बालों की बढ़वार(hair growth)

हर कोई चाहता है कि उसके बाल काले, घने और चमकदार हों। महिलाएं तो इस मामले में बहुत ज़्यादा संवेदनशील होती हैं। उन्हें काले, घने और चमकदार बालों के साथ-साथ लंबे बालों की चाहत होती है।

बालों को तेज़ी से बढ़ाने के तरीके(ways to grow hair fast)

दरअसल, सही जानकारी के अभाव में बाल बढ़ाने के कुछ उपायों को अपनाने की वजह से बालों को लाभ के बजाय नुकसान हो सकता है। इसलिए, आज इस लेख में हम बाल लंबे करने के कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बालों के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ आज़माने में भी आसान हैं।

बाल लंबे ना होने के मुख्य कारण(Main reasons for not having long hair)

इससे पहले कि आप बाल लंबे करने के उपायों के बारे में जानें, आपके लिए बाल झड़ने या कमज़ोर होने के कारणों को जानना ज़रूरी है।

  • बढ़ती उम्र
  • आनुवंशिकता
  • गलत खान-पान या ज़्यादा बाहरी खाना
  • खाने में पोषक तत्वों की कमी
  • तनाव
  • हार्मोनल संतुलन में गड़बड़ी
  • मौसम या पर्यावरण में बदलाव
  • दवाओं का ज़्यादा सेवन

बाल बढ़ाने के घरेलू उपाय (Home remedy for hair growth)

1. प्याज़ का रस (Onion juice)

सामग्री(Material):- दो प्याज़ , रुई का टुकड़ा

इस्तेमाल का तरीका(Method of use):- प्याज़ को बारीक़ काटकर उसका रस निकाल लें। इस रस को रुई के टुकड़े की मदद से बालों में लगाएं। रस को पंद्रह मिनट तक बालों में लगा रहने दें और उसके बाद शैम्पू से बाल धो लें।प्याज़ का रस सल्फ़र से भरपूर होता है, जो ऊत्तकों में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इससे बालों को फिर से बढ़ने में मदद मिलती है। इस नुस्खे को हफ़्ते में एक या दो बार आज़माएं।

सावधानी(Caution) :-  प्याज़ का रस पूरे बाल में लगाने से पहले, इसे अपने सिर के छोटे-से हिस्से में लगाकर देखें। अगर आपको सर के उस हिस्से में खुजली या जलन महसूस होती है, तो फिर इस नुस्खे का इस्तेमाल ना करें।

2. कैस्टर ऑयल या अरंडी का तेल(Castor oil or castor oil)

सामग्री (Material) :-कैस्टर ऑयल , हल्के गुनगुने पानी से तौलिए को भिगो लें , नींबू का रस

इस्तेमाल का तरीका(Method of use) :- गुनगुने कैस्टर ऑयल से बालों में मालिश करने के बाद, 20 मिनट के लिए सर पर तौलिया लपेट लें। आप चाहें तो तेल की चिपचिपाहट को दूर करने के लिए उसमें एक-दो बूंद नींबू का रस मिला लें।बालों के प्राकृतिक उपचार के लिए कैस्टर ऑयल को सबसे फ़ायदेमंद तेलों में से एक माना जाता है। कैस्टर ऑयल को लगाने से बाल घने और मुलायम होने के साथ-साथ तेज़ी से बढ़ते हैं। यह तेल बालों को नमी देता है और दो मुंहे बालों को कम करता है। (2) अच्छे नतीजे पाने के लिए, हफ़्ते में दो बार बालों में कैस्टर ऑयल लगाएं।

सावधानी(Caution) :-अगर आपको कैस्टर ऑयल से एलर्जी है या इसे लगाने पर आपको खुजली या जलन होती है, तो इस नुस्खे का इस्तेमाल ना करें।

3. अंडा(Egg)

सामग्री (Material) :- एक अंडा

इस्तेमाल का तरीका (Material) :- कच्चे अंडे को फेंटकर बालों में लगा लें और फिर थोड़ी देर बाद शैम्पू से धो लें।अंडे में प्रोटीन, सल्फ़र, ज़िंक, आयरन, आयोडीन और फ़ॉस्फ़ोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इससे मिलने वाला प्रोटीन बालों के लिए काफ़ी लाभदायक होता है। इसके अलावा, अंडे में मौजूद विटामिन ए, ई और डी बालों की चमक बढ़ाते हैं और उनका गिरना कम करते हैं। आप हफ़्ते में एक या दो बार इस नुस्खे का इस्तेमाल कर सकते हैं।

4. एलोवेरा(Aloe vera)

सामग्री(Material) :- एलोवेरा

इस्तेमाल का तरीका (Material) :- एलोवेरा को काटकर उसके अंदर का द्रव या जैल निकाल लें और उसे अपने बालों में लगाएं। जैल लगाने के एक घंटे बाद अपने बालों को शैम्पू से धो लें। एलोवेरा में मौजूद पोषक तत्व बालों का आकार बढ़ाने में और उनकी चमक को बरकरार रखने में मदद करते हैं ।

सावधानी (Caution) :-अगर बालों पर एलोवेरा लगाने के बाद आपको खुजली महसूस हो, तो तुरंत अपने बाल धो लें।

5. विटामिन(Vitamin)

सामग्री(Material) :- विटामिन-सी या विटामिन-ई की गोली , नारियल तेल

इस्तेमाल का तरीका(Method of use) :- विटामिन-सी या ई की गोली को नारियल तेल में मिलाकर उससे बालों की मालिश करें। मालिश खत्म होने के थोड़ी देर बाद बालों को धो लें। विटामिन-ई और सी में एंटीऑक्सिडेंट के गुण पाए जाते हैं। ये विटामिन ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके बालों की सेहत में सुधार लाते हैं।

6. आंवला (Gooseberry)

सामग्री (Material) :- दो चम्मच आंवला पाउडर या आंवले का रस , दो चम्मच नींबू का रस

इस्तेमाल का तरीका(Method of use) :-आंवला पाउडर या आंवले के रस को नींबू के रस के साथ मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को अपने बालों में लगाकर कुछ देर सूखने दें। इसके बाद बालों को गुनगुने पानी से धो दें। आंवले में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-सी मौजूद होते हैं, जो बालों को स्वस्थ रखने और उनका आकार बढ़ाने में मदद करते हैं। बालों की सेहत अच्छी बनाए रखने के लिए महीने में एक बार इस नुस्खे का इस्तेमाल करना चाहिए।

7. मेथी (Fenugreek)

सामग्री(Material) :- एक चम्मच मेथी दाना , नारियल तेल

इस्तेमाल का तरीका(Method of use) :-एक जार में मेथी के दाने और नारियल तेल को कुछ हफ़्तों तक बंद करके रख दें। इसके बाद तैयार हुए मिश्रण को बालों में लगाएं। कुछ घंटों बाद बालों को शैम्पू से धो लें। मेथी के बीज में ऐसे हार्मोन होते हैं, जो बालों को तेज़ी से बढ़ने में मदद करते हैं। साथ ही, मेथी के बीज में प्रचूर मात्रा में प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड भी पाए जाते हैं, जो बालों को टूटने से रोकते हैं।

बालों की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक तेल (Essential oils to promote hair growth)

प्याज बाल विकास तेल, बादाम, अरंडी, जोजोबा, जैतून और नारियल तेल जैसे पौष्टिक तेलों का मिश्रण। आदि अंदर से बालों को मजबूत बनाता है और बाहर की तरफ shinier होता है।
सभी प्राकृतिक सामग्रियों से बना, हेयर ऑयल कोई नुकसान नहीं करता है और सभी प्रकार के बालों के लिए उपयुक्त है। किसी भी प्रकार के बालों पर, घुंघराले, सीधे, बनावट वाले, मोटे, पतले, महीन, मोटे, रंग के उपचार आदि के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसे किसी भी प्रकार के स्कैल्प पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

Biotique Bio Bhringraj Fresh Growth Therapeutic Oil (बायोटीक जैव भृंगराज ताजा विकास चिकित्सीय तेल)

मात्रा (quantity): 120 मिलीलीटर

आइटम फॉर्म (Item form): तेल खोपड़ी को पोषण देता है| ताजा विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बाल किस्में मजबूत भूरापन कम करने में मदद करें|

कैसे उपयोग करें(How to use): सूखे बालों और खोपड़ी के लिए उदारतापूर्वक लागू करें। परिपत्र गति के साथ धीरे से मालिश करें। आधे घंटे के लिए छोड़ दें। ठंडे पानी से धो लें|

बायोटीक बायो नीम मारगोसा एंटी डैंड्रफ शैम्पू और कंडीशनर (Biotique Bio Neem Margosa Anti Dandruff Shampoo & Conditioner)

मात्रा (quantity): 340 मिलीलीटर
मार्गोसा एक बड़ा सदाबहार पेड़ है|
जो पूरे भारत में पनपता है|
महान औषधीय गुणों को दर्शाता है|
रूसी के साथ जुड़े सूखापन, फड़कन और खुजली को खत्म करता है|

बालों की वृद्धि को बढ़ावा देने क्या करें? (What to do to promote hair growth)

नियमित रूप से बालों में तेल मालिश करें। हफ़्ते में कम से कम दो बार अपने बालों की जड़ों में तेल लगाकर सिर की मालिश ज़रूर करें।पूरी नींद लें। नींद पूरी नहीं होने पर आप तनाव और चिड़चिड़ाहट के शिकार हो सकते हैं और इसकी वजह से आपको बाल झड़ने की शिकायत हो सकती है।रात को बाल बांध कर सोएं। ऐसा करने से आपके बाल आपस में रगड़ खाकर नहीं टूटेंगे।
नियमित रूप से बालों की ट्रिंमिंग कराएं। हर दो-तीन महीने में बालों को हल्का-हल्का कटवाते रहें ताकि आपको दो-मुंहे बालों की समस्या ना हो।

बालों की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए क्या ना करें? (What not to do to promote hair growth)

  • शैम्पू करने के तुरंत बाद बालों को ना झाड़ें। भीगे बालों को झाड़ने से वे कमज़ोर होकर टूट सकते हैं।
  • ज़्यादा शैम्पू ना करें। ज़्यादा शैम्पू करने से बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। इसलिए, हफ़्ते में दो से ज़्यादा बार शैम्पू ना करें।
  • बाल ज़्यादा ज़ोर से ना झाड़ें।
  • बालों को गर्म पानी से ना धोएं।
  • रात को बाल खुले रखकर ना सोएं।

बालों को बढ़ाने के लिए योगासन (Yogasana for hair growth)

योग की मदद से भी बालों स्वस्थ रखा जा सकता है। नीचे हम कुछ ऐसे आसनों के नाम बताने जा रहे हैं, जिन्हें बालों की सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद माना जाता है|

  1. सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) :- सुबह उठकर सूर्य नमस्कार की मुद्रा धारण करके योगाभ्यास करें। ऐसा आप पांच से दस मिनट तक करें।
  2. फ़ायदा(Profit) :- इस आसन को करने से ना सिर्फ़ पेट की चर्बी कम होती है, बल्कि इससे पूरे शरीर का रक्त प्रवाह भी सही होता है और बाल भी घने होते हैं।
    हमारे व्यक्तित्व को खूबसूरत और आकर्षक बनाने में हमारे बालों की भूमिका काफ़ी अहम है। उम्मीद है कि इस लेख में बालों को काला, लंबा और घना बनाने के जो घरेलू नुस्खे हमने बताए हैं, उनको आज़माने से आपको मनचाहा लाभ मिलेगा। अंत में हमारी आपसे गुज़ारिश है कि अगर आपका कोई दोस्त या रिश्तेदार भी बालों से जुड़ी समस्या से जूझ रहा है, तो उसके साथ ये लेख शेयर करना ना भूलें।
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रूखी त्वचा की देखभाल (Dry Skin Care)

सामान्य स्वस्थ त्वचा पर प्राकृतिक वसा की पतली परत होती है जो त्वचा में नमी बनाए रखती है जबकि रूखी त्वचा के धब्बे शरीर पर रह जाते हैं| कुछ रोगों जैसे डायबिटीज, थायराइड व कुपोषण आदि के कारण त्वचा रूखी हो जाती है|

रूखी त्वचा की की वजह(Causes of dry skin)

ड्राई स्किन समस्या की वजह है सर्दियों का मौसम। जितनी भी बार आप अपनी त्वचा को साबुन या फेसवॉश से साफ करती हैं वह उतनी ही रूखी होती जाती है, क्योंकि क्लींजिंग करने के बाद त्वचा की कुदरती नमी नष्ट हो जाती है। त्वचा पर इसका असर दिखाई देना शुरू हो जाता है। त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। होंठ फटने लगते हैं और पैरों की एड़ियां रूखी और बेजान हो जाती हैं।

Nivea फेस वाश, मिल्क डिलाइट्स मॉइस्चराइजिंग हनी, ड्राई स्किन(Nivea Face Wash, Milk Delights Moisturizing Honey, Dry Skin)

शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र के रूप में कार्य करता है, जो आपकी शुष्क त्वचा को पोषण देता है|
दूध और शहद आपको समय के साथ नरम और कोमल त्वचा देते हैं जो जीवंत और जीवंत लगती है|
फेस वॉश प्रभावी रूप से आपकी त्वचा को साफ़ करता है, जिससे आपको तुरंत मॉइस्चराइजेशन मिलता है जो दिन भर रहता है|

पॉन्ड्स व्हाइट ब्यूटी स्पॉट कम फेयरनेस फेस वाश(Pond’s White Beauty Spot Less Fairness Face Wash)

  • मृत त्वचा निकालना
  • स्पॉट कम फेयरनेस
  • काले धब्बे हटाने
  • फेयरनेस फेसवॉश
  • चिकित्सकीय सिद्ध फेसवॉश
  • नवीन फ़ॉर्मूला

Olay Day Cream (Olay Day Cream Total Effects)

सामान्य त्वचा के लिए Olay कुल प्रभाव 7 1 एंटी एजिंग त्वचा क्रीम में। इसमें Spf 15. नेट वजन: 50G है। यह क्रीम त्वचा को कम करती है, त्वचा को रंग देती है, लाइनों और झुर्रियों की उपस्थिति को कम करती है, त्वचा को चिकना करती है और मॉइस्चराइज करती है, त्वचा की टोन को बढ़ाती है, छिद्रों को कम करती है और आपकी त्वचा को चमकदार बनाती है।

लक्मे एब्सोल्यूट परफेक्ट रेडिएशन स्किन  क्रीम(Lakme Absolute Perfect Radiance Skin Cream)

  • त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है
  • त्वचा की मरम्मत करता है
  • उज्ज्वल चमक त्वचा देता है
  • त्वचा की टोन को हल्का करता है
  • त्वचा की टोन को मिटाता है

रूखी त्वचा की देखभाल के  घरेलू  उपचार (Dry Skin Care Home Remedies)

1. व्यायाम(Work out) :- जब आप व्यायाम करते हैं तब आपको पसीना होता है। इससे आपके रोम छिद्र खुल जाते हैं और यह अंदर से प्राकृतिक तेल को बाहर निकालता है। यह तेल आपके चेहरे को नमी प्रदान करता है। जिससे यह आपकी रूखी त्वचा को रोकता है|

2. शहद (Honey):- रूखी त्वचा के लिए शहद बेहद ही फायदेमंद है। अकसर मौसम के बदलने के कारण त्वचा रूखी हो जाती है। ऐसे में चेहरे पर शहद लगाने से त्वचा को नमी मिलती है। आप इसका इस्तेमाल रोज कर सकते है। बस इसे चेहरे पर 10 मिनट लगा कर रखे और बाद में चेहरा धो ले। इसका नियमित रूप से प्रयोग करने पर आपको खुद ही परिवर्तन नजर आएगा।

3. दूध(Milk) :- रूखी त्वचा को अच्छा बनाने के लिए आधा कप ठंडे दूध में जैतून के तेल की कुछ बूंदें डालिए, उसके बाद इन दोनों को एक बोतल में डालकर हिलाए| फिर इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा में निखार आएगा।

4. हर्बल चाय(Herbal tea) :- नमी की कमी के कारण त्वचा की कोमलता नष्ट हो जाती है। इसलिए इससे बचने के लिए हम गर्म पदार्थ जैसे हर्बल टी आदि का दिन में कई बार सेवन कर सकते हैं। अदरक और नींबू के मिश्रण से बनी चाय का सेवन करने से त्वचा हमेशा दमकती रहती है इसका नियमित सेवन करने से पाचन तंत्र पाचन तंत्र भी ठीक रहता है |

5. तिल का तेल (Sesame oil) :- एक चम्मच तिल के तेल में थोडी-सी क्रीम या दूध की मलाई मिलाकर अच्छी तरह फेंट लीजिए, फिर उसे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 20 मिनट हल्का मसाज करने के बाद चेहरे को सादे पानी से धो लीजिए। इससे आपका चेहरा नर्म, मुलायम और चमकदार हो जाएगा। आप चाहे तो ऑलिव ऑयल का भी इस्तेमाल कर सकते है।

6. बादाम का तेल(Badam oil) :- बादाम का तेल और शहद बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर नाखूनों में लगाकर मसाज करें। 15 मिनट बाद गीले तौलिए से पोंछ लीजिए, रूखी त्वचा में निखार आएगा। इसके अलावा रात को सोने से पहले दूध में एक चम्म्च बादाम का तेल डालकर पिएं इससे बहुत फायदा होगा।

7. नारियल का तेल(Coconut oil) :- नारियल तेल में स्किन रिलेटेड हर प्रॉब्लम को सॉल्व करने का गुण है सबसे ज्यादा इफेक्टिव है यह ड्राई स्किन वालों के लिए। नारियल का तेल लगाए एक दिन या कुछ घण्टे रहने दे उसके बाद नहा लें आपको इसका असर पहले दूसरे दिन से महसूस होने लगेगा।

8. बेसन(Gram Flour) :- एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच शहद और थोड़े से दूध में दो बड़े चम्मच बेसन मिलाकर तैयार करें। नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर इस पैक को चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर गर्म पानी से धो लें। इससे लगाने से धीरे धीरे आपका रंग भी निखरने लगेगा। बेसन ड्राई स्किन को हाइड्रेट करने में मदद करता है। इसके अलावा झुर्रियों को दूर करने में भी इसका उपयोग फायदेमंद है|

9. सिरका(Vinegar) :- आपकी त्वचा ज्यादा रूखी है और उसमें जलन भी होती है, तो ऐसे में 2 चम्मच सिरके को एक मग पानी में मिलाएं और नहाने के बाद जहां-जहां रूखी त्वचा हो वहां लगाइए, इससे जल्द ही फायदा होगा।

10. ध्यान रहे(Keep in mind) :- चेहरे को हल्के हाथों से साफ करें। सर्दियों में त्वचा के मृत कोशों को हटाने के लिए तेजी के साथ-साथ जल्दी-जल्दी स्क्रब करने से बचें, ताकि झुर्रियां न पड़ें।

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गर्मी में त्वचा की देखभाल (Summer skin care)

मौसम के साथ-साथ त्वचा में बदलाव आता है। इसलिए गर्मी, बरसात और ठंड के मौसम के अनुरूप अलग-अलग ढंग से त्वचा की देखभाल की आवश्यकता होती है।

गर्मी का मौसम(Summer season)

  • गर्मी के दिनों में तेज गर्म हवाएँ त्वचा को काफी नुकसान पहुँचाती हैं। इस मौसम में पसीने की चिपचिपाहट का भी सामना करना पड़ता है।
  • गर्मी के मौसम में पसीना अधिक निकलने की वजह से घमौरी, खाज, खुजली आदि की शिकायत भी उत्पन्न हो जाती है।
  • तेज धूप में निकलने पर त्वचा पर सनबर्न, पिगमेंटेशन आदि की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।
  • अधिक गर्मी और पसीने की वजह से बगलों व जाँघों में संक्रमण हो जाता है।

बचाव के उपाय(Prevention Measures)

  • दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से स्नान करें।
  • साफ, धुले, सूती कपड़े पहनें। अंतर्वस्त्र दो बार बदलें।
  • दिनभर में 3-4 बार चेहरे को फेसवॉश से साफ करें।
  • ककड़ी, खीरा, संतरा या मौसम्बी का रस निकाल लें। इसे फ्रिज में जमने के लिए रख दें। इसके क्यूब को चेहरे पर मलें। चेहरा चमक उठेगा। रोमकूपों और मुँहासों के लिए भी लाभदायक होता है।
  • पानी में थोड़ी-सी फिटकरी मिलाकर इसे आइस क्यूब में रखकर फ्रिज में जमा लें। यह क्यूब चेहरे पर रगड़ने से ताजगी मिलती है।
  • गर्मी के दिनों में ब्लीचिंग न करवाएँ। इससे त्वचा काली हो जाने का डर रहता है।

 सनबर्न (Sunburn)

सनबर्न लोशन में अक्शाइल मेथॉक्सीसीनमेट (Methoxycinnamate),
ऑक्सीबेन्ज़ोन (Oxybenzone) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड (
Titanium dioxide ) शामिल हैं। यह सूर्य की पराबैंगनी विकिरणों के हानिकारक प्रभावों से त्वचा को बचाता है सनबर्न लोशन में एक यूवीए और यूवीबी सुरक्षा कारक है। ऑक्टिल मेथोक्सीसीनमाइट (Octyl methoxynimite) एक सूर्य अवरुद्ध करने वाला एजेंट है जो यूवी किरणों को अवशोषित करता है और निशान को कम करने में मदद करता है।

सनबर्न क्या है?(What is sunburn)?

त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है, जो सूरज की किरणों के संपर्क में आता है. सूर्य की पराबैंगनी किरणें त्वचा में प्रवेश करती हैं और त्वचा में मेलेनिन के निर्माण में मदद करती हैं. मेलेनिन रंगों का वह द्रव्य है जो त्वचा को कालापन देता है. शरीर में मेलेनिन की अधिक मात्रा त्वचा को काला करती है. सूरज के विकिरण के संपर्क में आने से भी शरीर को विटामिन डी और गर्मी पैदा करने में मदद मिलती है सभी उम्र, जाति और लिंग के लोग सनबर्न की स्थिति में आ सकते हैं. सभी मौसमों में जब सूरज की किरणे कम होती हैं तब भी यह स्थिति हो सकती है

सनबर्न के लक्षण और संकेत क्या हैं? (What are the symptoms and signs of sunburn)?

सनबर्न त्वचा लाल होता है, त्वचा में दर्द होता है और आमतौर यह छूने में गर्म लगता है. प्रायः, यह तब दिखता है जब त्वचा पराबैंगनी (यूवी) किरणों या कृत्रिम रोशनी जैसे कि सनलैम्प्स के संपर्क में अधिक समय तक रहती है. सनबर्न के संकेतों में शामिल हैं:

  • त्वचा पर गुलाबीपन या लालिमा
  • दर्द, खुजली और सूजन
  • छोटे आकार के द्रवयुक्त फफोले
  • सिरदर्द, बुखार, मतली और थकान

सनबर्न बीमारी के लक्षणों को बढ़ाता है जैसे दाद, एक्जिमा, जिल्द की सूजन और एरिथेमेटोसस. गंभीरता के कारण मेलेनोमा, त्वचा कैंसर, समय से पहले बुढ़ापा, त्वचा की झुर्रियां, डिहाइड्रेशन, थकावट और हीट स्ट्रोक भी हो सकता है

सनबर्न किन कारणों से होता है?(What causes sunburn)?

पराबैंगनी बी से संबंधित पराबैंगनी सौर विकिरण या फोटो खींचने से त्वचा में जलन होती है. अगर त्वचा धूप में बहुत अधिक उजागर होती है तो स्किन कैंसर होने की संभावना होती है. त्वचा में मेलेनिन वर्णक त्वचा के रंग को सामान्य रखने में मदद करता है. जब त्वचा बहुत ज्यादा धूप या यूवी किरणों के संपर्क में आती है तब भी यह तेज हो जाता है और शरीर की सुरक्षा करता है.

सनबर्न के लिए सबसे अच्छा इलाज क्या है?(What is the best treatment for sunburn)?

यदि किसी व्यक्ति को सनबर्न हो जाता है तो त्वचा को ठीक होने में लगभग 2 सप्ताह का समय लगता हैं. इसके इलाज से केवल त्वचा को आराम मिलता है लेकिन त्वचा ठीक नहीं होती है. उपचार के दौरान दर्द, सूजन और बेचैनी से राहत मिल सकती है|

  • हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम: यह खुजली को कम करने में मदद करता है|
  • कोल्ड शॉवर्स: ठंडे स्नान या शॉवर लेने से दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है|
  • एलोवेरा मॉइस्चराइजर: एलोवेरा युक्त मॉइस्चराइजर का उपयोग छीलने वाली त्वचा पर किया जा सकता है|
  • रीहाइड्रेट: अतिरिक्त पानी पीने से भी प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है|

सनबर्न से बचाव के उपाय क्या हैं?(What are the measures to prevent sunburn)?

हानिकारक सूर्य विकिरणों से खुद को बचाना, बाहर निकलने पर धूप का चश्मा और कैप का उपयोग करके बचा जा सकता है. इन सभी निवारक उपायों से एक व्यक्ति को इससे बचने में मदद मिल सकती है और अगर किसी भी तरह का नुकसान हुआ है तो आगे के एपिसोड को भी रोका जा सकता है.

  • सुबह 10 बजे – शाम 4 बजे के दौरान धूप में बाहर जाने से बचें|
  • ऐसे कपड़े पहनें जो त्वचा को यूवी किरणों से बचाने और ब्लॉक करने में मदद करें|
  • यूवी प्रोटेक्शन वाले धूप के चश्मे जरूर पहने|
  • एसपीएफ़ 30 या उच्चतर का सनस्क्रीन लागू करें और इसे हर 2 घंटे के भीतर पुन: लागू करें.
  • ज्यादा धूप में बाहर जाने से बचें|

गर्मी में त्वचा की देखभाल के घरेलू उपाय(Home remedies for skin care in summer)

आधा खीरा लेकर उसे अच्छे से पीस ले फिर इसमें एलोवेरा का रस मिला लें अब इसे चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाकर रखें| फिर इसे ठंडे पानी से धो लें जिससे त्वचा का रूखापन दूर होता है और त्वचा में चमक आती है |

  • गर्मी में अधिक से अधिक पानी का सेवन करें|
  • गर्मी में ताजे फलों का और जूस का सेवन करें |
    एक टब में गुनगुना पानी लें और उसमें छह कप दूध मिलाएं, इसमें पैर को डुबोकर रखें. यह करने से शरीर का तापमान कम होगा और त्वचा मुलायक होगी|
  • धूप में निकलने से पहले 30 SPF वाला सनस्क्र‍ीन का इस्तेमाल करें. लेकिन ध्यान रहे कि इसे घर से निकलने के 15 मिनट पहले लगाना चाहिए| सनस्क्रीन लगाने के तुरंत बाद धूप में ना निकलें. दिन में तीन बार सनस्क्रीन का प्रयोग करें |
  • अगर धूप के कारण सनबर्न हो गया है तो सनबर्न स्क‍िन के लिए एंटीऑक्सीडेंट वाले हल्के लोशन का इस्तेमाल करें. इसके इस्तेमाल से त्वचा ठीक होगी.
  • टीवी में ऐड देखकर या किसी के सलाह पर अपनी त्वचा के साथ एक्सपेरिमेंट ना करें. नया स्किन प्रोडक्ट आजमाने से पहले अपनी त्वचा के बारे में जान लें. इसमें कोई त्वचा विशेषज्ञ आपकी मदद कर सकता है. आप त्वचा विशेषज्ञों के पास जाकर गर्मियों में इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट्स की जानकारी लें |
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काले घेरे कैसे साफ़ करें (How to clear dark circles)

डार्क सर्कल यानि आंखों के नीचे काले घेरे ज्यादा तनाव और चिंता की वजह से, ज्यादा टीवी देखने की वजह से होते हैं|

डार्क सर्कल्स क्यों होते है? (Why do dark circles occur)?

डार्क सर्कल होने के और भी बहुत से कारण होते हैं जिसमें अत्यधिक तनाव में रहना, थकावट होना, पर्याप्त नींद और आराम ना मिल पाना, आयरन की कमी, सही खानपान न होना, धूप व प्रदूषण में ज्यादा रहना, किसी क्रीम, कॉस्मेटिक या दवाई से एलर्जी, उम्र बढ़ना या फिर भारी फ्रेम वाले चश्मे पहनना शामिल है|

आंखों के नीचे काले घेरे क्यों बनते हैं?(Why dark circles are formed under the eyes)?

आंखें न सिर्फ जीवन के लिए अनमोल हैं बल्की सुंदरता की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन जब आंखो के नीचे काले धब्बे बन जाते हैं तो यह सुंदरता को बिगाड़ देते हैं। आंखों के नीचे काले घेरे होने के कई कारण हो सकते हैं। इस लेख के माध्यम से मैं आपको आंखों के नीचे काले घेरे होने के कारण तथा इसके रोकथाम के तरीकों के बारे में बता रहे हैं। आंखों के नीचे काले घेरे एक आम समस्या है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है जैसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना, नींद न आना, मानसिक तनाव या फिर बहुत ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने आदि से। आंखओं से नीचे काले घेरे हो जाने के कारण व्यक्ति थका हुआ होता है।इसलिए यह जरूरी है कि आप इनसे छुटकारा पाने की तरीके जान लें।

आंखों के नीचे काले घेरे होने के कारण (Due to dark circles under the eyes)

1. हीमोग्‍लोबिन की कमी :- जिन महिलाओं में हीमोग्‍लोबिन का स्‍तर 10 से कम होता है उनमें आंखों के नीचे काले घेरे होने की संभावना अधिक होती है। यदि हीमोग्लोबिन का स्तर दवा व आहार से नियंत्रित कर लिया जाए, तो काले घेरे की समस्या स्वयं चली जाती है।

2. कोलेजेन की कमी :- आंखों के नीचे की त्वचा काफी पतली व संवेदनशील होती है। उम्र के बढ़ने के साथ कोलेजेन के कम बनने के कारण कई बार त्वचा पतली होने लगती है| त्वचा के इस तरह पतले हो जाने से आंखों के नीचे लालिमा लिये हुए नीली रक्त वाहिनियां दिखने लगती हैं। त्वचा के नीचे की रक्त वाहिनियां ही काले घेरे की वजह बनती हैं।

3. पिगमेंटेशन के कारण :- पिगमेंटेशन की समस्या के कारण त्वचा टोन असमान बनाती हैं। और यह असमान रंगत आंखों के नीचे काले घेरों का कारण बनती हैं।

4. एलर्जी :- एलर्जी के कारण भी समस्या हो सकती है। यह किसी सामग्री या खान-पान की चीज के प्रति रिएक्शन है जो आंख में खारिश पैदा करता है। और आंखों के आस-पास की त्वचा को रगड़ने या खरोंचने से भी डिस्कलरेशन हो जाता है।

5. आनुवांशिक कारणों से :- आनुवांशिकता कारणों से भी काले घेरे की समस्या हो सकती है। आंखों के नीचे काले घेरे जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार में चलती रही हो। चूंकि त्वचा की पारदर्शिता के कारण रक्त वाहिनियां दिखती हैं इनमें होकर गुजरता रक्त इसे नीली आभा प्रदान करता है। अनेक मामलों में त्वचा की यह बनावट आनुवंशिक कारणों से होती है।

6. सन एक्‍सपोजन :- कई बार यह समस्या सन एक्सपोजर के कारण हो जाती है। सन एक्सपोजर से मैलेनिन के बनने में बढ़ोत्तरी हो जाती है जिससे आंखों के नीचे काले घेरे बन सकते हैं।

7. दवाएं के कारण :- कुछ दवाएं रक्त वाहिनियों को चौड़ा करती हैं जो डार्क सर्किल्स का कारण बनती हैं। ब्लड प्रेशर और नसल डिकंजेशन ड्रग्स इसके उदाहरण माने जा सकते हैं।

8. आयरन की कमी :- एनीमिया त्वचा को निस्तेज बनाता है जिससे आपकी त्वचा के नीचे की रक्त वाहिनियां दिखने लगती हैं।

9. नींद की कमी :- आंखों के नीचे काले घेरे होने का एक बड़ा कारण नींद की कमी भी है। नींद न आने और डिहाईड्रेशन से त्वचा निस्तेज और शिकनयुक्त हो सकती है जिससे आपकी आंखों के नीचे की रक्त वाहिनियां डार्क डिस्कलरेशन के रूप में दिखने लगती हैं।

आंखों के नीचे काले घेरों का उपचार (Treatment of dark circles under the eyes)

  • 1 टमाटर, 1 चम्‍मच नींबू का रस, चुटकी भर बेसन और हल्‍दी लेकर पेस्‍ट तैयार कर लें। अब इस गाढे पेस्‍ट को अपनी आंखों के चारों ओर लगाएं और 15 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में 3 बार करें।
  • चंदन का तेल और जैतून का तेल मिलाकर आंखों के काले घेरों पर लगाने से कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे डार्क सर्कल्स गायब होने लगते हैं।50 ग्राम तुलसी के पत्ते, 50 ग्राम नीम और 50 ग्राम पुदीने को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा हल्दी पावडर और गुलाब जल मिलाएं। अब इस लेप को डार्क सर्कल्स पर लगाएं।
  • आंखों के काले घेरे को मिटाने के लिए कच्चे दूध में चुटकी भर नमक मिलाकर रूई की सहायता से आंखों के नीचे के काले घेरों पर लगाएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क महसूस होगा।
  • खीरे या आलू के रस से भी काले घेरे दूर होते हैं। इसके लिए खीरे या आलू में से किसी को भी लेकर क्रश करके आंखो के ऊपर रखें। कुछ देर तक आंखें बंद रखने के बाद डार्क एरिया पर इसे हल्के-हल्के से घुमाएं। इससे आंखों के आसपास का थुलथुलापन कम होगा साथ ही कालापन भी घटेगा।
  • इस्तेमाल किये गए ठंडे टी-बैग्स का उपयोग भी किया जा सकता है। टी-बैग्स में मौजूद तत्व टैनिन आंखों के आसपास की सूजन और डार्कनेस को कम करता है।

डार्क सर्कल्स, झुर्रियाँ, पफी आइज़ के लिए RE ‘EQUIL अंडर आई क्रीम आंखों के नीले और लाल पेरिऑर्बिटल पिगमेंटेशन के तहत मरम्मत को काले घेरे के रूप में भी जाना जाता है।

संभवतः 1.तनाव और समय से पहले बूढ़ा होने के संकेत कम कर देता है।
2. लचक, कश, कौवा के पैर और झुर्रियों को कम करता है।
3. त्वचा पर कठोर होने के बिना, आंखों के नीचे के क्षेत्र को उठाता है।

आँख की देखभाल के लिए DCR डार्क सर्कल रिमूवर लोशन स्पेशल (DCR Dark Circle Remover Lotion Special for Eye Care)

  • DCR डार्क सर्कल रिमूवर लोशन ट्रीटमेंट केवल त्वचा की रक्षा के लिए काम करता है, लेकिन यह आपकी आँखों की चमक को बहाल करने में भी मदद करता है और चमकदारता और चमक में सुधार करता है।
  • डार्क सर्कल्स और रिंकल्स के लिए यह लोशन फिर से जीवंत हो जाता है, त्वचा के नीचे की नाजुक त्वचा के लिए टोन और टेक्सचर को बढ़ाता है।
  • यह लोशन आपकी आंखों के चारों ओर आपकी त्वचा में रैडिएंस ग्लो वापस लाता है।

डार्क सर्कल के मुख्य कारण (Main causes of dark circles)

  • कई लोगों में काले घेरे यानि डार्क सर्कल जेनेटिक होते हैं और उनकी कोई ठोस वजह नहीं होती। ऐसे डार्क सर्कल को पूरी तरह से खत्म करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन कुछ
  • घरेलू तरीकों के जरिए इन डार्क सर्कल्स को लाइट किया जा सकता है।
  • कई लोगों को ज्यादा टीवी और मोबाइल फोन देखने की आदत होती है। ज्यादा फोकस करने की वजह से भी आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं।
  • पूरी तरह से नींद ना ले पाना और थकान भी डार्क सर्कल होने का एक बहुत बड़ा कारण है। आमतौर पर लोगों को 7-8 घंटे की नींद जरूरी होती है, लेकिन रोजमर्रा की भागदौड़ में बहुत ही कम ऐसा हो पाता है और नींद की कमी की वजह से डार्क सर्कल हो जाते हैं।
  • कई लोगों को मेकअप करने का बहुत शौक होता है खासकर लड़कियों को। कुछ कॉस्मेटिक्स ऐसे होते हैं जिन्हें लगाने से स्किन पर एलर्जी हो जाती है और बाद में इसी वजह से डार्क सर्कल हो जाते हैं।
  • शरीर में अगर पानी की कमी है तो भी डार्क सर्कल यानि आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं। दरअसल शरीर में पानी की कमी से ब्लड सर्कुलेशन सही नहीं होता और ना ही शरीर की गंदगी साफ होती है, इसकी वजह से मुंहासे और स्किन संबंधी बाकी परेशानियां तो होती ही हैं, डार्क सर्कल भी हो जाते हैं।
  • स्मोकिंग और शराब के सेवन से भी आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं। दरअसल हम जो भी खाते-पीते हैं उसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है।
  • ज्यादा धूप में रहने और काम करने की वजह से चेहरे पर पिगमेंटेशन की समस्या हो जाती है और आंखों के नीचे भी काले घेरे हो जाते हैं।
  • डार्क सर्कल यानि आंखों के नीचे काले घेरे होने का एक कारण बीमारियां भी हैं। बीमार होने की वजह से लोग सही ढंग और स्वस्थ खा-पी नहीं पाते जिसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। कमजोरी तो शरीर में आती ही है उसके साथ ही चेहरे का रंग भी सांवला हो जाता है और डार्क सर्कल्स की परेशानी भी हो जाती है।

डार्क सर्कल दूर करने के 5 आसान और घरेलू उपाय (5 easy and home remedies to remove dark circles)

बाजार में कई ऐसे रासायनिक उत्पाद मौजूद हैं जो डार्क सर्कल खत्म करने का दावा करते हैं लेकिन कई बार सेंसटिव स्क‍िन वाले इन उत्पादों को यूज नहीं कर पाते हैं. ऐसे में इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर डार्क सर्कल्स को दूर किया जा सकता है.

  1. डार्क सर्कल दूर करने के लिए टमाटर सबसे कारगर उपाय है. ये नेचुरल तरीके से आंखों के नीचे के काले घेरे को खत्म करने का काम करताहै. साथ ही इसके इस्तेमाल से त्वचा भी कोमल और फ्रेश बनी रहती है. टमाटर के रस को नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिलाकर लगाने से जल्दी फायदा होता है
  2. डार्क सर्कल दूर करने के लिए आलू का भी प्रयोग किया जा सकता है. आलू के रस को भी नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिला लें. इस मिश्रण को रूई की सहायता से आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे
  3. ठंडे टी-बैग्स के इस्तेमाल से भी डार्क सर्कल जल्दी समाप्त हो जाते हैं. टी-बैग को कुछ देर पानी में डुबोकर रख दें. उसके बाद इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. कुछ देर बाद इसे निकालकर आंखों पर रखकर लेट जाएं. 10 मिनट तक रोज ऐसा करने से फायदा होगा.
  4. ठंडे दूध के लेप से भी आंखों के नीचे का कालापन दूर हो जाता है. कच्चे दूध को ठंडा होने के लिए रख दें. उसके बाद कॉटन की मदद से उसे आंखों के नीचे लगाएं. ऐसे दिन में दो बार करने से जल्दी फायदा होगा.
  5.  संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर पीस लें. इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा में गुलाब जल मिलाकर लगाने से काले घेरे खत्म हो जाएंगे.
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वजन घटाने के टिप्स(weight loss tips)

मोटापा कम करने का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है कि आपको अपने शरीर में जमा कैलरी को उसी अनुपात में खर्च करनी होती है।

मोटापा कैसे होता है?(How is obesity)?

मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है।अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है।कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है।असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है।

वजन कम करने के लिए क्या खाना चाहिए?(What to eat to lose weight)?

  • आम और अनानास वजन घटाने के लिए लाभदायक फल है जिससे आपको पोषण मिलता है|
  • चीनी या मीठे की जगह शहद का उपयोग करना चाहिए|
  • मक्खन का उपयोग ना करके पीनट बटर का उपयोग करना चाहिए |
  • घर के बने दही का उपयोग करना चाहिए जो सेहत के लिए लाभदायक होता है
  • अखरोट का उपयोग करना चाहिए |

तेजी से घटाए अपना वज़न (Lose your weight fast)

1. खान–पान (food and drink ) :- वज़न बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण है हमारा खान-पान | यदि हम अधिक तला-भुना , फास्ट फूड , घी, ठंडा पेय आदि का सेवन करते हैं तो हमारे शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है |

2. निष्क्रिय होना(Become inactive) :- आपकी दिनचर्या ऐसी है की इसमें आपकी ज्यादा शारीरिक गतिविधियां नहीं होती है | जिससे आपका वजन बढ़ने लगता है ख़ास तौर पर जो लोग घर में ही रहते हैं या दिन भर कुर्सी पर बैठ कर ही काम करते हैं उनको दिन प्रतिदिन वजन बढ़ता रहता है| इसलिए हमें अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को जोड़ना चाहिए|

7 बातें जिनसे हम अपना वजन कम कर सकते हैं  (7 things we can lose weight):

1. साबुत अनाज खाएं (Eat Whole Grains):- हमें अपनी दिनचर्या में फास्ट फूड की अपेक्षा साबुत अनाज का उपयोग करना चाहिए जैसे- रोटियां, गेहूं की ब्रेड , कुकीज़ और दलिया से बने पोस्टिक तत्व का ही उपयोग करना चाहिए। होल ग्रेन शरीर को मेटाबोलाइज्ड (Metabolized) करने में अधिक हेल्प करते हैं और जल्दी पचते हैं। यह लंबे समय तक शरीर को एनर्जी देते हैं, जिससे सारे दिन आपकी बॉडी को एनर्जी मिलती है।

2. मानसिक तैयारी (Psychological Preparedness):- आपको अपने बढ़े हुए वजन के लिए लोगों से शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए आप अपने परिवार के सदस्यों की भी मदद ले सकते हैं।और आप जब भी बाहरी पदार्थों का सेवन करते समय यदि वह आपको देख लेते हैं तो उस चीज के लिए वह आपको रोके जिससे आपको वजन कम करने के लिए मदद मिल सकती है|

3. पानी है वजन घटाने का मुख्य टूल (Use Water As A Weight Loss Tool):- हर बार जब आप भूखे हों या आप खाना खाने जा रहे हों, तो पहले पानी पीने की कोशिश करें। यह एक निश्चित सीमा तक आपकी भूख को तुरंत कम करने का एक सरल तरीका है। अधिक पानी भी मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाता है और आपका पेट भरा हुआ लगता है।

4. कम खाना खाने के लिए खुद को मेनिपुलेट करें (Manipulate Yourself To Reduce Food Intake):- खाने को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें। इससे आपको कम खाने की आदत हो जाएगी और धीरे-धीरे खाना कम करने से आपको ज्यादा भूख भी नहीं लगेगी।आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि आपकी कैलोरी की मात्रा बहुत सीमित रहे। जिसे आप अपना वजन कम कर सकते हैं|

5. फाइबर का उपयोग करें (Use Fiber To Your Advantage):-अपने खाने में अधिक फाइबर शामिल करने की कोशिश करें और इसमें सोल्युबल (Soluble Fiber) और इन-सोल्युबल फाइबर (Insoluble Fiber) होना चाहिए। इससे आपको पेट भरा-भरा लगता है और आपको ज्यादा भूख नहीं लगती है।पत्तेदार सलाद में अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fiber) पाया जाता है|

6. खुद को नमक से दूर रखें (Keep Away From Salt):- नमक आपके शरीर में पानी को होल्ड(hold) करता है इसलिए इसका कम सेवन करना चाहिए। इसके अलावा नमक ब्लड प्रेशर को हाई रखता है, जिससे आपको पसीना ज्यादा आता है और आपकी भूख और प्यास बढ़ने लगती है| इसलिए आपको नमक का प्रयोग कम करना चाहिए|

7.व्यायाम करें(Do exercise) :- आपको वजन कम करने के लिए शुरुआत में ज्यादा व्यायाम की जरुरत नहीं है उदाहरण के लिए, सीढ़ियों से ऊपर और नीचे चढ़ना एक सबसे आसान, सबसे सरल हार्ट की एक्सरसाइज है जो आपके हिप्स, पैर और जांघों को टोन करता है। बाजार में घूमना, अपने मोबाइल पर बात करते समय चलना और घरेलू काम करना भी बेस्ट एक्सरसाइज हैं।

आपका वजन कम करने के 3 युक्तियां (3 tips to lose your weight):-

  • प्रोटीन, वसा आपके भोजन में से प्रत्येक में एक प्रोटीन स्रोत, वसा स्रोत होना चाहिए जो आपके वजन को कम करने में आपकी सहायता कर सकता है|
  • अधिक पानी का सेवन करना चाहिए|
  • आपको वजन कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कच्ची सब्जियों का सेवन करना चाहिए|

वजन प्रबंधन के लिए फार्माइट एप्पल साइडर सिरका पाउडर कैप्सूल(Farmity Apple Cider Vinegar Powder Capsule for Weight Management):-

सेब साइडर सिरका पूरक गोलियाँ सेब में शर्करा को किण्वित करने और उन्हें एसिटिक एसिड में बदलने से बनाई जाती हैं। एसिटिक एसिड में एक मजबूत गंध और एक tangy स्वाद होता है। आसानी से खपत के लिए कच्चे, अनफ़िल्टर्ड और अनपेचुरेटेड ऐप्पल साइडर विनेगर से फ़ार्मेसी ऐप्पल साइडर विनेगर कैप्सूल तैयार किए गए हैं। यह एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

फार्मिटी ऐप्पल साइडर सिरका 60 कैप्सूल उन खाद्य पदार्थों से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद कर सकते हैं जो हम उपभोग करते हैं। यह स्वस्थ आंत बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद कर सकता है और पाचन की प्रक्रिया में सुविधा का समर्थन कर सकता है। यह पुरुषों और महिलाओं में स्वस्थ वजन प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकता है। पेक्टिन और एसिटिक एसिड सामग्री होने के कारण इसका वजन कम हो सकता है जो परिपूर्णता की भावना के लिए सहायक हो सकता है ताकि लोग कम कैलोरी खाएं जिससे वजन कम होता है।

फ़ार्मेसी ऐप्पल साइडर सिरका कैप्सूल हानिकारक बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद कर सकता है। यह बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण होने वाली मुँहासे की चिंताओं में भी सहायक हो सकता है। एप्पल साइडर सिरका कैप्सूल की बोतल भी शरीर के प्रतिरक्षा समारोह में सुधार का समर्थन कर सकती है और शरीर की लड़ने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

फार्मिटी ऐप्पल साइडर सिरका कैप्सूल एक शक्तिशाली पूरक है जो शरीर से हानिकारक पदार्थों के आसान detox में मदद कर सकता है। यह हानिकारक मुक्त कणों से ऑक्सीडेटिव सेल और ऊतक क्षति के खिलाफ रक्षा प्रदान करने में मदद कर सकता है। एप्पल साइडर सिरका कैप्सूल भी रक्त शर्करा के स्तर के नियमन में मदद करने में सहायक हो सकता है। सर्वोत्तम परिणामों के लिए रोजाना सुबह और शाम को सेब साइडर सिरका के 2 कैप्सूल भोजन के समय ल्यूक गर्म पानी के साथ, या आपके चिकित्सक द्वारा निर्देशित किए जाते हैं।

वजन घटाने के लिए न्यूरेशन्स ग्रीन कॉफी बीन्स(Neuherbs Green Coffee Beans for Weight Loss):-

प्राकृतिक (Natural) :- नेहर्ब्स ग्रीन कॉफी बीन्स प्राकृतिक, ताजे और अनुपचारित कॉफी के दाने हैं।

प्रोमोट्स वेलनेस (Promotes wellness) :- ग्रीन कॉफी बीन्स क्लोरोजेनिक एसिड(Chlorogenic acid) और एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants) का एक अच्छा स्रोत हैं जो पाचन तंत्र से कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम करने में मदद कर सकते हैं, जिससे रक्त शर्करा और इंसुलिन स्पाइक्स(Insulin spikes)कम हो सकते हैं। यह आपके ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, समग्र कल्याण को बढ़ावा देता है। ऑर्गेनिक ग्रीन कॉफ़ी बीन्स आपके चयापचय और प्रतिरक्षा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

वजन घटाने (Reduce weight) :- क्लोरोजेनिक एसिड की उपस्थिति के कारण, आप उचित आहार और व्यायाम शासन के साथ वजन घटाने के लिए ग्रीन कॉफी का उपयोग कर सकते हैं।

पेट और वजन घटाने के उपकरण (Consonantiam Tummy Trimmer Stomach and Weight Loss Equipment -Single Spring):-

1.बहुउद्देशीय (Multipurpose) :- अपने पेट को समतल करने के लिए सही उत्पाद के लिए आपकी खोज अब कॉन्सनसेंटियम टमी ट्रिमर के साथ खत्म हो गई है। एक बहुमुखी उपकरण होने के नाते यह पेट, स्वर हथियार, जांघों, छाती को कम करने और आपके पेट को समतल करने में मदद करता है। आप इसके साथ 4 से 5 अलग-अलग व्यायाम कर सकते हैं।

2.स्ट्रोंग ग्रिप (Strong grip) :- इसके ठोस अभी तक चिकने हैंडल बेहतरीन पकड़ देते हैं और हाथों को फिसलने से बचाते हैं। गर्भनिरोधक पेड आपको वर्कआउट करते समय सही संतुलन और समर्थन देते हैं।

3.उपयोग में आसान (Easy to use) :- स्प्रिंग रॉड (3’6 तक फैला हुआ है), हालांकि शुरुआत में थोड़ा तंग था, सिंगल स्प्रिंग रॉड की तुलना में आपके वर्कआउट को शानदार नियंत्रण और स्थिरता देता है। इसका उपयोग पुरुष और महिला दोनों कर सकते हैं।

4.समय बचाता है (Saves time) :- कॉन्सनसेंटियम के इस उपकरण से उन व्यस्त प्रोफेशनल्स को राहत मिलती है जो व्यस्त कार्यक्रमों के कारण जिम के लिए समय का अभाव रखते हैं। दैनिक उपयोग के 45 मिनट आपको हमेशा इच्छित आकार प्राप्त करने में मदद करेंगे।

घरेलू नुस्खे, जिनकी मदद से आप बहुत ही आसानी से वजन घटा सकते हैं(Home remedies that can help you lose weight very easily)

वजन घटाने के नुस्खे(Weight loss tips):-

हमारे आसपास कई ऐसे चीजें होती हैं जिनकी मदद से आप आसानी से वजन घटा सकते हैं। लेकिन जानकारी ना होने के कारण आप उन्हें प्रयोग नहीं करते हैं। घर में मौजूद ऐसे ही चीजों के बारे में आज हम आपको बताएंगे जो वजन घटाने में मददगार हो सकते हैं।

1. शहद और नींबू (Honey and lemon) :- नींबू और शहद को एक साथ मिलाकर पीने से वजन कम होता है। एक गिलास हल्के गर्म पानी में शहद, नींबू का रस और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं। इस मिश्रण को हर सुबह खाली पेट लें। इससे वजन कम करने में मदद मिलेगी।

2.ग्रीन टी :- ग्रीन टी एक बहुत ही अच्छा एंटीऑक्सीडेंट जिससे फैट कम होता है। अगर आप हर रोज इसे लेते हैं तो आपके वजन में कमी जरूर देखी जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में माना की ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।

3.लौकी :- लौकी में पानी और रेशे पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। आप इसकी सब्जी या जूस में किसी भी तरह से ले सकते हैं। 100 ग्राम लौकी के जूस में केवल 12 कैलोरी ही होती है। इसे अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करने से वजन तो कम होगा ही साथ में आपकी स्किन भी ग्लो करेगी।

4. सेब का सिरका :- सेब के सिरके की मदद से वजन आसानी से कम कर सकते हैं। इसे पानी के साथ मिलाकर हर रोज सुबह लें। सिरके से रक्त शर्करा के नियन्त्रित होने के कारण यह वजन कम करने में सहायक है क्योंकि इन्सुलिन मुक्त शर्करा को वसा के रूप में संचित नहीं कर पायेगी।

5. करौंदा :- करौंदा विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत है साथ ही यह एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट भी है। करौंदे का जूस भी वजन घटाने में बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है।

6.बंद गोभी :- पत्ता गोभी एक खास सब्जी है लेकिन इसके सेवन से वजन को भी कम किया जा सकता है। एक कप पकाई बंदगोभी में सिर्फ 33 कैलोरी होती है जो वजन नहीं बढ़ने देती। बंदगोभी का सूप शरीर को ऊर्जा देता है लेकिन वसा की मात्रा का घटा देता है।

7.योगा :- योगा के जरिए वजन घटाने का चलन काफी पुराना है। वजन घटाने का यह सबसे उत्तम तरीका है। इससे शरीर के हर हिस्से का व्यायाम होता है जिससे फैट जमा नहीं होता है। अगर आप शरीर के किसी खास हिस्से से फैट हटाना चाहती हैं तो उसके लिए भी योग कर सकती हैं।

8.सौंफ :- वजन घटाने के लिए यह एक असरदार हर्बल नुस्खा है। भारी भोजन लेने से पंद्रह मिनट पहले एक कप सौंफ की चाय पी लें। यह आपकी भूख को कंट्रोल करेगा। इसके अलावा यह पेट से संबधित बीमारियों के लिए भी फायदेमंद होता है।

9.खूब पानी पिएं :- दिन में आठ से नौ ग्लास पानी पीने से भी वेट कम करने में मदद मिलती है। कई शोधों में माना गया है कि दिन में आठ से नौ ग्लास पानी से 200 से 250 कैलोरी आप बर्न कर सकते हैं।

10.दही :- दही खाने से भी वजन कम हो सकता है। इंटरनैशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी के अनुसार ज्यादा दही खाने वालों का वजन तेजी से घटता है या कम बढ़ता है। दही में कैल्शियम और प्रोटीन फैट को कम करने में सहायक होता है|

11.टमाटर :- टमाटर में बीटा कैरोटिन व आईकोपीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। अगर आप अपना वजन कम करने के बारे में सोच रहे हैं, तो भी टमाटर आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। इसमें फाइबर ज्यादा व कैलरीज कम होती हैं, जो वजन घटाने में मदद करती हैं।

12.खीरा :- मोटापा कम करे जब भी भूख लगे तब खीरा खाइये क्योंकि इसमें 96 प्रतिशत पानी और फाइबर पाया जाता है जो कि बिना कैलोरी के होता है, इसे खाने से आपका वजन नहीं बढेगा। अगर आप खीरे से तैयार सलाद बना कर खाएगें तो 3 दिन में लगभग 2 किलो वजन तो कम ही हो जाएगा।

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श्वेत प्रदर या सफेद पानी (white discharge)

महिलाओं को योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होने की समस्या होती है। जिसे सामान्य भाषा में सफेद पानी जाना, श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया कहा जाता है।

श्वेत प्रदर / सफेद पानी (white discharge)

  • श्वेत प्रदर या सफेद पानी का योनी मार्ग से निकलना Leukorrhea कहलाता है। यह हमेशा रोग का लक्षण नहीं होता।अधिकतर महिलाएं इस गलत फैमी में होती है कि सफेद पानी के जाने से शरीर में कमजोरी आती है, चक्कर आता है, बदन में दर्द होता है। शरीर से तेजस्विता चली जाती है|

    सफेद पानी का निकलना दो प्रमुख कारणो से होता है।

  • स्वाभाविक
  • बीमारी का लक्षण

    1. स्वाभाविक :- सफेद पानी निकलना प्राय: स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से कुछ मात्रा में होता है। माहवारी (मासिक धर्म) के पूर्व, माहवारी के बाद, अण्डोत्सर्ग (Ovulation)के समय अौर कामेच्छा उद्दिप्त होने पर स्वाभाविक है। इसके लिए कोइ उपचार कि आवश्यकता नहीं होती|

    2. बीमारी का लक्षण(Signs of illness):- श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिआ (Leukorrhea) या “सफेद पानी आना” स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है। ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है। यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण होता है।श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण है; या सामान्यतः प्रजनन अंगों में सूजन का बोधक है।

सफेद पानी का निकलना प्रमुख कारणो से होता है।

  • अन्य लक्षण(Other symptoms)
  • योनि स्थल पर खुजली होना
  • कमर दर्द होना
  • चक्कर आना
  • कमजोरी बनी रहना
  • कारण(Reason)
  • सफेद पानी का निकलना निम्न परिस्थिती में स्वाभाविक होता है
  • नवजात बालिका
  • कामेच्छा होनेपर
  • रजो प्रवाह (मासिक) के कुछ दिन पूर्व
  • बिजोत्पत्ती के दिन

सफेद पानी का आविर्भाव अधिक मात्रा में काम उत्तेजना होने पर होता है। यह पानी चिकना हट (lubrication) उत्पन्न करता है। यह व्यवस्था संभोग के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह सफेद पानी जब भी कामुक उत्तेजना मन में हो तब तब निकलता है चाहे आप विवाहित हो या अविवाहित| इसके निकलने से ना कमजोरी, ना दर्द, ना अन्य किसी भी प्रकार का स्वास्थ पर हानिकारक प्रभाव होता है। काम इच्छा होने पर सही मात्रा में यह उत्तपन्न ना हो तो मैथुन दर्द दायक हो सकता है। इसका इलाज करना पड़ता है।

श्वेत पानी मासिक स्राव (bleeding) के कुछ दिन पहले अधिक मात्रा में होता है। बिजोतपत्ती (ovulation) के समय इस्ट्रोजन (Estrogen)कि मात्रा बढ़ने से सफेद पानी ज्यादा बह सकता है। गर्भावस्था में भी सफेद पानी का निकलना अधिक मात्रा में होता है नवजात अर्भक बच्ची में भी माता के इस्ट्रोजन (Estrogen) कि वजह से सफेद पानी निकल सकता है।

अत्यधिक उपवास, उत्तेजक कल्पनाएं, अश्लील वार्तालाप, मुख मैथुन, सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना, सम्भोग काल में अत्यधिक घर्षण युक्त आघात, रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास,दो तीन पुरूषों से एकसाथ अत्याधिक संभोग करना, सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना व वैसे ही गन्दे बने रहना आदि इस रोग के प्रमुख कारण बनते हैं। बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है।

बचाव एवं चिकित्सा(Rescue & Medical)

साफ-सफाई – योनि को धोने के लिये सर्वोत्तम उपाय फिटकरी के जल से धोना है फिटकरी एक श्रेष्ठ जीवाणु नाशकसस्ती औषधि है, सर्वसुलभ है। और यदि अंदरूनी सफ़ाई के लिये पिचकारी से धोना (डूश लेना) हो तो आयुर्वेद की अत्यंत प्रभावकारी औषधि “नारायण तेल” का प्रयोग सर्वोत्तम होता है। मैथुन के पश्चात अवश्य ही साबुन से सफाई करना चाहिए।

प्रत्येक बार मल-मूत्र त्याग के पश्चात अच्छी तरह से संपूर्ण अंग को साबुन से धोना।
बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है। अतः महिलाओं को अनचाहे गर्भ की स्थापना के प्रति सतर्क रहते हुए गर्भ निरोधक उपायों का प्रयोग (कंडोम, कापर टी, मुँह से खाने वाली गोलियां) अवश्य करना चाहिए। साथ ही एक या दो बच्चों के बाद अपना या अपने पति का नसबंदी आपरेशन कराना चाहिए। शर्म त्याग कर इसके बारे में अपने पति एवं डाक्टर को बताना चाहिये। इस रोग की प्रमुख औषधियां अशोकरिष्ट, अशोक घनबटी, प्रदरांतक लौह, प्रदरहर रस आदि हैं।

वी वाश (V Wash)क्या होता है(What is V Wash)

वी वाश महिलाओं के गुप्तांगो को साफ़ करने और उन्हें संक्रमण तथा बीमारियों से बचाने वाला असरदार प्रोडक्ट है| इसमें लेक्टिक एसिड, टी-ट्री आयल आदि प्राकृतिक तत्व होते है, यह PH लेवल को कंट्रोल कर सही तरीके से महिलाओं की योनी की सफाई के लिए उम्दा प्रोडक्ट है| यह महिलाओं के गुप्तांगो की हाइजीन को बनाये रखता है जिससे आपको जनजांग से संबंधी कोई समस्या नहीं होती है| वी वाश में PH लेवल को बैलेंस करने का गुण होता है, जिसके कारण योनी की चमड़ी साफ़ और स्वस्थ रहती है और उसमे किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहीं होता है |

वी वाश का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?(Why are V wash used) ?

वी वाश महिलाओं की योनी को साफ़ रखने और उन्हें योनी संबंधी बीमारियों से बचाने के लिए बहुत ही असरदार प्रोडक्ट है और यह आपके जनजांग के PH लेवल को कंट्रोल में रखता है, ज्यादातर महिलाएं पानी या फिर साबुन से ही अपनी योनी को साफ़ कर लेती है, लेकिन असल में जो साधारण साबुन होता है उसका PH लेवल 8 से ज्यादा होता है, जबकि पानी का PH लेवल 7 ही होता है|

ऐसे में इतना अधिक PH योनि के लिए खतरनाक है. इससे वे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते है जो योनी की सुरक्षा के लिए जरूरी है, जिन्हें गुड बैक्टीरिया भी कहते है| इसलिए वी वाश का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसका PH लेवल 3 से 5 के बीच मे होता है और जो की योनी की सफाई में बहुत जरुरी है|

जब योनी को संतुलित PH लेवल मिलता है तो योनी में फंगस और बीमारियाँ पैदा करने वाले जीवाणु मर जाते है, जिसके परिणाम स्वरूप गुप्तांग स्वच्छ और स्वस्थ रहते है| महिलाओं की योनी की सफाई के लिए वी वाश प्लस का इस्तेमाल किया जाता है|

वी वाश कैसे यूज़ किया जाता है(How are we used V Wash)

वी वाश (V Wash )का इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है, थोड़ा सा वी वाश हाथ में ले और उसे योनी पर लगायें और झाग आने के बाद में पानी से धो ले, एक बात का हमेशा ध्यान रखें की योनि के अंदर वी वाश नहीं जाना चाहिए|

अगर हो सके तो वी वाश (V Wash) का प्रयोग रात के समय में करें क्योंकि उस समय पसीना कम आता है तो यह ज्यादा असर करता है, वी वाश के कोई दुष्परिणाम नहीं है फिर भी आपको सावधानी रखनी चाहिए| वी वाश लिक्विड के साथ वी वाश वाइप्स भी आते है जिन्हें आप वी वाश से योनी को धोने के बाद साफ़ कर सकते है|

वी वाश के फायदे (Benefits of v wash)

  • यह योनी को साफ़ और स्वस्थ रखता है|
  • योनी की दुर्गन्ध को रोकता है|
  • योनी के संक्रमण को रोकता है|
  • यह सफ़ेद डिस्चार्ज को रोकता है|
  • यह PH को बैलेंस करके जनजांग संबधी बीमारियों से बचाता है|
  • इसके प्रयोग से योनी में सूखापन नहीं रहता है|
  • इसे रोजाना यूज़ किया जा सकता है|
  • यह योनी की नाजुकता को बनाये रखता है|
  • इसके प्रयोग से योनी में खुजली, जलन आदि नहीं होती है|

योनि स्राव और उसके संकेत (Vaginal discharge and its signs)

योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज मध्य उम्र की महिलाओं की एक सामान्य समस्या है। सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी जाना कहते हैं। भारतीय महिलाओं में यह आम समस्या प्रायः बिना चिकित्सा के ही रह जाती है। सबसे बुरी बात यह है कि इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती, छुपा लेती हैं श्वेत प्रदर में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है, जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है। यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो स्थिति असामान्य मानी जाएगी। इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत प्रदर बढ़ता है। इसके प्रभाव से हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहता है। इस रोग में स्त्री के योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा, बदबूदार स्राव होता है, इसे वेजाइनल डिस्चार्ज कहते हैं। इस रोग के कारणों की जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ, लेडी डॉक्टर से करा लेना चाहिए, ताकि उस कारण को दूर किया जा सके।

योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है? (What is vaginal discharge and when is it called abnormal)?

ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा (म्युकस) का बहाव योनिक स्राव कहलाता है। अगर स्राव का रंग, गन्ध या गाढ़ापन असामान्य हो अथवा मात्रा बहुत अधिक जान पड़े तो हो सकता है कि रोग हो। योनिक स्राव (Vaginal discharge) सामान्य प्रक्रिया है जो कि मासिक चक्र के अनुरूप परिवर्तित होती रहती है। दरअसल यह स्राव योनि को स्वच्छ तथा स्निग्ध रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया है वहीं अण्डोत्सर्ग के दौरान यह स्राव इसलिये बढ़ जाता है ताकि अण्डाणु आसानी से तैर सके। अण्डोत्सर्ग के पहले काफी मात्रा में श्लेष्मा (mucous) बनता है। यह सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ होता है। लेकिन कई परिस्थितियों में जब इसका रंग बदल जाता है तथा इससे बुरी गंध आने लगती है तो यह रोग के लक्षण का रूप ले लेता है।

सफेद योनिक स्रावः मासिक चक्र के पहले और बाद में पतला और सफेद योनिक स्राव सामान्य है।

सामान्यतः सफेद योनिक स्राव के साथ खुजलाहट या चुनमुनाहट नहीं होती है। यदि इसके साथ खुजली हो रही है तो यह खमीर संक्रमण (yeast infection) को प्रदर्शित करता है। साफ और फैला (Clear and stretchy) हुआः यह उर्वर (fertile) श्लेष्मा है। इसका आशय है कि आप अण्डोत्सर्ग के चक्र में हैं। साफ और पानी जैसाः यह स्राव महिलाओं में सामान्य तौर पर पूरे चक्र के दौरान अलग-अलग समय पर होता रहता है। यह भारी तब हो जाता है जब व्यायाम या मेहनत का काम किया जाता है।

असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?(What causes abnormal vaginal discharge?)
योन सम्बन्धों से होने वाला संक्रमण जिनके शरीर की रोधक्षमता कमजोर होती है या जिन्हें मधुमेह का रोग होता है उनकी योनि में सामान्यतः फंगल यीस्ट नामक संक्रामक रोग हो सकता है।

योनिक स्राव से बचने के लिए (To avoid vaginal discharge) :- जननेन्द्रिय क्षेत्र को साफ और शुष्क रखना जरूरी है।योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए (जननेन्द्रिय पर पानी मारना) बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुतः इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुतः उसे संक्रामक रोगों से बचाते है।

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बालासन योग (Balasana Yoga)

बालासन का नाम बाल शब्द पर रखा गया है, जिसका मतलब होता है बच्चा। बालासन एक आराम करने की मुद्रा है

बालासन योग क्या है? (What is Balasana Yoga)?

शिशु या बच्चा, बालासन में हम एक शिशु की तरह वज्र आसन लेकर हाथों और शरीर को आगे की ओर झुकाते है। यह आसन बेहद आसान ज़रूर है मगर काफी लाभदायक भी है। कमर की मांसपेशियों को आराम देता है और ये आसन कब्ज़ को भी दूर करता है। जिसे कभी भी किया जा सकता है, ख़ास तौर से शीर्षासन के बाद तो ज़रूर करना चाहिए।

बालासन योग की विधि (Method of balasana yoga)

  • सबसे पहले अपने पैरों को पीछे की और कर के मोड़ लें जैसे चित्र में किया गया है और अपने
  • दोनों हांथों को अपने जांघों में रख कर सीधे बैठें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए अपने छाती को घुटनों से जोड़ें।
  • उसके बाद अपने हांथों को आगे की तरफ सीधे भी आप रख सकते हैं और पीछे भी रख सकते हैं।
  • उसके बाद ध्यान से धीरे-धीरे साँस लें और और उस मुद्रा में 2-3 मिनट तक रुकें।
  • इस योग को 5-10 बार दोहोराये।

बालासन योग के फायदे (Benefits of balasan yoga)

  • मानसिक चिंतन दूर होता है।
  • कमर का दर्द दूर होता है।
  • कंधो का दर्द और पीठ दर्द आदि में आराम मिलता है।
  • यह आसन महिलाओ के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इससे मासिक धर्म में होने वाले दर्द से निजात मिलती है।
  • इसके नियमित अभ्यास से तनाव दूर होता है और मस्तिष्क शांत रहता है।
  • यह आसन डिप्रेशन, माइग्रेन और चिड़चिड़ाहट को दूर करने में भी मदद करता है।
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बद्ध कोणासन योग (Buddha Konasana Yoga)

बद्धकोणासन करने से रजोनिवृत्ति से होने वाली समस्याएं दूर हो जाती है साथ ही यह आसन दिल को भी उत्तेजित करता है।

बद्ध कोणासन योग क्या है? (What is Buddha Konasana Yoga?)

बंध कोणासन। संस्कृत शब्द बंध का अर्थ होता है बंधन, बंधा हुआ। कोण अर्थात कोना या कार्नर। इस आसन को करने के बाद व्यक्ति की आकृति त्रिभुजाकार कोण की तरह हो जाती है । इस आसन को ‘तितली आसन’ या Butterfly Pose भी कहा जाता है। इस मुद्रा में दोनों टांगें मुड़कर हिप्स के पास आ जाती हैं और दोनों टांगों से होने वाला मूवमेंट तितली के पंखों की मुद्रा बनाता है। बद्ध कोणासन को करना बहुत आसान है |

बद्ध कोणासन योग की विधि (Method of Buddha konasana yoga)

  • इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले योगा मेट बिछा के दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं।
  • बद्ध कोणासन करने के लिए आप दंडासन का सहारा लेकर बैठ सकते हैं।
  • इसके बाद श्वास अन्दर लें अपने बाएं पैर को अपनी ओर मोड़ें।
  • फिर उसके बाद अपने दाएं पैर को भी अपने ओर मोड़ लें।
  • दोनों पैरों के पंजों से पंजे मिलाएं और दोनों पैरों की उंगलियां आपस में मिला लें।
  • अब दोनों पंजों को पकड़ के अपनी ओर जितना हो सके खींचे। ध्यान रखने की इसे जबरजस्ती अधिक ना करें।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को उठा के दोनों घुटनों पर रखें।
  • अब दोनों हाथों से घुटनों को धीरे-धीरे दबाएँ जिससे दोनों घुटने फर्श रख जाएं। ध्यान रखें की अगर आपके घुटने जमीन पर नहीं आ रहे हैं तो इसे जबरजस्ती करने का प्रयास ना करें।
  • कुछ दिन के अभ्यास से पैरों में लचीलापन आ जायेगा जिससे फिर आपके घुटने जमीन पर आने लगेंगे।
  • इस मुद्रा में आप 2 से 3 मिनिट के लिए रहें।
  • इस आसन से बाहर आने के लिए आप श्वास को अन्दर लें फर्श से दोनों घुटनों को ऊपर उठायें और धीरे-धीरे दोनों पैर को खोल के सीधा करें।

बद्ध कोणासन योग के फायदे (Benefits of Buddha Konasana Yoga)

  • पेट के अंगों को तंदरुस्त रखता है।
  • साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखता है।
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भुजंगासन योग (Bhujangasana Yoga)

आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन (संस्कृत: भुजंगसन) कहा जाता है।

भुजंगासन योग क्या है? (What is Bhujangasana Yoga)?

“भुजंग” शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भुजंग का अर्थ सर्प होता है, इसलिए भुजंग-आसन को “सर्प आसन” भी कहा जाता है। … सम्पूर्ण व्यायाम कहे जाने वाले सूर्यनमस्कार (Suryanamaskar) में भुजंगासन सातवे क्रम पर आता है।

भुजंगासन योग की विधि (Method of bhujangasana yoga)

  • सबसे पहले पेट नीचे की तरफ कर के लेट जाएँ।
  • उसके बाद एक लम्बी साँस के साथ अपने शरीर के उपरी भाग को जैसे सर, गर्दन, कन्धों और छाती को ऊपर की तरफ ले जाएँ जैसे चित्र में दिया गया है।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड तक रुकें।
  • उसके बाद दोबारा 4-5 बार इस आसन को दोहोराएँ।

भुजंगासन योग के फायदे (Benefits of bhujangasana yoga)

  • पेट में एसिडिटी और गैस की प्रॉब्लम दूर करता है।
  • मोटापा कम होता है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • अपच और कब्ज की शिकायत दूर करता है।
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अर्धमत्स्येन्द्रासन योग (Ardhamatsyandrasana Yoga)

अर्धमत्स्येंद्रासन का नाम महान योगी मत्स्येंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। अर्धमत्स्येंद्रासन योग के बहुत सारे महत्वपूर्ण लाभ है डायबिटीज को रोकना। इसलिए इसको डायबिटीज के रोकथाम के लिए रामबाण कहा गया है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग क्या है? (What is Ardhamatsyandrasana Yoga?)

बाहों, कंधों, ऊपरी पीठ और गर्दन में तनाव को कम करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन स्लिप-डिस्क के लिए चिकित्सीय है| बायें बाजू को दायें घुटने के बाहर की ओर ले आयें और दायां टखना पकड़ लें। धड़ को यथा संभव दायीं ओर मोड़ें। दायां बाजू पीठ के ऊपर रखें और दायें कंधे के ऊपर से देखें। सामान्य श्वास के साथ कुछ मिनट तक इसी स्थिति में रहें और पूरे शरीर को आराम दें। (लेकिन यह आसन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर करें)

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग की विधि  ( Ardhamatsyandrasana Yoga method )

  • सबसे पहले नीचे सीधे बैठ जाएँ।
  • उसके बाद अपने बाएँ पैर को मोड़ें और अपने पीछे दाएं तरफ को छूने की कोशिश करें। समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद अपने दाएँ पैर को अपने बाएँ पैर के अगले तरफ ले जाकर रखें। दायाँ पैर अगली तरफ जमीन को छूना चाहिए।
  • उसके बाद अपने शरीर को पैर मोडे हुए तरफ के विपरीत दिशा में तानें या खींचे और अगली तरफ पैर को पीछे से छूने की कोशिश करें।
  • इस मुद्रा में 20-30 सेकंड के लिए रुकें।
  • उसके बाद अगली दिशा में भी इस योगासन को दोहराएँ।

अर्धमत्स्येन्द्रासन योग के फायदे (Benefits of ardhamatsyandrasana yoga)

  • मांशपेशियों को अच्छा खिचाव मिलता है।
  • रीड की हड्डी में मजबूती आती है।
  • रक्त परिसंचरण सही तरीके से होता है।
  • कब्ज़ और अपचन से शरीर को बचाता है।
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