाता है कि शरीर में विटामिन डी की कमी बालों के विकास को प्रभावित करती है बालों के झड़ने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में विटामिन डी का स्तर कम होता है|

बालों को झड़ने से रोकने के लिए कौन से विटामिन अच्छे हैं?(What vitamins are good for preventing hair fall?)

  • विटामिन ए (Vitamin A):- यह शरीर में मौजूद हर कोशिका के लिए मूलभूत इकाई है बाल सबसे तेजी से बढ़ते ऊतक हैं विटामिन ए इसकी वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| विटामिन ए पशु उत्पादों जैसे दूध, अंडे में पाया जाता है|
  • विटामिन बी (Vitamin B) :– ​​बालों के विकास में प्रमुख विटामिन में से एक विटामिन बी को बायोटिन्स भी कहा जाता है| यह आरबीसी के निर्माण में मदद करता है और खोपड़ी तक ऑक्सीजन, पोषक तत्व पहुंचाता है| विटामिन बी पूरे अनाज, बादाम, मांस, समुद्री भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है|
  • विटामिन सी (V itamin C) :- यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है जो मुक्त कणों के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाता है कोलेजन नामक एक प्रोटीन जो बालों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है यह विटामिन बालों के लिए आवश्यक खनिजों को अवशोषित करने में मदद करता है| खट्टे फल जैसे संतरे, स्ट्रॉबेरी, मिर्च आदि बालों के विकास के लिए अच्छे होते हैं|
  • विटामिन डी(Vitamin D):- यह बालों के विकास के लिए एक प्रमुख कारक होता है जो नए रोम बनाने में मदद करता है विटामिन डी बालों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| वसायुक्त मछली, कॉड लिवर ऑयल, कुछ मशरूम और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं|

बाल झड़ने से रोकने के लिए आसान घरेलू उपाय –(Hair Fall Tips and Treatment at Home)

आजकल बाल झड़ने की समस्या आम हो गई है। पुरुष हो या महिला हर कोई इससे परेशान है। इस समस्या के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं। इस व्यस्त जीवन में समय बचाने के लिए हम प्राकृतिक संसाधनों की जगह सिर्फ केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग करते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे बालों पर पड़ता है। बाल झड़ने के कारण गंजेपन तक का सामना करना पड़ सकता है। बाल झड़ने के घरेलू उपायों के बारे में, जिनके प्रयोग से न सिर्फ बाल मजबूत होंगे, बल्कि उनकी प्राकृतिक चमक भी लौट आएगी।

बाल झड़ने के कारण (Causes of Hair Fall)

1. तनाव (Tension) :- जो शख्स तनाव की गिरफ्त में आया, उसे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अब तक हुईं विभिन्न रिसर्च में भी यह बात स्पष्ट हुई है कि तनाव के चलते बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

2. आनुवंशिक (Genetic) :- बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारण आनुवंशिक भी है, जिसे एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहा जाता है अमेरिका अकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (US Academy of Dermatology) का मानना है कि बाल झड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही होता है। अगर परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही है, तो परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी इसका सामना करना पड़ सकता है।

3. हार्मोन में बदलाव (Hormone changes) :- मेनपॉज के कारण, गर्भावस्था की स्थिति में या थायराइड होने पर शरीर में हार्मोन बदलने लगते हैं। इस कारण से भी बाल झड़ सकते हैं।

4. असंतुलित भोजन खाना (Eating unbalanced food) :- खानपान में सावधानी न बरतने से भी बाल कमजोर होकर गिरने लगते हैं। यह समस्या ज्यादातर उन लोगों के साथ होती है, जो जंक फूड खाना पसंद करते हैं। जंक फूड में ऐसा कोई पौषक तत्व नहीं होता, जो हमारी सेहत व बालों के लिए अच्छा हो। इसके अलावा, यह समस्या उन्हें भी होती है, जो खानपान में संतुलन नहीं बनाकर रखते यानी नियमानुसार भोजन नहीं करते।

5. प्रोटीन की कमी ( Protein deficiency) :- हमारे बाल प्रोटीन के कारण बनते, बढ़ते और मजबूत होते हैं। बालों के लिए इस प्रोटीन को केराटिन कहा जाता है। अगर भोजन में प्रोटीन की कमी होती है, तो बाल कमजोर होने लगते हैं। परिणामस्वरूप बाल रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं|

6. एनीमिया (Anemia) :- महिलाओं में खून की कमी होना आम बात है, जिस कारण महिलाओं को एनीमिया हो जाता है। यह भोजन में आयरन की कमी के कारण होता है। आयरन की कमी होने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पाती हैं। ये लाल रक्त कोशिकाएं ही हैं, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कर ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण बालों को विकसित होने के लिए जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते और टूटकर गिरने लगते हैं।

बाल झड़ने से रोकने के घरेलू इलाज (Home Remedies for Hair Fall)

1.मेथी (Fenugreek) :- एक कप में मेथी के बीज को रात भर भिगोकर रख दें सुबह उसका पेस्ट बनाकर जड़ों से लेकर बालों तक लगाएं| 40 मिनट बाद ठंडे पानी से सिर को धो लें इसका प्रयोग महीने में एक से दो बार कर सकते हैं |

2.अंडा (Egg) :- अंडे के सफेद हिस्से को एक चम्मच जैतून के तेल में मिला लें इस मिश्रण को अपने बालों में लगाएं 15 से 20 मिनट बाद बालोंको ठंडे पानी से धो लें और शैंपू कर लें आप इसका प्रयोग हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं|

3.ग्रीन टी (Green tea) :- दो ग्रीन टी बैग्स को 2 / 3 कप गरम पानी में डाल ले | ग्रीन टी बैग्स को कब से बाहर निकाल कर उस पानी से बालों को धो लें बालों में शैंपू का प्रयोग करने के बाद इसे कंडीशनर की तरह प्रयोग करें|

4. आंवला(Gooseberry) :- 4/5 आंवले को एक कप नारियल के तेल में जब तक उबालें जब तक वह काला ना हो जाए| तेल को ठंडा होने पर बालों में लगाएं और 20 से 30 मिनट बाद शैंपू से सर को धोले |

5.दही(Curd) :- थोड़े से मेथी के दानों को मिक्सी में पीस लें उसे एक कटोरी दही में मिक्स कर लें इस मिश्रण को बालों में लगाएं और 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धोकर शैंपू कर लें इसका इस्तेमाल आप हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं |

Tagged : / /

तेलीय त्वचा की देखभाल(Oil Skin Care)

जिनके चेहरे की त्वचा तैलीय होती है, उन्हें कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे लोगों के चेहरे पर हल्का ऑयल हर समय बना रहता है और चेहरा चिपचिपा लगता है। तैलीय त्वचा के कारण कील-मुंहासे हो जाते हैं जो चेहरे की सुंदरता को बिगाड़ देते हैं। इसलिए, आज इस लेख में हम आपको तैलीय त्चचा के बारे में कुछ घरेलू उपाय बताए जाएंगे जिनके प्रयोग से आपके चेहरा सुंदर, आकर्षक व कोमल हो जाएगा।

तैलीय त्वचा होने के कारण(Causes of Oily Skin in Hindi)

1. तनाव (Tension) :- तनाव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारे शरीर में हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। कोर्टिसोल भी एक तरह का हार्मोन है। हमारे तनावग्रस्त होने पर शरीर में इसका रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे त्वचा तैलीय होती है|

2. हार्मोन में बदलाव(Hormone changes) :- जीवन के विभिन्न स्तरों पर महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। फिर चाहे वह किशोरावस्था में हो या फिर गर्भावस्था के दौर से गुजर रही हो। यहां तक कि मेनपॉज से पहले और बाद में भी महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान शरीर में मौजूद तैलीय ग्रंथीया सक्रीय हो जाती हैं और त्वचा में मौजूद तेल चेहरे पर नरज आने लगता है, जिस कारण त्वचा तैलीय हो जाती है|

3. आनुवंशिक (Genetic):- अगर किसी के माता-पिता की त्वचा तैलीय है, तो संभव है कि उनके बच्चों की त्वचा भी तैलीय हो सकती है। इस स्थिति में बच्चों के चेहरे पर ऑयनी स्किन के छिद्र बड़े हो सकते हैं, जिस कारण तैलीय ग्रंथियोंं से तेल अधिक मात्रा में निकलता है।

4. स्किनकेयर उत्पादों का अधिक प्रयोग (Overuse of skincare products) :- हमारे चेहरे की त्वचा सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है। हम चेहरे को निखारने के लिए विभिन्न स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। हम ज़रूर से ज़्यादा चेहरे की स्क्रबिंग करते हैं। परिणामस्वरूप, हमारे चेहरे की रंगत उड़ने लगती है। ऐसा करने से भी स्किन तैलीय हो सकती है।

5. मौसम में बदलाव (Change in weather) :- मौसम मैं बदलाव के साथ उसका असर चेहरे पर दिखाई देता है। गर्मियों में नमी बढ़ने के कारण पसीना ज्यादा आता है और तैलीय ग्रंथीयों से तेल ज़्यादा बाहर निकलता है। इस कारण चेहरा ज़रूरत से ज़्यादा ऑयली नजर आता है। वहीं, सर्दियों में त्वचा रूखी हो जाती है, ऐसे में माश्चराइजर की कमी को पूरा करने के लिए स्किन ज़्यादा ऑयली हो जाती है।

6. अधिक दवाओं का सेवन (Prescription drugs) :- अत्याधिक दवाओं का सेवन करने से भी त्वचा तैलीय हो सकती है। अगर आप हार्मोनल गर्भनिरोधक दवा या फिर हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा का सेवन कर रही हैं, तो सावधान हो जाइए। हो सकता है कि इन दवाओं के लगातार सेवन से आपकी त्वचा भी तैलीय हो जाए और कील-मुंहासों का सामना करना पड़े।

7. गलत खानपान (Wrong Catering) :- तला, मिर्च-मसाले, चिकनाई युक्त व अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करने से त्वचा तैलीय हो जाती है|

बायोटीक बायो नारियल व्हाइटनिंग और ब्राइटनिंग क्रीम(Biotique Bio Coconut Whitening And Brightening Cream)

मात्रा (quantity):- 50 ग्राम; आइटम फॉर्म: क्रीम

त्वचा के प्रकार(Skin type) :- सभी प्रकार की त्वचा के लिए मेलेनिन के खिलाफ आंतरिक त्वचा की रक्षा करता है|

उपयोग (Use):- साफ चेहरे और गर्दन पर लागू करें धीरे से त्वचा में मालिश करें|

पैकेज सामग्री (Package Contents) :- 1 व्हाइटनिंग और ब्राइटनिंग क्रीम

लोटस हर्बल्स नीम एंड क्लोव प्यूरिफाइंग फेस वॉश (Lotus Herbals Neemwash Neem & Clove Purifying Face Wash)

ऑयली स्किन के लिए नीम एक वरदान की तरह है। इसकी एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज़ ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन पर मैजिक की तरह काम करती हैं। लौंग भी स्किन के एक्सेस ऑयल को हटाने में मदद करती है, इसलिए ये फेसवॉश ऑयली स्किन के लिए परफेक्ट होता है। ये ना सिर्फ स्किन ऑयल को कंट्रोल करता है, बल्कि एक्ने, ब्लेमिशेज़ और एक्ज़िमा-प्रोन स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

तैलीय त्वचा (ऑइली स्किन) के लिए घरेलू उपाय – (Home Remedies for Oily Skin in Hindi) :-

तैलीय त्वचा के घरेलू उपाय के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें बनाना आसान है, इनका कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं है।

1. गुलाब जल (rose water):-

गुलाब जल को प्राकृतिक और स्वास्थ्य के अच्छा माना गया है। यह त्वचा में ऑयल को नियंत्रित कर नमी प्रदान करता है। गुलाब जल में भरपूर मात्रा मे एंटीमाइक्रोबायल (Antimicrobial) ,एंटीऑक्सीडेंट(Antioxidant),मिनरल( Mineral)व विटामिन(Vitamin)होते हैं। ये सभी गुण तैलीय त्वचा की देखभाल करने के लिए पर्याप्तहैं|

सामग्री :- थोड़ा-सा गुलाब जल ,एक कॉटन बॉल

कॉटन बॉल या फिर रूई के छोटे से टुकड़े को गुलाब जल में भिगोकर इससे चेहरे को साफ करें। ऐसा करने से ना सिर्फ चेहरे की त्वचा खिल उठेगी, बल्कि आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे ।इस प्रक्रिया को आप दिन में दो बार सुबह व रात को सोने से पहले अपना सकते हैं।

2. मुल्तानी मिट्टी (Multani mitti):-

तैलीय त्वचा के लिए मुल्तानी मिट्टी का उपयोग किया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में खनिज पाया जाता है। मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक स्किन में से तेल को सोखकर, प्राकृतिक ख़ूबसूरती देता है। इसके अलावा, यह कील-मुंहासों को खत्म कर दाग-धब्बों को हल्का कर देता है।

सामग्री :- mदो चम्मच मुल्तानी मिट्टी , एक चम्मच ताज़ा दही , दो-तीन बूंद नींबू का रस

बनाने की विधि :- इन सभी सामग्रियों को एक कटोरी में डालकर तब तक मिक्स करें, जब तक कि पेस्ट ना बन जाए।अब चेहरे को पानी से अच्छे से धो लें और तौलिये से साफ कर लें।इसके बाद पेस्ट को अपने पूरे चेहरे पर लगाएं।जब फेस पैक पूरी तरह से सूख जाए, तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें।चेहरा धोने के बाद माश्चराइज़र क्रीम जरूर लगाएं|

नोट :- इस फेस पैक को आप हफ्ते में तीन बार लगा सकते हैं।

3. मसूर की दाल (Masur lentils):-

मसूर की दाल में भरपूर मात्रा में खनिज व विटामिन होते हैं। यह खाने में भी फायदेमंद है, यह त्वचा के लिए भी लाभकारी है। इसका फेस पैक तैलीय त्वचा पर असरकारक है।

सामग्री :- आधा कप मसूर की दाल , एक तिहाई कप कच्चा दूध

बनाने की विधि :- मसूर की दाल को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इसे अच्छी तरह पीस लें। अब इसमें दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस फेस पैक को अपने चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट तक सूखने दें।अब चेहरे को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें।

नोट :-इस फेस पैक से आप चेहरे की स्क्रबिंग भी कर सकते हैं।

4. नीम (Azadirachta indica):-

आयुर्वेदिक औषधी में नीम का अत्याधिक महत्व है। नीम के पत्तों व उसके रस से बनीं आयुर्वेदिक औषधियां स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं। साथ ही शरीर की सुंदरता को बढ़ाने में भी नीम का प्रयोग किया जाता है। नीम से तैयार किया गया फेस पैक तैलीय त्वचा के लिए बहुत लाभदायक है|

सामग्री :- नीम की 9-10 पत्तियां , 3-4 चुटकी हल्दी पाउडर|

बनाने की विधि :- नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर अच्छी तरह से पीस लें।
अब इसमें हल्दी पाउडर डाल दें।अगर पेस्ट गाढ़ा हो गया हो, तो उसे पतला करने के लिए पानी की कुछ बूंदें डाल सकते हैं।अब चेहरे को पानी से धोकर पेस्ट लगा लें।करीब 20 मिनट बाद जब पेस्ट सूख जाए, तो चेहरा पानी से धो लें।

नोट :- यह पैक चेहरे से तेल को सोख लेता है और कील-मुंहासों को भी साफ़ करता है।

5. संतरे का छिलका (Orange peel):-

संतरा विटामिन-सी का सबसे अच्छा स्रोत है, संतरा त्वचा में एंटीऑक्सीडेंट्स(Antioxidants) का संचार करने में मदद करता है संतरे के छिलके से बने फेस पैक न सिर्फ त्वचा से अतरिक्त तेल को निकाल बाहर करते हैं, बल्कि दाग-धब्बों को भी मिटाने का काम करते हैं।

सामग्री :- तीन चम्मचे संतरे के छिलके का पाउडर , चार चम्मच दूध , एक चम्मच नारियल का तेल , दो से चार चम्मच गुलाब जल

बनाने की विधि :- संतरे के छिलके को दो-तीन दिन धूप में सूखा लें और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लें। हालांकि, यह पाउडर बाजार में भी मिल जाता है, लेकिन घर में बनाया पाउडर बेहतर होता है।इन सभी सामग्रियों को एक कटोरी में मिक्स कर लें और चेहरे पर लगाएं।करीब 15-20 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें।

नोट:-आप इस फेस पैक को हफ्ते में 4-5 बार लगा सकते हैं।

6. खीरा (Cucumber):-

खीरा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है खीरा तैलीय त्वचा के लिए काफी फ़ायदेमंद है। खीरे में विटामिन-के, सी, पोटेशियम व फोलिक एसिड जैसे पौष्टिक गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसमें सिलिकॉन नामक खास तरह का तत्व मौजूद होता है, जो स्किन को निखारने में मदद करता है खीरे के रस को त्वचा के लिए बेहतरीन टॉनिक माना गया है, जिसे चेहरे पर लगाने से ताजगी का अहसास होता है।

सामग्री :- एक खीरा , नींबू के रस की 6-8 बूंदें , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- खीरे का छिलका उतार लें और उसके टुकड़े कर बिना पानी डाले पीस लें।अब इसमें नींबू का रस और शहद को मिक्स कर लें।चेहरे को अच्छी तरह साफ कर, रूई की मदद से इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं। हल्के-हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें और फिर 15-20 के लिए इसे सूखने दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

7. शहद (Honey) :-

ऑयली स्किन के लिए शहद बहुत लाभदायक है। इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबाइल व मिनरल जैसे तत्व मौजूद होते हैं जो स्किन से ऑयल को बाहर निकालकर, उसे ख़ूबसूरत बनाते हैं।

सामग्री :- 10 बादाम , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- बादाम को रात भर पानी में भिगोकर रखें और सुबह इन्हें अच्छे से पीस लें।
अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। इस पैक को चेहरे पर करीब 15 मिनट लगा रहने दें और सूखने के बाद धो लें।

8. एलोवेरा (Aloe vera):-

एलोवेरा सबसे प्राकृतिक उत्पाद है। इस औषधी का कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा का प्रयोग सुंदर व निखरी त्वचा के लिए किया जाता है। यह तैलीय, रूखी व मिश्रित हर तरह की त्वचा के लिए फ़ायदेमंद है।

सामग्री :- एक चम्मच एलोवेरा जैल , एक चम्मच शहद

बनाने की विधि :- एलोवेरा के पत्तों को गर्म पानी में उबाल लें और इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें।
इन दोनों को एक कटोरी में डालकर मिक्स कर लें। अब साफ हाथों से इस पैक को अपने चेहरे पर लगाएं। करीब 15-20 मिनट बाद ताजे पाने से चेहरा धो लें।

9. नींबू (Lemon):-

नींबू में विटामिन-सी होता है। चेहरे के रोमछिद्रों को साफ कर, उन्हें सिकोड़ने में मदद करता है। इसे चेहरे पर लगाने से तैलीय त्वचा की समस्या काफ़ी हद तक कम हो सकती है।

सामग्री :- आधा कटा हुआ नींबू , गुलाब जल की 7-8 बूंदें

बनाने की विधि :- आधे कटे हुए नींबू को चेहरे पर रगड़ें। अगर आपको जलन होती है, तो इसमें नींबू के रस में गुलाब जल मिक्स कर लें।अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर, करीब 20 मिनट बाद पानी से धो लें।

तैलीय त्वचा (ऑइली स्किन) के लिए कुछ और टिप्स – Other Tips For Oily Skin Care in Hindi

इन घरेलू उपचारों के अलावा अन्य तरीके भी हैं, जिनकी मदद से हम अपनी ऑयली स्किन की केयर कर सकते हैं।

1.क्लींज़िंग (Cleansing) :- क्लींज़िंग करने से चेहरे के सभी पोर्स खुल जाते हैं और उनमें से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है, जिससे चेहरे पर जमा अतिरिक्त तेल साफ हो जाता है। क्लीजिंग कराते समय इस बात का ध्यान रखें कि चेहरे को गुनगुने पानी से ही धोएं।

2.टोनिंग (Toning):- क्लींज़िंग करने के बाद टोनिंग का उपयोग करना चाहिए इसे करने से पोर्स बंद हो जाते हैं और वापस गंदगी चेहरे पर जमा नहीं हो पाती।

3.स्क्रीबिंग (Scribing):- ऑयली स्किन के कारण नाक के आसपास ब्लैकहेड्स हो जाते हैं। इन्हें हटाने के लिए ब्लैकहेड रिमूवर स्क्रब का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न सिर्फ ब्लैकहेड्स साफ होंगे, बल्कि कील-मुंहासों से भी छुटकारा मिल जाएगा।

4. माश्चराइज़र(Moisturizer):- किसी भी अच्छी कंपनी की माश्चराइज़र क्रीम लगा सकते हैं। इससे त्वचा हाइड्रेट रहती है।

5.सनस्क्रीन (Sunscreen) :- सूरज के संपर्क में आते ही त्वचा ऑयली हो जाती है। इसलिए, ऐसी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, जो त्वचा को ऑयली होने से बचा सके।

Tagged : / /