वीरभद्रासन योग (Veerabhadrasana Yoga)

वीरभद्रासन सबसे सुदृढ़ योग मुद्राओं में से एक है, यह योग के अभ्यास में सुदृढ़ता और सम्पूर्णता प्रदान करता है।

वीरभद्रासन योग क्या है? (What is Veerabhadrasana Yoga)

वीरभद्रासन जिसको वॉरईयर पोज़ (Warrior Pose) के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन का नाम भगवान शिव के अवतार, वीरभद्र, एक अभय योद्धा के नाम पर रखा गया। योद्धा वीरभद्र की कहानी, उपनिषद की अन्य कहानियों की तरह, जीवन में प्रेरणा प्रदान करती है। यह आसन हाथों, कंधो ,जांघो एवं कमर की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।

वीरभद्रासन योग की विधि (Method of Veerabhadrasana yoga)

  • सबसे पहले सीधे खड़े हों।
  • दोनों पैरों के बिच 3-4 फीट की दूरी रखें।
  • लम्बी साँस लें और दोनों हांथों को जमीन के समान्तर में ऊपर उठायें और अपने सर को दाएँ तरफ मोड़ें।
  • उसके बाद साँस छोड़ते हुए अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री में मोड़ें और हल्का सा दाएँ तरफ मोड़ें।
  • पैर को मोड़ने के तरीके को समझने के लिए फोटो को देखें।
  • उसके बाद इस पोजीशन में कुछ समय के लिए रुकें।
  • ऐसे 5-6 बार करें।

वीरभद्रासन योग की फायदे ( Benefits of Veerabhadrasana Yoga)

  • हाथ, पैर और कमर को मजबूती प्रदान करता है।
  • शरीर में संतुलन बढाता है, सहनशीलता बढती है।
  • बैठ कर कार्य करने वालों के लिए अत्यंत लाभदायक है।
  • कंधो के जकड़न में अत्यंत प्रभावशाली है।
  • कंधो के तनाव में तुरंत मुक्त करता है। साहस, कृपा एवं शांति की वृद्धि करता है

वीरभद्रासन की सावधानियाँ | (Precautions of Virabhadrasana)

  • अगर आप रीढ की हड्डी के विकारों से पीड़ित है य किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं तो चिकित्सक से परामर्श ले कर ही ये आसन करें।
  • उच्च रक्तचाप वाले मरीज़ यह आसन न करें।
  • वीरभद्रासन गर्भवती महिलाओ के लिए दुसरे और तीसरे तिमाही में अत्यन्त लाभदायक है।
  • आप इस आसन को करते समय दीवार का सहारा लें। इस आसन को करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
  • अगर आप को घुटनों में दर्द है य गठिया की बीमारी है तो घुटनों के पास सहारे का उपयोग करें।
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